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देसी नस्ल की डांगी गाय भारी बारिश में भी आती है बहुत काम, जानिए इसकी विशेषताएं

देश में एक तरफ खेती की नई तकनीक अपनाई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पशुपालन (Animal husbandry) भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. किसानों के लिए खेती जितना महत्वपूर्ण खेती करना है, उतना ही महत्वपूर्ण पशुपालन (Animal husbandry) करना भी है. अगर पशुओं की बात की जाए, तो किसानों को सबसे अच्छा मुनाफ़ा गाय पालन से मिलता है. किसानों के लिए यह मुनाफा देने वाला व्यव्साय भी है. पशुपालन (Animal husbandry) के जरिए किसान कई तरह के उत्पादन करके लाखों रुपए कमा रहे हैं. इसमें घाटा होने की संभावना भी कम होती है.

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Dangi Cow
Dangi Cow

देश में एक तरफ खेती की नई तकनीक अपनाई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पशुपालन (Animal husbandry) भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. किसानों के लिए खेती जितना महत्वपूर्ण खेती करना है, उतना ही महत्वपूर्ण पशुपालन (Animal husbandry) करना भी है. अगर पशुओं की बात की जाए, तो किसानों को सबसे अच्छा मुनाफ़ा गाय पालन से मिलता है. किसानों के लिए यह मुनाफा देने वाला व्यव्साय भी है. पशुपालन (Animal husbandry) के जरिए किसान कई तरह के उत्पादन करके लाखों रुपए कमा रहे हैं. इसमें घाटा होने की संभावना भी कम होती है.

पुराने समय से ही गाय पालन किसानों के बीच काफी प्रचलित है. आज गाय पालन करने के लिए कई नई नस्लें आ गई हैं, जिससे किसानों के लिए काफी लाभ मिलता है. ऐसी ही गाय की एक नस्ल डांगी (Dangi Cow) है, जो कि मुख्य रूप से महाराष्ट्र के नासिक एवं अहमदनगर जिलों में तथा पश्चिमी घाटों पर पाई जाती है. यहीं से इसका नाम डांगी पड़ा है. आइए आपको गाय की डांगी नस्ल (Dangi Cow) के बारे में बताते हैं.

डांगी गाय की विशेषताएं (Characteristics of Dangi Cow)

देसी नस्ल की ये गाय विशेष रूप से अपनी कार्यकुशलता के लिए जानी जाती है, क्योंकि यह अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में भी कुशलता पूर्वक कार्य करती है. विचारशीलता इस नस्ल की विशेषता है. इनका पालन मुख्य रूप से कंदाडी, महदेव, कोली, ठाकर एवं मराठा जतियों द्वारा किया जाता है. ये जातियां साल में लगभग 9 महीने (जनवरी से सितंबर) अपने गांवों से बाहर ही विचरती हैं, तथा एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर पलायन करती रहती हैं. गर्म व शुष्क मौसम में ये पशुओं के साथ तटीय क्षेत्रों की ओर चले जाते हैं. जहां घास-पेड़, पौधे एवं पानी मिल जाता है. भारी वर्षा एवं जाड़ों के समय में ये लोग पहाड़ी क्षेत्रों की तलहटी में रहना पसंद करते हैं.

डांगी गाय की संरचना (Dangi Cow Structure)

इस नस्ल की गाय का रंग सफेद परतदार होता है. इनके शरीर पर लाल या काले रंग के धब्बे असममित रूप से रहते हैं, तो वहीं शरीर मध्यम आकार का गहराईदार होता है. इनका सिर छोटा होता है व गले की झालर लटकी हुई प्रतीत होती है. कान छोटे आकार के होते हैं और कबूड़ का आकार मध्यम होता है. इसके अलावा सींग छोटे व मोटे पाए जाते हैं. खुर का रंग काला होता है, जो कि छोटे व कठोर होते हैं. त्वचा से एक प्रकार का तेल निकलता है, जो कि भारी वर्षा से शरीर रक्षा करता है.

डांगी गाय का भोजन

खुराकी वस्तुएं- मक्का, जौं, ज्वार, बाजरा, छोले, गेहूं, जई, चोकर, चावलों की पॉलिश, मक्की का छिलका, चूनी, बड़ेवें, बरीवर शुष्क दाने, मूंगफली, सरसों आदि.

हरा चारा-  बरसीम, लूसर्न, लोबिया, गुआरा, ज्वार, बाजरा, हाथी घास, नेपियर बाजरा, सुडान घास आदि.

सूखे चारे और आचार- बरसीम की सूखी घास, लूसर्न की सूखी घास, जई की सूखी घास, पराली, मक्की के टिंडे, ज्वार और बाजरे की कड़बी, गन्ने की आग, दूर्वा की सूखी घास, जई का आचार आदि.

डांगी गाय से दुग्ध उत्पादन (Milk Production from Dangi Cow)

इस नस्ल की दुग्ध उत्पादन की क्षमता प्रति 100 से 400 दिनों के दूध उत्पादक काल में 1200 से 1250 किग्रा होती है. दूध में वसा लगभग 4.3 प्रतिशत होती है.

यहां मिल सकती है डांगी गाय (Dangi Cow Can Be Found Here)

अगर किसी को डांगी गाय खरीदना है, तो वह राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://www.nddb.coop/hi पर जाकर विजिट कर सकते हैं. इसके अलावा आप अपने राज्य या महाराष्ट्र के डेयरी फार्म में संपर्क कर सकते हैं.

English Summary: Features of Dangi cow of indigenous breed Published on: 24 December 2020, 05:15 IST

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