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बिहार की बाचौर नस्ल की गाय (Bachaur Cow) है बहुत लाभकारी, पढ़िए इसकी विशेषताएं

प्राचीन काल से ही गाय पालन (Cow Rearing) का बहुत महत्व रहा है. आज के समय में गाय पालन (Cow Rearing) से कई तरह के बिजनेस किए जा रहे हैं. आज गाय पालन (Cow Rearing) करना इतना लाभकारी हो गया है कि इस क्षेत्र में हर कोई आना चाहता है. जैसा कि सभी जानते हैं कि गाय का दूध स्वस्थ के लिए आवश्यक है, तो वहीं बैलों से खेती, आवागमन के साधन, माल वाहन कराना लाभकारी है.

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Bachaur Cow
Cattle Farming

प्राचीन काल से ही गाय पालन (Cow Rearing) का बहुत महत्व रहा है. आज के समय में गाय पालन (Cow Rearing) से कई तरह के बिजनेस किए जा रहे हैं. आज गाय पालन (Cow Rearing) करना इतना लाभकारी हो गया है कि इस क्षेत्र में हर कोई आना चाहता है. जैसा कि सभी जानते हैं कि गाय का दूध स्वस्थ के लिए आवश्यक है, तो वहीं बैलों से खेती, आवागमन के साधन, माल वाहन कराना लाभकारी है.

गाय के गोमूत्र का उपयोग खाद, कीटनाशक, औषिधि बनाने व भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कर सकते हैं. पशुपालक को गाय पालन (Cow Rearing) से अधिक से अधिक लाभ हो, इसलिए वह गाय की उन्नत नस्लों का पालन करते हैं. वैसे हमारे देशे में गाय की कई उन्नत नस्लें पाई जाती हैं. हर एक राज्य की अपनी एक प्रसिद्ध गाय भी ज़रूर होती है. इसी कड़ी में बिहार की भी एक गाय प्रसिद्ध है, जिससे बाचौर गाय (Bachaur Cow) के नाम से जाना जाता है. आइए आपको बाचौर (Bachaur Cow) गाय की विशेषताएं बताते हैं.

इन इलाकों में मिलती है बाचौर गाय (Bachaur cow is found in these areas)

बाचौर (Bachaur) नस्ल की गाय विशेष रूप से बिहार राज्य के सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर जिलों में पाई जाती है. एक सर्वेक्षण की मानें, तो अब शुद्ध बाचौर (Bachaur) नस्ल की गाय सीमित हो जा रही हैं. इस नस्ल की गाय केवल नेपाल की सीमा से सटे सीतामढ़ी जिले के बाचौर व कोलीपुर भाग में ही रह गई हैं. यह नस्ल शुष्क क्षेत्र में अपनी कार्यशीलता के लिए और अपौष्टिक खाद्य के द्वारा निर्वहन के लए जानी जाती है.

बाचौर गाय की संरचना (Structure of Bachaur Cow)

यह हरियाणा नस्ल की गायों से बहुत अधिक समानता रखती है. इस नस्ल के पशु काफी हल्के और भूरे रंग के होते हैं. इनकी गर्दन छोटी और माथा चपटा, बड़ा व हल्का सा उन्नत होता है. इस नस्ल की गाय की आंखें भी बहुत खूबसूरत होती हैं. इनके सींग मध्यम लंबाई के होते हैं, तो वहीं पैर पतले और कम लंबाई वाले होते हैं. गले की झालर पतली मध्य आकार की होती है, जबकि पूंछ छोटी व मोटी होती है. इसके अलावा सिरों का रंग काला या सफेद होता है. बांक का आकार छोटा होता है.

बाचौर गाय से दुग्ध उत्पादन (milk production from bachaur cow)

इस नस्ल की गायों की दुग्ध उत्पादन क्षमता कम होती है. ये एक ब्यांत का अंतराल लगभग 250 से 260 दिन का होता है. इस नस्ल की गाय औसतन लगभग 500 से 600 कि.ग्रा दूध देती हैं.

इस नस्ल के बैल होते हैं श्रमसाध्य (Bulls of this breed are laborious)

इस नस्ल के बैल श्रमसाध्य होते हैं, जो कि बिना रूके लगातार 8 घंटे तक काम कर सकते हैं.     

यह खबर भी पढ़ें : गाय बन रही हैं सरोगेट मदर, जानिए क्या है इसकी भ्रूण प्रत्यारोपण विधि

यहां मिल सकती है बाचौर गाय (Bachaur cow can be found here)

अगर किसी को बाचौर गाय खरीदनी है, तो वह राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://www.nddb.coop/hi पर जाकर विजिट कर सकते हैं. इसके अलाव आप अपने राज्य या बिहार के डेयरी फार्म में संपर्क कर सकते हैं.

English Summary: Information about Bachaur cow of Bihar for cattle rearing Published on: 23 December 2020, 05:39 IST

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