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Wheat Varieties: गेहूं की उच्च उपज वाली क़िस्में जिन्हें IIWBR ने विकसित किया है

देश में गेहूं की खेती लगभग 30.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है. इसका सर्वाधिक क्षेत्रफल गंगा के मैदानी इलाकों में है.

मोहम्मद समीर
गेहूं हमारे देश की प्रमुख खाद्यान्न फ़सल है.
गेहूं हमारे देश की प्रमुख खाद्यान्न फ़सल है.

दुनियाभर में जो फ़सलें उगाई जाती हैं उनमें गेहूं का पहला स्थान है.... गेहूं हमारे देश की प्रमुख खाद्यान्न फ़सल है. भारत में इसका स्थान धान के बाद दूसरा है और रबी की फ़सलों में प्रथम है. देश में गेहूं की खेती लगभग 30.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है. इसका सर्वाधिक क्षेत्रफल गंगा के मैदानी इलाकों में है.

भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), करनाल ने विभिन्न भारतीय राज्यों के लिए गेहूं की कई उच्च उपज वाली क़िस्में विकसित की हैं जो गेहूं के प्रमुख रोगों के लिए प्रतिरोधी हैं. भारत की मुख्य अनाज की फसल गेहूं है. अधिकांश भारतीय गेहूं नरम/मध्यम कठोर, मध्यम प्रोटीन गेहूं है जो संयुक्त राज्य अमेरिका के सख़्त सफ़ेद गेहूं से थोड़े मिलते-जुलते हैं. कठोर, उच्च-प्रोटीन और उच्च-ग्लूटेन गेहूं की खेती मुख्य रूप से मध्य और पश्चिमी भारत में की जाती है.

भारत में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश राज्य में लगभग 1.0-1.2 मिलियन टन ड्यूरम गेहूं का भी उत्पादन किया जाता है. गेहूं एक ऐसी फ़सल है जो केवल ठण्ड के मौसम में ही उगाई जा सकती है. तापमान ज़्यादा होने से फ़सल का वज़न कम हो जाता है.

गेहूं की खेती सभी प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है, निम्नीकृत क्षारीय और जलभराव वाली मिट्टियों को छोड़कर. ड्यूरम गेहूं बोने के लिए सबसे अच्छी मिट्टी मध्यम से महीन बनावट वाली होती है.

किसानों के लिए सर्वोत्तम गेहूं की क़िस्में:

विभिन्न मौसम स्थितियों के लिए IIWBR द्वारा विकसित गेहूं की कुछ सर्वोत्तम किस्में-
1. डीडीडब्ल्यू 47 (ड्यूरम किस्म)- यह मध्य क्षेत्र में प्रतिबंधित सिंचाई वातावरण में शीघ्र बुवाई के लिए उच्च पीला वर्णक और उत्कृष्ट उत्पाद गुणवत्ता वाला एक ड्यूरम क़िस्म है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान (कोटा और उदयपुर संभाग) और उत्तर प्रदेश (झांसी संभाग) में बुवाई के लिए अनुशंसित.

उत्कृष्ट पोषण और उत्पाद की गुणवत्ता

  • चेक क़िस्म HI8627 (5.63) की तुलना में DDW 47 में 7.57ppm की बहुत ही उच्च पीला वर्णक सामग्री है, जो इसे सभी पास्ता गुणवत्ता मानकों के लिए सबसे अच्छा जीनोटाइप बनाती है.
  • पास्ता व्यवसाय में उच्च-पीले वर्णक वाले गेहूं की अधिक मांग DDW 47 को किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए एक मूल्यवान क़िस्म बनाती है.
  • DDW 47 में प्रोटीन की मात्रा 12.69 फ़ीसदी होती है जो उच्चतम है. इसके साथ ही इसे कीट रोधी क़िस्म भी कहा जाता है. उत्पादन क्षमता की बात करें तो इसकी उत्पादन क्षमता 74 क्विंटल/हेक्टेयर होती है.

मुख्य विशेषताएं:

बीज उपज – 37.3 क्विंटल/हेक्टेयर

संभावित उपज-74.16 क्विंटल/हेक्टेयर

पौधे की ऊंचाई - 84 सेमी

118-121 दिन में पक कर तैयार

7.57 पीपीएम की उच्च पीला वर्णक सामग्री, उच्च पास्ता स्वीकार्यता स्कोर (7.9) के साथ अच्छी गुणवत्ता वाले पास्ता के लिए उपयुक्त.

उत्कृष्ट उपज परीक्षण परिणाम

डीडीडब्ल्यू 47 को कम पानी की परिस्थितियों में अन्य प्रकारों की तुलना में उपज के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाला पाया गया है. इसकी उपज क्षमता भी बढ़िया है.

रोग प्रतिरोधी / सहनशीलता:

क़िस्म DDW 47 काले और भूरे रतुआ के लिए अत्यधिक प्रतिरोधी है. अन्य बीमारियों और कीटों के लिए इसने अन्य किस्मों की तुलना में बेहतर प्रतिरोध व्यक्त किया.

2. DBW222 (करण नरेंद्र)- पूरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर संभाग को छोड़कर), पश्चिमी यूपी (झांसी डिवीजन को छोड़कर), जम्मू और जम्मू का कठुआ ज़िला और एच.पी. (ऊना ज़िला और पांवटा घाटी) और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) में समय पर सिंचित बुवाई की स्थिति के लिए अनुशंसित.

मुख्य विशेषताएं:

बीज उपज – 61.3 क्विंटल/हेक्टेयर

संभावित उपज-82.1 क्विंटल/हेक्टेयर

पौधे की ऊंचाई-  (98-108) सेमी

पुष्पन - 95 दिन (सीमा: 89-103 दिन)

139 से150 दिन में पक कर तैयार.

रोग प्रतिरोधी / सहनशीलता: यह क़िस्म स्ट्राइप और पत्ती के जंग के प्रति प्रतिरोधी है, करनाल बंट (9.1%) रोग और लूज़ स्मट (4.9%) के लिए अत्यधिक प्रतिरोधी है.

3.DBW187 (करण वंदना)- पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजनों को छोड़कर), पश्चिमी यू.पी. (झांसी डिवीजन को छोड़कर), जम्मू और जम्मू के कठुआ ज़िले और एच.पी. के कुछ हिस्सों (ऊना जिला और पांवटा घाटी) और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) में NWPZ की समय पर बोई गई सिंचित स्थितियों के लिए अनुशंसित.

मुख्य विशेषताएं:

बीज उपज – 61.3 क्विंटल/हेक्टेयर

संभावित उपज- 96.6 क्विंटल/हेक्टेयर

पौधे की ऊंचाई - 105 सेमी

पुष्पन - 99 दिन (सीमा: 94-103 दिन)

148 दिन (रेंज: 139-157 दिन) में तैयार

रोग प्रतिरोधी/सहिष्णुता: गेहूं की इस क़िस्म में पीला रतुआ व वीट ब्लास्ट जैसी बीमारियों का ख़तरा बेहद कम होता है.

ये भी पढ़ेंः गेहूं की इस किस्म को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे किसान, जानिए क्यों है इतनी खास

4. DBW252 (करण श्रिया)- पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के मैदानी इलाकों सहित उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में समय पर बुवाई, प्रतिबंधित सिंचाई की स्थिति के तहत व्यावसायिक खेती के लिए बेहतर.

मुख्य विशेषताएं:

औसत उपज: 36.7 क्विंटल/हेक्टेयर

संभावित उपज: 55.6 क्विंटल/हेक्टेयर

परिपक्वता के दिन: 127 दिन (100-147 दिन)

पौधे की ऊंचाई: 98 सेमी (82-112 सेमी)

केवल 1 सिंचाई की आवश्यकता होती है.

सूखे के प्रति अत्यधिक सहिष्णु.

मौजूदा क़िस्मों की तुलना में बेहतर अनाज, उत्पाद बनाने और पोषण संबंधी गुण. GluD-1 की 5+10 सबयूनिट की उपस्थिति इसकी उच्च ग्लूटेन शक्ति को दर्शाती है.

रोग प्रतिरोधी/सहिष्णुता: वीट ब्लास्ट (औसत 2.5%), लीफ़ रस्ट (3.4ACI) और करनाल बंट (5.1%) के लिए अत्यधिक प्रतिरोधी.

English Summary: top varieties of wheat in india Published on: 26 November 2022, 05:54 IST

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