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मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा क्यों है खास? जानें वो 2 बड़े रहस्य, इसके पीछे की वजह

Makar Sankranti: मकर संक्रांति की धूम पूरे भारत में जोरों शोरों से चल रही है और हर राज्य में इस त्योहार को अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी नहीं तो आइए यहां जानें...

KJ Staff
khichdi
मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा क्यों है खास (Image Source-AI generate)

हिंदू धर्म में विभिन्न त्योहार मनाएं जाते हैं और उन्हीं में से एक है मकर संक्रांति जिसका हिंदू धर्म में बेहद महत्व है. साथ ही इस पर्व को हर राज्य में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे- जम्मू में यह पर्व उत्तरैन' और 'माघी संगरांद' के नाम से विख्यात है और वहीं, बिहार में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है. साथ ही इस पर्व को मनाने के पीछे का यह राज है कि यह पर्व उस समय मनाया जाता है, जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं.

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों से जाना जाता है. कहीं इसे उत्तरायण कहीं खिचड़ी, तो कहीं पोंगल के रूप में मनाया जाता है. उत्तर भारत में खासकर इस दिन खिचड़ी दान और खिचड़ी भोजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है. साथ ही कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से सूर्य और शनि दोनों प्रसन्न होते हैं और कुंडली में मौजूद ग्रह दोष शांत होते हैं.

वहीं, इस दिन गंगा स्नान, सूर्य उपासना, व्रत,  दान और कथा श्रवण का विशेष महत्व है. मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान कई गुना फल देता है.

मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों खाई जाती है?

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा के पीछे यह दो धार्मिक कारण छिपे हैं. आइए जानें-

धार्मिक मान्यता

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह कहां जाता है कि खिचड़ी का दान करने से जीवन में स्थिरता आती है और दरिद्रता दूर हो जाती है. यही वजह होती है इस दिन स्नान के बाद खिचड़ी दान करने के बाद उस प्रसाद को ग्रहण किया जाता है. यही वजह है कि खिचड़ी का इस पर्व में अधिक महत्व है.

ज्योतिष कारण

ज्योतिष के मुताबिक खिचड़ी में चावल और मूंग दाल दोनों का प्रयोग होता है. चावल चंद्रमा का और मूंग दाल बुध ग्रह का प्रतीक मानी जाती है. इन दोनों का संतुलन मानसिक शांति और बुद्धि को मजबूत करता है और ऐसा करने से घर में सुख-शांति आती है.

खिचड़ी दान करने से क्या होता है?

मकर संक्रांति पर खिचड़ी, तिल, गुड़, वस्त्र और घी का दान विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी दान करने से यह लाभ प्राप्त होते हैं-

  • आप अगर खिचड़ी का दान करते हैं, तो सूर्य और शनि की कृपा प्राप्त होती है.

  • खिचड़ी दान से रोग, कष्ट और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.

  • साथ ही घर में सुख-समृद्धि आती है.

खिचड़ी बनाने की विधि

सामग्री- मूंग दाल, चावल, घी, जीरा, हींग, धनिया पाउडर, नमक, पानी

विधि-

  • अगर आप खिचड़ी बनाना सोच रहे हैं, तो सबसे पहले चावल और मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर कम से कम 30 मिनट के लिए भिगो दें. इसके बाद पानी निकाल लें.

  • उसके बाद एक पैन या कुकर में घी गर्म कर उसमें जीरा और हींग डालें. जीरा चटकने के बाद चावल और दाल डालकर तेज आंच पर हल्का भून लें.

  • अब खिचड़ी में धनिया पाउडर और स्वाद अनुसार नमक डालकर मिलाएं. इसके बाद खिचड़ी के हिसाब से उसमें पानी डालें और ढक्कन बंद कर धीमी आंच पर 10–12 मिनट पकाएं. खिचड़ी अच्छी तरह गल जाए, तो गर्मागर्म सर्व करें.

English Summary: Makar Sankranti eating khichdi Learn two major secrets reasons behind it Published on: 13 January 2026, 12:47 PM IST

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