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इंजीनियर ने खराब स्कूटर के इंजन से बनाया किसानों के लिए सस्ता और टिकाऊ हैंड ट्रैक्टर, जानें इसकी खासियत

सच कहा जाता है कि नए युग की नई सोच एक मिसाल कयाम कर सकती है. कुछ ऐसा ही हिमाचल प्रदेश के एक इंजीनियर ने कर दिखाया है, जिसकी तारीफ चारो तरफ हो रही है. यह कहानी एक ऐसे सफल इंजीनियर की है, जिसने कबाड़ में पड़े एक स्कूटर के इंजन से हैंड ट्रैक्टर बनाया है. इस इंजीनियर का नाम जनक भारद्वाज है, जो कि मंडी जिले के नगवाई गांव के रहने वाले हैं.

बचपन से है मशीनों से लगाव

जनक ने सोलन के बहरा यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इस दौरान जनक और उनके दोस्तों ने इंस्टीट्यूट के पास ही एक वर्कशॉप की शुरूआत की, ताकि वे आसानी से किताबी ज्ञान को समझ पाएं. इस वर्कशॉप में गाड़ियों और अन्य उपकरणों को ठीक करने का काम करते थे. कई किसान उनके पास अपने पॉवर टिलर समेत अन्य कृषि उपकरण ठीक कराने पहुंचते थे. इस दौरान जनक को लगा कि जब किसान बार-बार उपकरण ठीक कराते हैं, तो उनका आर्थिक खर्च काफी बढ़ जाता है. तभी जनक ने ठान लिया कि क्यों न कोई ऐसी टिकाऊ मशीन बनाई जाए, जिससे किसानों की मेहनत, समय और लागत की बचत हो पाए.

किसानों के लिए बनाया हैंड ट्रैक्टर

यह कृषि उपकरण किसानों के लिए काफी टिकाऊ और सस्ता है. इस हैंड ट्रैक्टर को बनाने में लगभग 1 महीने का समय लगा है. खास बात है कि इस हैंड ट्रैक्टर को कबाड़ में पड़े स्कूटर के इंजन से बनाया गया है. इसमें कुल 20 हजार रुपए की लागत लगी है, जबकि बाजार में पॉवर टिलर की कीमत 1 लाख रुपए से भी अधिक की है.

1 लीटर पेट्रोल में होगी 1 बीघा खेती की जुताई

यह हैंड ट्रैक्टर दूसरे पॉवर टिलर के मुताबिक अधिक क्षमता रखता है. इसकी मदद से 1 बीघा खेत की जुताई केवल 1 लीटर पेट्रोल में हो जाएगी. इसको खेतों तक पहुंचाना काफी आसान है. खास बात है कि इसको 2 हिस्सों में खोलकर आसानी से खेतों में ले जा सकते हैं. इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के लिए भी हैंड ट्रैक्टर काफी मददगार साबित होगा.

ऐसे काम करता है हैंड ट्रैक्टर

इसमें चार ब्लेड लगी होती है. इसको इंजन के साथ जुड़ा जाता है, जो कि खेती की जुताई में काम आता है. बता दें कि इसको हाथ से पकड़कर उपयोग में लाया जाता है. इस उपकरण का बजट काफी कम होता है. इसमें आप छोटा हल भी अलग से लगा सकते हैं. खेत की पहली बार जुताई में अलग हल का उपयोग कर सकते हैं. दूसरी जुताई में सक्षम हल का उपयोग करके पैट्रोल, समय और मेहनत की बचत कर सकते हैं.

कई पुरस्कार से हुए सम्मानित

इस हैंड ट्रैक्टर के अविष्कार के लिए जनक को साल 2017 में नेशनल अवॉर्ड फॉर स्कील डेवलपमेंट का अवॉर्ड मिल चुका है. इसके साथ ही न्यू इनोवेशन के लिए भी नेशनल अवॉर्ड मिला है. इतना ही नहीं, उन्हें हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से  भी सम्मानित किया जा चुका है.

500 छात्रों को दिया निशुल्क प्रशिक्षण

आपको बता दें कि जनक हिमाचल के सोलन जिला के क्यारीमोड में रिसर्च और डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट चला रहे हैं. यहां आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज के कई छात्र प्रशिक्षण के लिए आते हैं. खास बात है कि जनक बिना पैसे लिए इन छानों को प्रशिक्षण देते हैं. पिछले 3 सालों में वह लगभग 500 से अधिक छात्रों को निशुल्क प्रशिक्षण दे चुके हैं.

किसानों के लिए कर रहे हैं रिसर्च

जनक का मानना है कि भारत अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, इसलिए इसको बढ़ावा देने के लिए कई अन्य रिसर्च के कामों में भी जुटे हैं. बता दें कि किसानों तक हैंड ट्रैक्टर को पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रोडक्शन की तैयारियां शुरू कर दी है. जनक अपनी सफलता के लिए किसानों को प्रेरणादायक मानते हैं. किसानों को खेती में समस्या न हो, इसलिए वह कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को विकसित करने का प्रयास करते हैं.



English Summary: Made a durable hand tractor with poor scooter engine for farmers

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