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पालक-बथुआ से अधिक लाभदायक है ये साग, मिलेंगे गजब के फायदे

Malabar Spinach: पत्तेदार सब्जियां का सेवन करने से एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइबर प्राप्त होता है, जो हमारी पाचन शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ हृदय रोगों को भी कम करने का काम करती है. पत्तेदार सब्जियां का उपयोग सलाद, सूप और सब्जियों को बनाने के लिए किया जा सकता है.

मोहित नागर
पालक-बथुआ से अधिक लाभदायक है ये साग (Picture Credit- FreePik)
पालक-बथुआ से अधिक लाभदायक है ये साग (Picture Credit- FreePik)

Poi Saag Benefits: पत्तेदार सब्जियां को सेहत के लिए काफी लाभदायक माना जाता है. गर्मिंयों के मौसम में कई तरह की सब्जियां बाजारों में देखने को मिल जाती है, लेकिन पत्तेदार सब्जियां कम ही उपलब्ध होती है. पत्तेदार सब्जियां का सेवन करने से एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइबर प्राप्त होता है, जो हमारी पाचन शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ हृदय रोगों को भी कम करने का काम करती है. पत्तेदार सब्जियां का उपयोग सलाद, सूप और सब्जियों को बनाने के लिए किया जा सकता है. यदि नियमित रूप से पत्तेदार सब्जियों का सेवन करते हैं, तो इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और वजन को भी नियंत्रण में रखने में आसानी होती है.

जब कभी पत्तेदाज सब्जियों का नाम आता है, तो हमारे दिमाग में पालक और बथुआ का नाम सबसे पहले आता है. लेकिन एक पत्तेदार सब्जी ऐसी भी है, जो सेहत के लिए पालक-बथुआ से भी अधिक फायदेमंद मानी जाती है.

पोई साग

पोई साग, इसे पालक और बथुआ से जयादा लाभदायक माना जाता है. इस साग में विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं. इस पत्तेदार सब्जी में शरीर को फायदा पहुंचाने वाले पोषक तत्व काफी अच्छी खासी मात्रा में पाए जाते हैं. पोई एक ऐसी सब्जी है, जिसमें आयरन और प्रोटीन पालक से भी अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसमे विभिन प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं, इसमें - विटामिन A, B, C और E काफी अच्छी खासी मात्रा में पाए जाते हैं. इस सब्जी को बेल वाली सब्जी के नाम से भी लोगों के बीच में पहचाना जाता है. इसकी पत्तियां हरी और मोटी होती है, जिन्हें सब्जी या सलाद के साथ खाया जा सकता है.

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पोई साग की खेती

भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया में पोई साग की मुख्यतौर पर खेती की जाती है. यह गर्मी में उगने वाली फसल है, जिसके उत्पादन से किसान अधिक कमाई कर सकते हैं. इसका रंग हरा होता है और यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है, इसलिए बाजरों में इसकी खास डिमांड ही रहती है. पोई साग की खेती किसान पूरे साल कर सकते हैं. पोई साग की खेती किसानों के लिए काफी फायदे का सोदा साबित हो सकती हैं. पोई की रोपाई का उपयुक्त समय सितंबर से लेकर जनवरी के बीच तक माना जाता है. किसानों को इसकी रोपाई करने के लिए दोमट या बलुई मिट्टी में करनी चाहिए. पहली जुताई के बाद आपको इसके खेत में सड़े गोबर की खाद को कंपोस्ट के साथ मिलाकर डाल देना है. गर्मियों के दिन में इसकी फसल को 5 से 10 दिनों के अंतराल में पानी की आवश्यकता होती है.

पोई साग से होने वाले फायदें

इस साग का सेवन करने से ड्डियां मजबूत होती है, क्योंकि इसमें कैल्शियम की काफी अच्छी मात्रा पाई जाती है. यह हार्ट के लिए काफी लाभदायक मानी जाती है, इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है. फाइबर शरीर में जमे बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने का काम करता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम रहता है. पाई साग में मैग्नीशियम, कैल्शियम और जिंक जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो हमारी इम्यूनिटी पावर को बढ़ाने का काम करते हैं. इसके अलावा, पोई साग स्किन के लिए भी काफी लाभदायक माना जाता है. इसमें विटामिन-सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो हमारी स्किन को ग्लोइंग और जवां रहने में मदद करती है.

English Summary: poi saag is more beneficial than spinach and bathua malabar spinach benefits Published on: 12 June 2024, 11:53 AM IST

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