1. खेती-बाड़ी

इस तरह से करें कम लागत में फूल गोभी की खेती, होगा बड़ा मुनाफा

Gobhi

अगर आप भी कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो आपके लिए फूल गोभी की खेती फायदेमंद हो सकती है. सितंबर से अक्टूबर महीने में की जाने वाली इस फसल की खेती को कम श्रम के साथ सीमित संसाधनों में भी कर सकते हैं. फूलगोभी के लोकप्रिय होने की एक खास वजह ये भी है कि ये कैंसर की रोकथाम में सहायक होता है. शरीर में कोलैस्ट्रोल की मात्रा घटाने की वजह से ग्रामीणों के अलावा ये शहरी जन-जीवन में भी खासा पंसद किया जाता है. भारत में मुख्य तौर पर इसकी खेती पश्चिम बंगाल,  बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, आसाम, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में होती आई है, लेकिन अब बदलते हुए वक्त के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी इसकी खेती संभव हो गई है. चलिए आज़ हम आपको बताते हैं कि फूल गोभी की खेती को करने का सही तरीका क्या है.

fool gobhi

मिट्टी

इस खेती को करने से पहले आपको यह जान लेना जरूरी है कि इसकी खेती रेतली दोमट के अलावा चिकनी मिट्टी में की जाती है. अगर आप ज्लदी पकने वाली किस्मों का प्रयोग कर रहे हैं तो आपके लिए रेतली दामोट मीट्टी उपयुक्त है, लेकिन अगर आप देर से बीजने वाली किस्मों की फसल करना चाहते हैं तो आपके लिए चिकनी दोमट मिट्टी का चुनाव करना बेहतर है.

ऐसे करें ज़मीन की तैयारी

इस फसल की खेती करने से पहसे खेत को अच्छी तरह जोतना जरूरी है. एक बार सही से जुताई होने पर अच्छी तरह गली हुई रूड़ी की खाद आखिरी जोताई के वक्त डालें.

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बिजाई का वक्त

अगर आप गोभी की अगेती किस्मों के लिए खेती कर रहे हैं, तो आपके लिए जून-जुलाई का महीना ठिक है. लेकिन अगर आप रोपाई के लिए पिछेती किस्मों का चुनाव कर रहे हैं तो आपके लिए मध्य सितंबर और अक्तूबर तक का समय सही है.

सिंचाई  की विधि

फूल गोभी की खेती में रोपाई के तुरंत बाद ही पहली बार सिंचाई कर देनी चाहिए. इसके बाद आप प्रत्येक हफ्ते के अंतराल पर (गर्मियों में) या 10-15 दिनों के अंतराल पर (सर्दियों में) सिंचाई कर सकते हैं.

फसल की कटाई का वक्तः

इसकी कटाई के फूल के विकसित होने के बाद सुबह के समय की जा सकती है. ध्यान रहे कि कटाई के बाद फूलों पर धूप ना पड़े.

English Summary: this is the right way of cauliflowerb farming

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