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  1. खेती-बाड़ी

जानें खजूर वृक्षों में परागण विधि और फल गुच्छों की की देखभाल कैसे करें?

Pollination

Pollination

खजूर पामेसी कुल का पौधा है जो एकलिंगी (डायोसियस) श्रेणी में आता है, यानि एक एक पेड़ पर नर या मादा फूल एक साथ नहीं होते. इन श्रेणी के नर और मादा वृक्ष अलग-अलग होते हैं. एक वयस्क खजूर पर 100-150 तक हरी पत्तियाँ होती है. इसका एक पौधा प्रति वर्ष औसतन 10-26 नई पत्तियाँ पैदा करता है. इसके फल गुच्छे (कलस्टर) में होते है. एक अच्छा उत्पादक पेड़ 10 गुच्छों के साथ 100 किलो तक फल आसानी से पैदा कर सकता है. इसका फल परागण से पूर्ण रूप से पकने तक लगभग 200 दिन का समय लेता है. जो पाँच अवस्थाओं से गुजरता है- हब्बाक, गंडोरा, डोका, डेंग और पिण्ड.

खजूर के फल गुच्छों की संघाई (प्रूनिंग) और कटाई (ट्रेनिंग) कैसे करें (How to do pruning and training of date fruits bunches)

गुच्छों में फल बनने के बाद उनके मुख्य डंठल को अप्रैल-मई में इस प्रकार मोड़ना चाहिए कि गुच्छे पत्तियों के नीचे सीधे लटके रहे. ऐसा करने से पूर्ण विकसित एवं कड़े होने पर ये डंठल फलों के बोध से टूटते तथा गुच्छे पत्तियों के डंठलों के घर्षण से बचे रहते हैं. इससे फलों को पक्षियों के नुकसान से बचाया भी जा सकता है.

फल गुच्छों की प्रति वृक्ष संख्या का नियंत्रण भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. आवश्यकता से अधिक संख्या होने पर गुच्छों की अच्छी तरह बढ़वार, फलों का आकार, वजन एवं गुणवत्ता कम हो जाती है. प्रति वृक्ष गुच्छों की संख्या 5 से 20 में रखी जाती है जो खजूर की किस्म, वृक्ष की आयु, वानस्पतिक वृद्धि इत्यादि पर निर्भर करती है. अतिरिक्त फल गुच्छों को शीघ्र निकाल देना चाहिए. प्रत्येक फल गुच्छे के केंद्र की एक तिहाई लड़ियों को निकाल देने से फल शीघ्र एवं भली-भांति पकने से उच्च गुणवत्ता वाले तैयार होते हैं. यह कार्य फल बनने के तुरंत पश्चात शुरू कर देना चाहिए.

Male flower

Male Flower

खजूर में परागण कैसे करें और परागकण संग्रहीत कैसे करें (How to pollination and storage in Date palm)

खजूर में नर एवं मादा पुष्पक्रम अलग-अलग पेड़ों पर आते हैं तथा प्राकृतिक परागण हवा द्वारा परागण नर पेड़ों से मादा पेड़ों तक ले जाने से उत्पन्न होता है या कीटों के माध्यम से संभव हो पाता है. प्राकृतिक रूप से परागण हेतु खेत में आधे नर एवं मादा मादा पेड़ होने चाहिए लेकिन इससे प्रति हेक्टेयर उपज काफी कम हो जाती है अतः कृत्रिम परागण किया जाता है, जिसके लिए खेत में केवल 5% नर पेड़ पर्याप्त होते हैं यानि 95 मादा पेड़ के साथ 5 नर पेड़.

कृत्रिम परागण के लिए नर फूलों से पराग एकत्रित किया जाता है. इकट्ठा हुआ पराग में समान मात्रा में टेलकम पाउडर मिला देते है जिससे मात्रा को बढ़ाया जा सके. परागकणों को रुई के फाहे या पाउडर डब्बी की सहायता से मादा पुष्पक्रमों पर पुष्पों के खेलने के तुरंत पश्चात सुबह के समय छिड़ककर परागकण कर सकते हैं. इस प्रकार परागण प्रक्रिया हर मादा पुष्प क्रम में कम से कम 2 से 3 दिन तक लगातार करनी चाहिए. नर पुष्प कर्मों की ताजी खुली हुई कुछ लड़ियों को खिले हुए मादा पुष्पक्रमों के साथ बांधकर भी परागकण कर सकते हैं. नर पुष्पक्रम की लड़ियां खुले मादा पुष्प क्रम के मध्य में उल्टी करके हल्के से बांध दी जाती है जिससे उनमें से परागकण धीरे धीरे गिरता रहता है.

परागकणों को कुछ समय बाद परागण के लिए संग्रहित भी किया जा सकता है. इसके लिए ताजे एवं पूर्ण रूप से खिले हुए नर पुष्प कर्मों को अखबार के कागज पर झाड़ कर एकत्रित कर लेते हैं. इसके बाद उनको बारीक छलनी से छान लेते हैं जिससे अनावश्यक रूप से उनमें विद्यमान पुष्पक्रमों के अवशेष इत्यादि अलग हो जाएं और उनको 6 घंटे सूर्य की रोशनी में तथा 18 घंटे छाया में सुखा लिया जाता हैं, जिससे परागण में उनको फफूंदी द्वारा हानि ना हो. सुखाये गए परगकणों को कांच की शीशीयों कमरे के सामान्य तापक्रम पर 8 सप्ताह के लिए तथा रेफ्रिजरेटर में 9 डिग्री सेल्सियस तापक्रम पर लगभग 1 वर्ष तक संग्रहित किया जा सकता है.

English Summary: Know how to pollination method and take care of fruit bunches in date palm trees.

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