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Hybrid Paddy Cultivation : इन टॉप किस्मों से करें हाइब्रिड धान की खेती, पढ़िए संपूर्ण जानकारी

हाइब्रिड धान की किस्में, सामान्य धान से 15 प्रतिशत ज्यादा की उपज देती हैं और इस लेख में आप इसकी बुवाई से लेकर किस्मों तक के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

रुक्मणी चौरसिया
हाइब्रिड धान की खेती और किस्में (Hybrid Paddy Cultivation and Varieties)
हाइब्रिड धान की खेती और किस्में (Hybrid Paddy Cultivation and Varieties)

बढ़ती जनसंख्या का पेट भरने के लिए लगातार कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लाई जा रही है, ताकि खाद्य सुरक्षा बनी रहे. राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर अनाज में चावल की भारी मात्रा में मांग है, इसलिए अब किसानों को हाइब्रिड धान की किस्में उगाने के लिए सलाह दी जा रही है. दरअसल, हाइब्रिड धान की खेती (Hybrid Paddy Farming) पर जोर देने का सबसे बड़ा कारण है उत्पादन. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी उपज सामान्य धान की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक होती है.

क्या होता है हाइब्रिड धान (What is Hybrid Paddy)

हाइब्रिड धान एक प्रकार का चावल है, जिसे दो अलग-अलग पैरेंट (Parent) से पैदा किया गया है. यह चावल की अन्य किस्मों से ज़्यादा और बेहतर उपज देने में सक्षम है. आईआरआरआई चावल की नई और उन्नत हाइब्रिड धान की अधिक किस्मों को विकसित करने के लिए काम कर रहा है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि धान की पहली दो हाइब्रिड किस्में आंध्र प्रदेश की राज्य किस्म विमोचन समिति द्वारा 1993 में जारी की गई थीं. साल 2002 के अंत तक, 17 हाइब्रिड धान की किस्में वाणिज्यिक खेती के लिए जारी की गई थी.

हाइब्रिड धान की टॉप किस्में (Top Varieties of Hybrid Paddy)

APHR-1, DRRH-1,  APHR-2, PHB-71, PA-6201, सह्याद्री, नरेंद्र शंकर धन-2 और DRRH-1

हाइब्रिड धान की क्षेत्रीय किस्में (Regional Varieties of Hybrid Paddy)

तेलंगाना, रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपरी इलाके के लिए एमजीआर-1, कोरह-2 और  एडीटीआरएच-1 है.

तमिलनाडु के लिए केआरएचकेआरएच-2 और सीएनआरएच-3 धान की किस्में बेस्ट हैं.

पश्चिम बंगाल व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैदान के लिए पंत शंकर धन-1 और सह्याद्री है.

महाराष्ट्र व पूर्वी उत्तर प्रदेश के कोंकण क्षेत्र के लिए नरेंद्र शंकर धन-2 सबसे अच्छा हाइब्रिड धान है.

तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के किसान पीएचबी-71, पीए 6201 (2000), एचआर-120 (2001) धान की किस्मों को भी उगा सकते हैं.

पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्से जैसे आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र, कर्नाटक, महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, उत्तरांचल के मैदान, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और त्रिपुरा हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली के लिए धान की सबसे अच्छी किस्म पूसा आरएच-10 (2001) है.

धान अनुसंधान निदेशालय (डीआरआर), हैदराबाद ने हाइब्रिड चावल की खेती के लिए ऐसी किस्में विकसित की हैं, जिसे मिट्टी, जलवायु और अन्य संबद्ध कारकों में भिन्नता के आधार पर स्थानीय रूप बोया जा सकता है.

हाइब्रिड धान की बुवाई (Hybrid paddy sowing)

बुवाई को इस तरह से समायोजित करें कि फसल अत्यधिक उच्च या निम्न तापमान के संपर्क में न आए. धान बोने की दो विधियां हैं पहला रोपाई और दूसरी सीधी बुवाई.

हाइब्रिड धान की बुवाई की अवधि (Hybrid paddy sowing period)

हाइब्रिड धान की बुवाई के लिए जून का महीना सबसे अच्छा माना जाता है.

इसके बाद इसकी रोपण अवधि जुलाई के तीसरा सप्ताह तक की जाती है.

ध्यान दें कि स्थानों के मौसम के आधार पर बुवाई और रोपाई का समय थोड़ा भिन्न हो सकता है.

हाइब्रिड धान का बीज दर (Hybrid Paddy Seed Rate)

15-20 किलोग्राम होता है, वहीं हर मौसम में नए सिरे से बीज खरीदना पड़ता है.

हाइब्रिड धान का प्रत्यारोपण (Hybrid paddy transplantation)

बार-बार जुताई करके खेत को अच्छी तरह से तैयार करें

उसके बाद पोखर डालें और रोपाई से दो सप्ताह पहले खेत की खाद की अनुशंसित खुराक डालें.

खेत को पूरी तरह से समतल करने के बाद, रोपाई से एक दिन पहले 50% नाइट्रोजन और 75% पोटाश और फॉस्फोरस की पूरी खुराक दें.

हाइब्रिड धान में खरपतवार प्रबंधन (Weed Management in Hybrid Paddy)

50-70 किग्रा बालू में 2-3 किग्रा बुटोक्लोर मिलाकर धान की रोपाई के 5-6 दिन बाद एक हेक्टेयर क्षेत्र में लगाएं.

इसके बाद 3-4 दिनों के लिए खेत में एक समान 2 सेमी की ऊंचाई पर पानी रखें.

यदि आवश्यक हो, तो स्वस्थ फसल सुनिश्चित करने के लिए हाथ से निराई करें.

हाइब्रिड धान में खाद और उर्वरक (Manure and Fertilizer in Hybrid Paddy)

इन हाइब्रिड धान की पूरी अच्छी पैदावार के लिए जैविक और अकार्बनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग भी बहुत महत्वपूर्ण है.

हरी खाद या फार्म यार्ड खाद (टन) या फिर रासायनिक उर्वरक (किलो) का उपयोग कर सकते हैं.

इस धान को प्रति हेक्टेयर 10-15 टन व किलो खाद की जरूरत होती है.

नाइट्रोजन (एन) फास्फोरस (पी) पोटाश (के) जिंक (जेडएन) का अनुपात 40-60 40-60 रख सकते हैं.

हालांकि, स्थान के आधार पर उर्वरक की जरूरतें थोड़ी भिन्न हो सकती है, लेकिन अधिक पैदावार के लिए जिंक और आयरन की आवश्यकता फसलों में पूरी करें.

हाइब्रिड धान की खेती में जल प्रबंधन (Water Management in Hybrid Paddy Cultivation)

वहीं, जल प्रबंधन के लिए शुरुआती 30 दिनों तक पानी की एक पतली परत बनाए रखें. जब फसल अधिकतम जुताई की अवस्था में पहुंच जाए, तो जल स्तर को 4-5 सेमी तक बढ़ा दें.

अधिकतम जुताई की अवस्था के बाद 4 से 5 दिनों के लिए पानी निकाल दें.

कटाई से दस दिन पहले खेत से सिंचाई का पानी पूरी तरह से निकाल दें.

हाइब्रिड धान का अनाज भंडारण (Hybrid Paddy Grain Storage)

जैसा की कुछ किसान भाइयों को यह पता भी होगा कि भंडारित किए जाने वाले अनाज की मात्रा के आधार पर, एक उपयुक्त भंडारण संरचना की आवश्यकता होती है, और मैलाथियान स्प्रे भंडारण संरचना को कीटाणुरहित करती है. अनाज भरने से पहले, इसको बिना पिसाई वाले धान के रूप में स्टोर करें. भंडारण से पहले अनाज की नमी का स्तर 12-14% तक कम करके खुले में सुखाएं.

इसके अलावा, आप अनाज को बैगों में भी स्टोर कर सकते हैं. बैगों को व्यवस्थित तरीके से लकड़ी के टोकरे पर या दीवारों से दूर भूसी या पुआल की एक फुट ऊंची मोटी परत पर रखें.

हाइब्रिड धान की उपज और कमाई (Hybrid paddy yield per hectare and profit)

अच्छे खेत प्रबंधन के साथ-साथ उच्च उपज देने वाली किस्मों की तुलना में हाइब्रिड धान 1-2 टन प्रति हेक्टेयर अधिक उपज दें सकते हैं. हाइब्रिड बीज की लागत थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन उपज उतनी ही बेहतर होती है, जिससे किसानों को अच्छा-ख़ासा मुनाफा मिल सकता है.

क्या हैं हाइब्रिड धान के नुकसान (Disadvantages of Hybrid Paddy)

संकर चावल के नुकसान नुकसान भी हैं. पहले नुकसान का कारण इसके बीज की कीमत है. दरअसल, अन्य सामान्य किस्मों की तुलना है यह थोड़ा महंगा पड़ता है, जिससे किसान इसको लेने में कतराते हैं. वहीं, दूसरा कारण इसकी उपयोगिता है. आसान शब्दों में आपको बताएं, तो किसान एक वर्ष से दूसरे वर्ष तक अपने बीज का उपयोग नहीं कर सकते हैं, उन्हें हर साल नए बीज खरीदने होंगे.

English Summary: hybrid paddy cultivation and its top varieties complete information Published on: 20 June 2022, 12:36 IST

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