1. खेती-बाड़ी

पीली सरसों की इन 3 उन्नत किस्मों की करें बुवाई, होगी अच्छी पैदावार

श्याम दांगी
श्याम दांगी

पीली सरसों की खेती खरीफ के अलावा रबी सीजन में की जाती है. इसकी अच्छी किस्मों की खेती करके किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं पीली सरसों की वैज्ञानिक खेती कैसे करें और इसकी प्रमुख उन्नत किस्में कौन-सी है-

खेत की तैयारी

मिट्टी पलटने वाले हल से पहली जुताई करने के बाद 2 से 3 हैरो या कल्टीवेटर से करना चाहिए. इसके पाटा देकर मिट्टी को भुरभुरी बनाकर बुवाई करना चाहिए.

प्रमुख किस्में -

पीताम्बरी - यह किस्म 2009 में विकसित की गई. जो 110 से 115 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इससे प्रति हेक्टेयर 18 से 20 क्विंटल की पैदावार होती है. इस किस्म में तेल की मात्रा 42 से 43 प्रतिशत होती है.

नरेन्द्र सरसों-2- सरसों की यह 1996 में विकसित की गई. जो 125 से 130 दिनों में पक जाती है. इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 16 से 20 क्विंटल की पैदावार  होती है. इसमं 44 से 45 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है.

के 88- यह किस्म 1978 में विकसित की गई. जो 125 से 130 दिनों में पक जाती है. इससे प्रति हेक्टेयर 16 से 18 क्विंटल की पैदावार होती है. इस किस्म में 42 से 43 प्रतिशत तेल होता है. 

बीज की मात्रा

एक हेक्टेयर में पीली सरसों के खेती के 4 किलो बीज की आवश्यकता पड़ती है. वहीं बुवाई से पहले बीज को अनुशंसित दवा से बीज उपचार कर लेना चाहिए. 

बुवाई का समय

रबी सीजन में इसकी बुवाई का सही समय 15 सितंबर से शुरू हो जाता है. 

खाद एवं उर्वरक

सरसों की अच्छी पैदावार के लिए सिंचित क्षेत्र में नाइट्रोजन 80 किलोग्राम, फास्फेट 40 किलोग्राम और पोटाश 40 किलोग्राम उपयुक्त होता है. जबकि असिंचित क्षेत्र के लिए नाइट्रोजन 40 किलोग्राम, फास्फेट 30 ग्राम और पोटाश 30 किलोग्राम देना चाहिए. वहीं खेत की तैयारी के दौरान प्रति हेक्टेयर 40 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद डालना चाहिए.  

बुवाई कैसे करें

सरसों की बुवाई छिटकन विधि से की जाती है. कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें. बीज की 3 से 4 सेंटीमीटर रखें. पाटा लगाकर बीज को मिट्टी में ढक देना चाहिए. 

निराई-गुड़ाई

12 से 15 दिन के बाद फसल की निराई गुड़ाई करके के खरपतवार को निकाल देना चाहिए. वहीं पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 से.मी. कर देना चाहिए. इससे पैदावार में भी बढ़ोत्तरी होती है.  

सिंचाई

पीली सरसों की फसल में सामान्य सरसों की तरह फूल निकलने तक सिंचाई कर रहना चाहिए. वहीं खेत में अच्छे जल निकास की व्यवस्था करना चाहिए.

प्रमुख रोग

आरा मक्खी- यह कीट सरसों के पत्तों को छेद करके नुकसान पहुंचाता है. इसकी तीव्रता के कारण पौधा पत्ती विहीन हो जाता है और फसल चौपट हो जाती है. इस कीट की सूंडियाँ काले स्लेटी रंग की होती है. 

चित्रित बग- यह कीट लाल और नारंगी का होता है, जो पौधे की पत्तियों के अलावा शाखाओं, तनों, फूलों और फलियों पर प्रहार करता है. 

बालदार सूड़ी-इस कीट की सूड़ी काले और नारंगी रंग की तथा यह बालों से पूरी तरह ढका होता है. यह पौधे को तेजी से पत्ती विहीन कर देता है.

माहूँ- यह पीले रंग का कीट होता है जो पौधो की पत्तियों के अलावा तने के नाजुक हिस्से, फूलों और फलियों को चूसता है. 

English Summary: yellow mustard top 3 variety in india

Like this article?

Hey! I am श्याम दांगी. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News