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Vermicompost: मिट्टी के बिगड़ते स्वास्थ्य को सुधारने की संजीवनी है वर्मीकम्पोस्ट

हेमन्त वर्मा
हेमन्त वर्मा
Vermicompost

Vermicompost

वर्मीकंपोस्टिंग क्या है? (What is vermicomposting)

मिट्टी की उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए जैविक खाद, जैसे गोबर की खाद, हरी खाद, जीवाणु खाद, कंपोस्ट खाद और वर्मीकंपोस्ट का महत्वपूर्ण योगदान होता है. वर्मीकंपोस्ट के अंतर्गत कूड़ा-कचरा या गोबर एवं खेत पर उपलब्ध अन्य फसल अवशेष को केंचुओं की सहायता से उपजाऊ खाद (वर्मीकंपोस्ट) में परिवर्तित किया जाता है. इस विधि को ही वर्मीकंपोस्टिंग कहते हैं.

कैसे बनाए उन्नत वर्मीकम्पोस्ट (How to make advanced vermicompost)

कम्पोस्ट बनाने के लिए सबसे पहले 6 से 8 फुट की ऊंचाई का एक छप्पर तैयार करें ताकि केंचुए की अधिक सक्रियता के लिए उपयुक्त तापमान और छाया रखी जा सके. छप्पर बनाते समय यह बात मुख्य रूप से ध्यान रखनी है कि केंचुए अंधेरा और नमी पसंद करते हैं. सबसे पहले कार्बनिक अवशिष्ट/ कचरे के बड़े ढ़ेलों को तोड़कर इसमें में से पत्थर, कांच, प्लास्टिक, तथा धातुओं को अलग कर लिया जाता है. मोटे फसल अवशिष्टों के छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है ताकि खाद बनने में कम समय लगे. अगले चरण में कचरे से दुर्गन्ध हटाने और अवांछित जीवों को खत्म करने के लिए कचरे को एक फुट मोटी सतह में फैलाकर धूप में सुखा दिया जाता है.

व्यवसायिक वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए लिए सीमेन्ट तथा इटों से पक्की क्यारियां बनाई जाती है. प्रत्येक क्यारी की लम्बाई 3 मीटर, चौड़ाई 1 मीटर एवं ऊंचाई 30-50 सेमी रखनी चाहिए. क्यारियों को तेज धूप और वर्षा से बचाने और केंचुओं की क्रियाशीलता बढ़ाने के लिए छप्पर और बोरी की टाटो से ढक देना आवश्यक है. वर्मीकम्पोस्ट की क्यारी में सर्वप्रथम 6 इंच बालू मिट्टी की परत बिछानी चाहिए, इसके ऊपर 3 इंच मोटाई में कटे हुए ज्वार, बाजरा, ग्वार आदि फसलों के अवशेष की मोटी परत बिछानी चाहिए. इसके बाद इस सतह पर 2 इंच मोटाई में 5 से 7 दिन पुराने गोबर की सड़ी खाद डालनी है, और फिर इस सतह पर पानी डालकर गीला करें. इस गीली सतह पर 1 इंच मोटी वर्मीकंपोस्ट की परत जिसमें पर्याप्त केंचुए मिले हो डाली जाती है. इस तरह गोबर के साथ-साथ घास-फूस, पत्तियां मिले हुए टुकड़ों का कचरा 6 से 8 इंच मोटाई में बिछा दिया जाता है. प्रति सप्ताह 12 परत गोबर मिश्रित घास-फूस, पत्तियां बिछानी चाहिए. इस प्रकार यह परत दर परत लगाते रहना चाहिए जब तक की परत की ऊंचाई डेढ़ फीट ना हो जाए. केंचुए कार्बनिक पदार्थों को खाना जारी रखते हैं तथा अपनी कास्टिंग भी ढेर के ऊपर छोड़ते जाते हैं. ढेर का रंग काला होना और केंचुए का ऊपरी सतह पर आना वर्मी कम्पोस्ट तैयार होने का सूचक है. इस सप्ताह से लगभग डेढ़-दो माह में वर्मीकंपोस्ट तैयार हो जाता है. एक वर्ग मीटर जगह के लिए 250 केंचुओं की जरूरत होती है. फिर एकत्र की गयी केंचुआ खाद से केंचुए के कोकून और अव्यस्क केंचुओं को अलग कर लिया जाता है तथा नहीं खाये गये पदार्थों को 3-4 सेमी आकार की छलनी से छान कर अलग कर लेते हैं. अतिरिक्त नमी हटाने के लिए छनी हुई केचुआ खाद को पक्के फर्श पर फैला देते हैं. जब नमी लगभग 30-40 प्रतिशत तक रह जाए तो इसे इकट्ठा कर बोरी में या प्लास्टिक थैले में भर लें.

केंचुए की कौनसी प्रजाति से जल्दी खाद बनाए (Which Species of Earthworms Make Manure Sooner)

विश्वभर में लगभग 4500 केंचुए की प्रजातियां पाई जाती है, लेकिन दो प्रजातियां सबसे उपयोगी पाई गई है, जिनका नाम ऐसीनिया फोटिडा (लाल केंचुआ) तथा युड्रिलय युजीनी (भूरा गुलाबी केंचुआ) है. व्यवहार के अनुसार केंचुए मुख्य रूप से दो प्रजातियों में पाए जाते हैं.

एंडोजेइक केंचुएः इस प्रजाति के केंचुए नमी की तलाश में भूमि में 5 से 6 फुट तक गहराई में चले जाते हैं. ये सतह से अपना भोज्य पदार्थ लाकर खाने हेतु इकट्ठा करते हैं. यह प्रजाति मिट्टी में गहरी सुरंग बनाकर भूमि को भुरभुरी बना देती है. इन केंचुए की लंबाई 8 से 10 इंच तक होती है, और इनका वजन लगभग 5 से 6 ग्राम होता है. केंचुए खेत की मिट्टी को 90 प्रतिशत और फसल अवशेष को 10 प्रतिशत खाते हैं, और अधिकतर वर्षा ऋतु में दिखाई देते हैं. ये भूमि को भुरभुरी बनाने एवं उसमें जीवांश पदार्थ हेतु उपयोगी है. ये भूमि में वायु संचार एवं जल संरक्षण में अधिक मददगार हैं.

एपीजेइक केंचुएः छोटे आकार के भूमि जीव, ऊपरी सतह पर रहने वाले एपीजेइक कहलाते हैं. इनकी क्रियाशीलता और जीवन अवधि कम लेकिन प्रजनन दर अधिक होती है. ये केंचुए अपने रहने के स्थान से अलग नहीं जाते. ये कार्बनिक पदार्थों, फसल के अवशेष को 90 प्रतिशत तथा मिट्टी का 10 अनुपात भाग खाते हैं.  ये केचुए वर्मीकम्पोस्ट बनाने में ज्यादा प्रभावी और उपयोगी रहते हैं. ये फसल के अवशेष तथा गोबर को अधिक तेजी से खाते हैं, और वर्मी खाद भी अधिक बनाते हैं. 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और मृदा में 30 से 40 प्रतिशत नमी इनकी क्रियाशीलता के लिए उपयुक्त रहती है.

केंचुओं में प्रजनन प्रक्रिया (Reproduction process in earthworms)

सामान्यत 25-30 डिग्री सेल्सियस तापमान, 30-40 प्रतिशत नमी और पर्याप्त खाद्य पदार्थ होने पर केंचुए 4 सप्ताह में वयस्क होकर प्रजनन करने लायक बन जाते हैं. वयस्क केंचुआ 1 सप्ताह में दो से तीन कोकून देने लगते है, और एक कोकून में तीन से चार अंडे होते हैं. इस प्रकार एक प्रजनन केंचुए से प्रथम 6 माह में लगभग ढाई सौ केंचुए पैदा कर दिए जाते हैं, जब इनकी संख्या बढ़ जाती है तो जगह की कमी के कारण प्रजनन गति धीमी हो जाती है तथा उचित प्रजनन दर बनाए रखने हेतु इन केंचुओं को दूसरी जगह बदलनी चाहिए. इस प्रकार तैयार वर्मीकम्पोस्ट को खेत में छिड़ककर ट्रैक्टर से जुताई कर लें जिससे वर्मीकम्पोस्ट खेत में समान रूप से फैल जाए.

केंचुआ खाद को कैसे काम में ले (How to use earthworm manure)

इस खाद को छाया में सुखाये और जब नमी 30-40 % तक कर जाती है, तब इसे बोरी में भर कर इकट्ठा कर लें. सूखने के पश्चात खाद को बोरे में एक साल की अवधि तक के लिए रखा जा सकता है. खेत में अंतिम जुताई के समय 20-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से केंचुआ खाद मिट्टी मिलाकर जुताई करें. निराई-गुड़ाई करते समय भी केंचुआ खाद पौधों की जड़ों में डाली जा सकती है. फलदार पेड़ में 250-500 ग्राम प्रति थाला केंचुए की खाद का प्रयोग करना उचित रहता है. अच्छे परिणाम के लिए केंचुआ खाद का इस्तेमाल करने के बाद कार्बनिक मल्चिंग या सूखी पत्तियों से ढककना उचित रहता है.

वर्मीकम्पोस्ट या केंचुआ खाद के लिए कहां संपर्क करें (Where to Contact for Vermicompost or Earthworms)

वर्मीकम्पोस्ट के लिए जिले के कृषि विज्ञान केंद्र पर जाकर संपर्क किया जा सकता है. इसकी यूनिट यहां लगी रहती है. या किसी भी कृषि विश्वविध्यालय में जाकर इसके रखरखाव और बनाने की ट्रेनिंग ली जा सकती है. 

English Summary: Vermicomposting is the way to improve the health of soil

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