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ना डीजल ना पेट्रोल ना पानी, ये इंजन तो हवा से चलता है. ..

सफलता उन्ही को मिलती है, जिन्हें खुद पर आत्मविश्वास है कि वो इस कार्य को कर सकतें हैं. और ये सोच ही उन्हें सफल बनाती है. जी हां दोस्तों बात है तक़रीबन 11 साल पहले की जब राजस्थान के भारत जिले के दो व्यक्ति अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकिचंद अपने गांव में ही एक दुकान पर मोटर गाड़ियों के टायर में हवा भरने का काम करते थे.

KJ Staff
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सफलता उन्ही को मिलती है, जिन्हें खुद पर आत्मविश्वास है कि वो इस कार्य को कर सकतें हैं. और ये सोच ही उन्हें सफल बनाती है. जी हां दोस्तों बात है तक़रीबन 11 साल पहले की जब राजस्थान के भारत जिले के दो व्यक्ति अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकिचंद अपने गांव में ही एक दुकान पर मोटर गाड़ियों के टायर में हवा भरने का काम करते थे. और एक दिन वो किसी ट्रक के पहिये की हवा की जाँच कर रहे थे तो उनका हवा भरने का इंजन खराब हो गया. ज्यादा पैसा न होने के कारण वो इंजन सही करने में समर्थ नहीं थे. थोड़ी देर में इंजन का वाल खुला और टैंक में भारी हवा तेजी से बाहर निकलने लगी. ज्यादा दबाव पड़ने के कारण इंजन का पहिया उल्टा चलने लगा. ये सब अपनी आँखों से देख रहे मित्रों ने सोचा कि अगर इसी तरह एक ऐसे इंजन को बनाया जाय जो हवा से चल सके. और फिर शुरू की कोशिश एक नए आविष्कार की.

समय बीता और धीरे धीरे कोशिश ने सफलता का रूप धारण किया और साल 2014 में इस आविष्कार को पूरा कर दिया गया. आज अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकिचंद इस इंजन से खेतों में सिंचाई का कार्य करते हैं.

किसान भाइयों अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकिचंद पढ़े लिखे नही है लेकिन जो आविष्कार उन्होंने किया है वो काबिले तारीफ़ है. बस जरुरत थी मेहनत लगन और आत्मविश्वास की. जब दो अनपढ़ दोस्तों ने अपने सपने को साचा करने की पहल की तो उसे आखिर अंजाम भी दिया. आज 80 फीट की गहराई से इस हवा के इंजन से पानी खींचा जाता है. 11 साल की मेहनत के बाद यह इंजन बनकर तैयार हो गया है. अब अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकिचंद मोटरसाईकिल को हवा से चलाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहें है.

अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकिचंद 11 साल से लगातार हवा के इंजन पर ही शोध कर रहे हैं। अब तक बहुत कुछ सीख चुके हैं.  इसे बनाने में करीब 3.5 लाख रुपए के उपकरण सामान ला चुके हैं। अब दुपहिया चौपहिया वाहनों को हवा से चलाने की योजना बना रहे हैं.

अर्जुन कुशवाह ने बताया, “चमड़े के दो फेफड़े बनाए। इसमें एक छह फुट और दूसरा ढाई फुट का. इसमें से एक बड़े फेफड़े इंजन के ऊपर लगाया. जबकि इंजन के एक पहिए में गाड़ी के तीन पटा दूसरे बड़े पहिए में पांच पटा लगाकर इस तरह सेट किया कि वह थोड़ा से धक्का देने पर भार के कारण फिरते ही रहें। पिस्टन वॉल तो लगाई ही नहीं है.

जब इंजन के पहिए को थोड़ा सा घुमाते हैं तो वह बड़े फेफड़े में हवा देता है. इससे छोटे फेफड़े में हवा पहुंचती है और इंजन धीरे-धीरे स्पीड पकड़ने लगता है. इससे इंजन से पानी खिंचता है. बंद करने के लिए पहिए को ही फिरने से रोकते हैं। हवा से चल नहीं जाए, इसके लिए लोहे की रॉड फंसाते हैं.

English Summary: No diesel na petrol no water, this engine runs through the air. Published on: 23 December 2017, 10:46 PM IST

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