MFOI 2024 Road Show
  1. Home
  2. खेती-बाड़ी

Pumpkin Variety: कद्दू की इस किस्म से किसान होंगे मालामाल, उपज 325-350 कुंतल प्रति हेक्टेयर

सब्जियों की खेती करने वाले किसान भाई कद्दू की इस वैरायटी की खेती कर सकते हैं यह किस्म प्रति हेक्टेयर पर 325-350 कुंतल उपज दे सकती है. इसमें कई औषधियां गुण भी मौजूद हैं जो मानव शरीर के लिए बेहद आवश्यक हैं.

मनीशा शर्मा
pumpkin
variety of pumpkin will benefit the farmers

कम लागत और कम समय में अधिक उपज देने वाली फसल की किस्मों पर कृषि वैज्ञानिकों के शोध हमेशा से चलते आ रहे हैं. अब इसी क्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का काशी शुभांगी या छप्पन भोग कद्दू चर्चा में आया है. यह कई गुणों का खान है. कद्दू की यह किस्म आमदानी बढ़ाने वाली तो है ही, साथ ही स्वास्थ्य के दृष्टि से भी काफी गुणकारी है. इसमें न सिर्फ़ किसानों को सशक्त बनाने की क्षमता है, बल्कि सेहत को भी दुरुस्त रखने की भी क्षमता है.

दरअसल, मीडिया में आई खबरों के मुताबिक वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक सुधाकर पांडेय ने कहा कि छप्पन भोग कद्दू महत्वपूर्ण सब्जी ही नहीं, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर भी है. छोटे पौधे वाला यह कद्दू कई गुणों से भरा हुआ है. इसमें ब्लड प्रेशर, मोटापा कम करने की क्षमता है.

कम समय में अधिक पैदावार

कद्दू की इस किस्म की 50 से 55 दिन में पहली तुड़ाई होती है. इसके अलावा यह लगातार 70 दिन तक फल देती है. छप्पन भोग कद्दू की औसत उपज 325-350 कुंतल प्रति हेक्टेयर है. एक फल 800-900 ग्राम का होगा. लंबाई 68-75 सेमी तथा गोलाई 21-24 सेमी होगी. आपको प्रति पौधा औसतन 8-10 फल मिलेंगे. साथ ही एक हेक्टेयर में 7000-7500 पौधे लगाए जाते हैं.

ये भी पढ़ें: हलवा कद्दू की PPH-2 किस्म से मिलेगी 222 क्विंटल तक पैदावार

विटामिन और खनिज तत्व

कद्दू की इस किस्म में लगभग सभी प्रकार के विटामिन एवं खनिज तत्व मौजूद हैं. इनमें मुख्य रूप से विटामिन ए (211 मिग्रा), विटामिन सी (20.9 मिग्रा), पोटैग्रायम (319 मिग्रा) एवं फॉस्फोरस (52 मिग्रा) मिलता है. यह प्रति 100 ग्राम फल में पाया जाता है. इतना ही नहीं, इस सब्जी में पोषक तत्वों की प्रचुरता भी है. गौरतलब है कि आईआईवीआर में विकसित इस प्रजाति को खेत के अलावा गमले में भी लगाकर अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है.

खेती करने का समय

पूर्वी उत्तर प्रदेश में छप्पन कद्दू की बुवाई सितंबर माह के द्वितीय पखवाड़े से लेकर नवंबर के प्रथम पखवाड़े तक करें. लोटनेल की सुविधा होने पर दिसंबर महीने में भी बुवाई की जा सकती है.

English Summary: This new variety of pumpkin will benefit the farmers, yield 325-350 quintal per hectare Published on: 06 February 2020, 05:32 PM IST

Like this article?

Hey! I am मनीशा शर्मा. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News