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धान की फसल को कंडुआ रोग से बचाने का आसान तरीका, ऐसे करें बीज शोधन

किसान खरीफ मौसम में धान की खेती को प्रमुख मानते हैं. इसकी उन्नत खेती नर्सरी से लेकर बीज की मात्रा, बीज उचपार, बुवाई, सिंचाई समेत कई महत्वपूर्ण प्रंबध पर निर्भर होती है. कृषि वैज्ञानिक की मानें, तो पिछले साल कई किसानों की फसल को कंडुआ रोग ने अपनी चपेट में ले लिया था. ऐसे में ज़रूरी है कि किसान इस साल पहले से ही धान की फसल को इस रोग से बचाकर रखें, ताकि फसल की पैदावार प्रभावित न हो. इसके लिए किसान को धान के बीजों का शोधन करना होगा.

क्या होता है कंडुआ रोग

धान की फसल में रोगों का प्रकोप पैदावार को पूरी तरह से प्रभावित कर देता है. कंडुआ एक प्रमुख फफूद जनित रोग है, जो कि अस्टीलेजनाइडिया विरेन्स से उत्पन्न होता है. इसका प्राथमिक संक्रमण बीज से होता है, इसलिए धान की खेती में बीज शोधन करना अति आवश्यक है. इसका द्वितीय संक्रमण वायु जनित बीजाणु द्वारा होता है. बता दें कि इसके प्रकोप से धान की बालियों के दाने की जगह पीले रंग का बाल बन जाता है. इसके बाद यह काले रंग का हो जाता है. इसको कई किसान हल्दिया रोग भी कहते हैं. यह रोग धान की 60 से 90 प्रतिशत फसल को प्रभावित कर सकता है. अगर तापमान अधिक हो और हवा में आर्द्रता अधिक हो, तो यह रोग तैजी से फैलने लगता है. इसके अलावा धान की खेती में यूरिया का अधिक उपयोग करने से यह बीमारी बढ़ सकता है.

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ऐसे करें बीज का सोधन

  • धान की नर्सरी तैयार से पहले बीज शोधन ज़रूर करना चाहिए.

  • सबसे पहले लगभग 4 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन लें, इसको लगभग 40 से 45 लीटर पानी में घोल लें. इसके बाद धान के बीजों को इसमें 16 से 18 घंटे के लिए भिगोकर रख दें.

  • अब बीजों को छानकर छाया में सुखा लें.

  • इसके बाद बीजों में लगभग 60 ग्राम कार्बेंडाजिम मिलाएं और जूट की बोरियों को भिगोकर ढक दें. इसे लगभग 15 से 18 घंटे के लिए छोड़ दें.

  • जब बीज में सफेद अंकुरण दिखाई देने लगे, तब इससे धान की नर्सरी तैयार करें. ध्यान दें कि यह प्रक्रिया शाम के समय ही करें.

अन्य ज़रूरी जानकारी

कृषि विशेषज्ञ का मानना है कि जब धान में बाली आने लगती हैं, तब लगभग 500 मिलीलीटर प्रोपीकोनाजोल को लगभग 400 लीटर पानी में घोल लें और प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़क दें. अगर बालियों में दाने की जगह कंडुआ दिखाई दे, तो तुरंत बालियों को सावधानी से तोड़कर थैलियों में भरकर मिट्टी में गाड़ दें. इससे बीजाणुं हवा में उड़ नहीं पाएंगे. इस तरह धान की फसल कंडुआ रोग के प्रकोप से बच सकती है.

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English Summary: Seed treatment to avoid paddy Kanduwa disease

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