1. खेती-बाड़ी

मक्का की इन उन्नत संकर किस्मों से मिलेगी प्रति एकड़ 20 से 26 क्विंटल पैदावार, मात्र इतने दिन में फसल होगी तैयार

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य

Maize Cultivation

किसान खरीफ सीजन में धान के बाद मक्का की खेती को प्रमुख फसल मानते हैं. देश के कई हिस्सों में इसकी खेती दाने, भुट्टे और हरे चारे के लिए होती है. मक्का अन्य फसलों की तुलना में कम समय में पककर तैयार हो जाती है, साथ ही अच्छी पैदावार भी मिलती है. 

अगर किसान आधुनिक तकनीक से मक्का की खेती करें, तो इसकी खेती से बहुत अच्छा मुनाफा ले सकते हैं. इसकी खेती में उन्नत किस्मों का सबसे ज्यादा महत्व है. किसानों को अपने स्थानीय क्षेत्र के अनुसार ही मक्का की उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. इससे फसल की पैदावार अच्छी मिलती है. आइए किसान भाईयों को इस लेख में मक्का की उन्नत संकर किस्मों की जानकारी देते हैं.

मक्का की उन्नत संकर किस्मों की जानकारी (Knowledge of improved hybrid varieties of maize)

गंगा सफेद 2 (Ganga Safed 2)

इस किस्म के दाने सफेद रंग के होते हैं, जो कि मध्य क्षेत्रों के लिए ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है. मक्का की यह किस्म लगभग 105 से 110 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म से प्रति एकड़ लगभग 20 से 26 क्विंटल पैदावार मिल सकती है.

गंगा 11 (Ganga 11)

मक्का की इस किस्म से शंकु आकार का मजबूत भुट्टा मिलता है, जिसके दानों का रंग पीला दिखाई देता है. यह किस्म लगभग 105 से 110 दिन में पक जाती है. इससे भी प्रति एकड़ लगभग 20 से 26 क्विंटल पैदावार मिल जाती है.

सरताज (Sartaj)

मक्का की यह किस्म संकर प्रजाति की होती है. इस किस्म के पौधे मध्यम लंबाई के होते हैं, साथ ही इसके पत्ते गहरे हरे रंग के दिखाई देते हैं. इसका तना मोटा और भुट्टा मध्य में लगता है, जो कि काफी कठोर होता है. खास बात है कि मक्का की इस किस्म में बैक्टीरिया से होने वाली सड़न बीमारी को सहन करने की क्षमता होती है. यह किस्म कम बारिश वाले इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इसका चारा पशुओं के लिए अच्छा होता है. इससे प्रति एकड़ लगभग 17 से 20 क्विंटल उपज मिल सकती है.

डी के एच- 9705 (DKH- 9705)

मक्का की इस किस्म से अधिक पैदावार मिल सकती है. यह एक जीवाणु प्रतिरोधी वर्ण संकर किस्म है, जिसकी संबाई मध्यम और भुटे मध्य से ऊपर लगते हैं. इसके पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं. इस किस्म के भुट्टे लंबे और पतले होते हैं, जिनके ऊपर पूरा छिलका चढ़ा होता है. खास बात है कि इस किस्म में झुलसा रोग को सहन करने की क्षमता होती है. यह 91 से 94 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इससे प्रति एकड़ लगभग 23 से 25 क्विंटल पैदावार मिल सकती है.

मालवीय संकर मक्का 290/95 (Malviya hybrid maize 290/95)

यह किस्में लगभग 105 से 110 दिन में पक जाती हैं, जिनसे प्रति एकड़ लगभग 20 से 23 क्विंटल

पूसा संकर 5 (PUSA Hybrid 5)

 मक्का की यह किस्म लगभग 80 से 85 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इससे प्रति एकड़ लगभग 14 से 17 क्विंटल पैदावार प्राप्त हो सकती है.

दकन 107 (Dakan 107)

यह किस्म लगभग 90 से 95 दिन में पककर प्रति एकड़ 16 से 18 क्विंटल पैदावार दे सकती है.

 

एच क्यू पी एम 5 (HQPM 5)

मक्का की इस किस्म से लगभग 105 से 110 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है, जो कि प्रति एकड़ लगभग 20 से 23 क्विंटल पैदावार दे सकती है.

डेक्कन 101 (Dekkan 101)

इस किस्म के पौधे ऊंचे होते हैं, जिनके भुट्टे का आकार मध्यम और दानों का रंग पीला होता है. इस किस्म से लगभग 110 से 115 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है. यह प्रति एकड़ लगभग 24 से 26 क्विंटल पैदावार दे सकती है.

English Summary: Knowledge of improved hybrid varieties of maize in Kharif season for farmers

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