इन किसानों से सिखें खेती के लिए कैसे की जाती है जुगाड़ ?

किसानों के किसानी जुगाड़ों की सफलता

आज की तेज़ पीढ़ी के बारे में बात करें तो यह कहना गलत नहीं होगा की वह काफी ज्यादा कलात्मक सोच की स्वामी है. किसानी और खेती के लिए कई लोग जुगाड़ का तरीका अपनाते हैं ऐसे किसानी जुगाड़ जो लोगो ने घर बैठे -बैठे बना लेते हैं मगर इसके बारे में सोचने में भी वैज्ञानिकों को सालों लग जाते हैं.

योगेश का ट्रेक्टर रिमोट :

राजस्थान के बारां जिले के बमोरीकला गांव के योगेश ने अपने पिता का ट्रेक्टर चलाने के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने के लिए ऐसा यंत्र बनाया है जिससे वह बिना ट्रेक्टर चलाये सिर्फ बैठ कर उस यंत्र की सहायता से चला पाएंगे.

निलेशभाई का मिनी ट्रेक्टर:

गुजरात के एक किसान निलेशभाई भलाला ने मिनी ट्रैक्टर तैयार किया है. इस ट्रैक्टर का नाम नैनो प्लस है. दस एचपी पावर वाला यह मिनी ट्रेक्टर एक छोटे किसान के सारे काम कर सकता है. इस ट्रैक्टर से आप जुताई, बिजाई, निराई गुड़ाई, भार ढ़ोना, कीटनाशक छिड़कना आदि काम कर सकते हैं. यह दो मॉडल में आता है, एक मॉडल में 3 टायर लगे होते हैं और दूसरे में 4 टायर लगे होते हैं.

पारस का बाइक हल :

राजस्थान के भगवानपुरा गांव के किसान ने जुताई के लिए देसी जुगाड़ तैयार किया है. जिससे कई किसानों को राहत मिली है उनके पास ट्रैक्टर नहीं होने पर उन्होंने ऐसा जुगाड़ किया और इसके सहारे बाइक को जुताई का साधन बना लिया. इन्होंने कबाड़ की बाइक में हल लगाकर बनाए इस जुगाड़ अपने खेत की जुताई की. उन्होंने कबाड़ की बाइक से बनाया था यह हल. इसमें उनका 25 हज़ार का खर्चा आया और इस जुगाड़ ने उनकी 2 साल में लाख रुपये की बचत करवाई है. 

मनीशा शर्मा ,कृषि जागरण

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