Animal Husbandry

गाय और भैंस में गर्म होने के लक्षण, गर्भाधान और प्रसव के समय ध्यान रखने वाली बातें

गाय या भैंस पालन से पशुपालकों के लिए तभी फायदा हो सकता है, जब वह सही समय पर बच्चा देती हैं. मगर आजकल गाय या भैंसों का सही समय पर गाभिन न होना एक आम समस्या बन गई है. हर पशुपालक सोचता है कि उसका दुधारू पशु समय रहते गाभिन हो जाए, ताकि उससे लगातार दूध मिलता रहे, इसलिए इस स्थिति में दुधारू पशुओं का खास ख्याल रखना ज़रूरी होता है. आइए आपको बताते हैं कि गाय या भैंस में गर्म होने के लक्षण क्या होते हैं, साथ ही उनका गर्भाधान का समय क्या होता है?

गर्म के लक्षण

  • बार-बार चीखना

  • दूध कम देना

  • भूख कम लगना

  • बेचैन मालूम पड़ना

  • दूसरी गाय के ऊपर चढ़ जाना

  • दूसरी गाय के गर्म गाय पर चढ़ने के समय गर्म गाय का चुपचाप खड़ी रहना

  • पेशाब बार-बार करना

  • भगोष्ठ में सूजन होना

  • योनिस्त्राव (लसलसा, पारदर्शी, चमकदार)

ये खबर भी पढ़े: गाभिन भैंस की ऐसे करें देखभाल, पशुपालक को कभी नहीं होगा घाटा

गर्भाधान का समय

अगर गाय या भैंस सुबह में गर्म होती है, तो उसी दिन शाम में गर्भाधान कराना चाहिए. अगर गाय या भैंस एक दिन से ज्यादा गर्म रहती है, तो लगभग 12 घंटे के अंतर पर 2 बार गर्भाधान कराना लाभदायक होता है.

कृत्रिम गर्भाधान क्यों?

  • छोटे पशुपालकों को साँढ़ पालने और उसमें होने वाले खर्चों से बचाव

  • प्राकृतिक गर्भाधान से होने वाली बीमारियों से बचाव

  • आयातित उत्तम नस्ल के साँढ़ों के वीर्य से भी गर्भाधान संभव

  • समय पर प्रजनन समस्याओं की पहचान

  • गर्म गाय की सही पहचान से सही समय पर गर्भाधान

  • छोटी गायों के भी पाल खिलाने में सुविधा

  • पाल देने के समय चोट लगने का कोई डर नहीं होता है.

गाय और भैंस में विभिन्न जांच क्यों?

  • सही समय पर पता लग जाएगा कि गाय गाभिन है या नहीं.

  • गाभिन होने का पता लगने पर संतुलित और पौष्टिक आहार दिया जा सकता है.

  • अगर पशु गाभिन नहीं है, तो बगैर समय बर्बाद किए सही इलाज किया जा सकता है.

  • सही समय पर दूध दुहना बंद किया जा सकता है.

  • पता लग जाता है कि गाय कहीं अनजाने में तो पाल नहीं खा गई है.

  • इस तरह समय पर गाभिन का पता लगाना आर्थिक दृष्टि से लाभकारी होता है.

गाय और भैसों में प्रसव के समय ध्यान रखने वाली बातें

  • प्रसव का समय नजदीक आने पर पशु को अच्छी तरह पचने वाला भोजन देना चाहिए.

  • पशु के पास किसी व्यक्ति को जरुर मौजूद रहना चाहिए.

  • अगर प्रसव में ज्यादा देर हो, तो पशुचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए.

  • पशु अपने बच्चे की नाभी न काटे.

  • पशु जेर नहीं खाने पाए.

  • प्रसव के 2 दिन तक थन से पूरा दूध नहीं निकालें.

  • प्रसव के थोड़ी देर बाद बच्चे को उसकी मां का दूध जरुर पिलाएं.

  • प्रसव के बाद पशु को ज्यादा समय तक बैठने नहीं दें.

  • प्रसव के बाद पशु मक्खन, घी या तेल नहीं पिलाना चाहिए.

ये खबर भी पढ़े: पशु प्रेग्नेंसी किट से 30 मिनट में पता कर सकेंगे गाय-भैंस गाभिन हैं या नहीं, कीमत मात्र 300 रुपए



English Summary: Knowledge of things to keep in mind while delivering cows and buffaloes

Share your comments


Subscribe to newsletter

Sign up with your email to get updates about the most important stories directly into your inbox

Just in