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कृषि ऋण पर 600 करोड़ का ब्याज माफ

केंद्र सरकार ने चुनाव से पहले किसानों को राहत की सौगात दी है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को नवंबर और दिसंबर 2016 के लिए कृषि ऋण पर ब्याज छूट को मंजूरी दे दी. जिन किसानों ने रबी फसल की बुआई के लिए अल्पावधि के लिए सहकारी बैंकों से ऋण ले रखा है, उन्हें इस घोषणा से जरूर राहत मिलेगी.

नवंबर में 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोट बंद किए जाने के कारण किसानों को नकदी की परेशानी झेलनी पड़ी और रबी फसल की बुआई प्रभावित हुई और वे ऋण का ब्याज नहीं चुका सके.

सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नवंबर और दिसंबर 2016 के लिए कृषि ऋण पर ब्याज छूट को मंजूरी दे दी गई, जो किसानों ने रबी फसल की बुआई के लिए अल्पावधि के लिए सहकारी बैंकों से ले रखी है."

बयान में कहा गया है कि यह निर्णय सहकारी बैंकों के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया, ताकि किसानों को आसानी से फसल ऋण मिल सके और वे नकदी की कमी के कारण रबी फसल की बुआई में हुई कठिनाई से बाहर आ सकें.

बयान में कहा गया है, "सहकारी बैंकों को कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जरिए अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराए जा रहे हैं, ताकि वे किसानों को नवंबर और दिसंबर महीने का ब्याज छूट दे सकें." यह सहकारी बैंकों द्वारा चालू वित्त वर्ष (2016-17) में किसानों के लिए जारी रखा जाएगा.

बयान के अनुसार, "इस मद में 1,060.50 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय दायित्व की जरूरत होगी. ब्याज सब्सिडी योजना को लागू करने के लिए वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 15,000 करोड़ रुपये की राशि पहले से आवंटित की गई है, जिसका पहले से ही उपयोग कर लिया गया है."

खास बातें

* नोटबंदी से किसानों को ऋण का ब्याज नहीं चुका सके

* रबी फसल की बुआई में हुई कठिनाई से बाहर आ सकेंगे किसान

* सहकारी बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों को मिलेगा फायदा

नाबार्ड सहकारी बैंकों के लिए जुटाएगा 20,000 करोड़ : सरकार ने नाबार्ड को बाजार से 20,000 करोड़ रुपए जुटाने की अनुमति दे दी है. यह धन किसानों को सस्ता फसल ऋण देने के लिए सहकारी बैंकों को 4.5 प्रतिशत की ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा. मानसून अच्छा रहने और कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर को देखते हुए फसल ऋण बढ़ने की उम्मीद है. इस संबंध में निर्णय हालांकि पहले ही ले लिया गया था, लेकिन मंत्रिमंडल ने इसे मंगलवार को मंजूरी दी.

बैठक के बाद जारी सरकारी वक्तव्य में कहा गया है कि नाबार्ड को इस काम के लिए आम बजट में 2,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें कहा गया है कि नाबार्ड को 2016-17 में ही 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराकर इसकी शुरुआत कर दी जाएगी. कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग की योजना के मुताबिक इसपर 1.8 प्रतिशत की ब्याज सहायता और 0.2 प्रतिशत की नाबार्ड का प्रशासनिक खर्च भी उपलब्ध कराया जाएगा.

दो लाख तक के होम लोन ब्याज पर सब्सिडी

केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में आवास विकास कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना को मंजूरी दे दी. सरकार गांवों में बनाए जाने वाले घरों के लिए ग्रामीणों को दो लाख तक के लोन पर ब्याज दरों में 3 फीसद सब्सिडी देगी. यह सुविधा उन्हीं घरों के निर्माण के लिए दी जाएगी जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नहीं बनाए जा रहे हैं. इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को नए घर बनाने तथा अपने पुराने और कच्चे घरों को पक्के घरों में बदलने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी.

पांच विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लोकलुभावन योजना की घोषणा न करने के चुनाव आयोग के आदेश के बावजूद सरकार ने बजट से पहले ही किसानों, बुजुर्गों और ग्रामीणों के लिए तोहफे दे दिए.



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