1. खेती-बाड़ी

गेहूं की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग और रोकथाम करने का तरीका

हेमन्त वर्मा
हेमन्त वर्मा

Major diseases in Wheat crop

किसी फसल में बीज, सिंचाई, उर्वरक के अलावा रोग तथा कीट की समुचित व्यवस्था करना जरुरी रहता है. गेहूं की फसल में लगने वाले रोग पर्ण झुलसा, लूज़ स्मट, उकठा रोग और गेरुआ रोग नुकसान इतना होता है की पूरी फसल ही खत्म हो जाती है. गेहूं की फसल के ये प्रमुख रोग है. जिसकी वजह से पैदावार में भारी कमी आती है, अतः इसकी पहचान और उपाय जानने आवश्यक है.     

किसी फसल में बीज, सिंचाई, उर्वरक के अलावा रोग तथा कीट की समुचित व्यवस्था करना जरुरी रहता है. गेहूं की फसल में लगने वाले रोग पर्ण झुलसा, लूज़ स्मट, उकठा रोग और गेरुआ रोग नुकसान इतना होता है की पूरी फसल ही खत्म हो जाती है. गेहूं की फसल के ये प्रमुख रोग है. जिसकी वजह से पैदावार में भारी कमी आती है, अतः इसकी पहचान और उपाय जानने आवश्यक है.

पर्ण झुलसा रोग के लक्षण (Symptom Leaf blight disease)

इस रोग के लक्षण पौधे के सभी भागों में पाये जाते हैं तथा पत्तियों पर इसका प्रभाव बहुत अधिक देखने को मिलता है. शुरू में इस रोग के लक्षण भूरे रंग के नाव के आकार के छोटे धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं जो कि बड़े होकर पत्तियों के पूरे भाग को झुलसा देते हैं तथा इसके कारण ऊतक मर जाते हैं और हरा रंग नष्ट हो जाता है. इससे प्रकाश संश्लेषण बुरी तरह प्रभावित होता है. प्रभावित पौधे के बीजो में अंकुरण क्षमता कम होती है. 

पर्ण झुलसा रोग के रोकथाम उपाय (Prevention of Leaf blight disease)

  • थायोफिनेट मिथाइल 70% W/P @ 300 ग्राम/एकड़ या कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ेब 63% WP @ 300 ग्राम/एकड़ या हेक्साकोनाज़ोल 5% SC @ 400 मिली/एकड़ या टेबुकोनाज़ोल 10% + सल्फर 65% WG @ 500 ग्राम/एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 400 ग्राम/एकड़ या कासुगामायसिन 5% + कॉपर आक्सीक्लोराइड 45% WP @ 300 ग्राम/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें.

  • जैविक उपचार के रूप में ट्रायकोडर्मा विरिडी @ 500 ग्राम/एकड़ या स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ की दर छिड़काव करें.

लूज़ स्मट रोग के लक्षण (Symptom Loose smut disease)

गेहूं की फसल में लगने वाला यह रोग दरअसल एक बीज़ जनित रोग है और यह अस्टीलैगो सेजेटम नामक एक कवक की वजह से होता है. इस रोग के लक्षण बाली आने पर ही दिखाई देते हैं. रोगी पौधों की बालियों में दानों की जगह रोग जनक के स्पोर्स काले पाउडर के रूप में नजर आते हैं जो हवा से उड़कर अन्य स्वस्थ बालियों में बन रहे बीजों को भी संक्रमित कर देते हैं.

लूज़ स्मट रोग के रोकथाम उपाय (Prevention of Leaf blight disease)

  • इस रोग के नियंत्रण का सबसे अच्छा उपाय बीज़ उपचार है.

  • इसके आलावा इस रोग के नियंत्रण के लिए कासुगामायसिन 5% + कॉपर आक्सीक्लोराइड 45% WP @ 300 ग्राम/एकड़ या कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ेब 63% @ 600 ग्राम/एकड़ या टेबुकोनाज़ोल 10% + सल्फर 65% WG @ 500 ग्राम/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.

  • जैविक उपचार के रूप में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.

गेहूं में उकठा रोग के लक्षण (Symptom Wilt disease)

गेहूं की फसल में यह रोग एक जीवाणु एवं कवक जनित रोग है जो फसल को काफी नुकसान पहुँचाता है. बैक्टीरियल विल्ट संक्रमण के लक्षण संक्रमित पौधों के सभी भागों पर देखे जा सकते हैं. इसके कारण पत्तियां पीली हो जाती हैं. आगे चलकर पूरा पौधा सूख जाता है और मर जाता है. इसके कारण गेहूं की फसल खेत में गोल घेरे में सूखना शुरू हो जाती है.

उकठा रोग के रोकथाम उपाय (Prevention of Wilt disease)

  • इसके नियंत्रण हेतु कासुगामायसिन 5% + कॉपर आक्सीक्लोराइड 45% WP@ 300 ग्राम/एकड़ या कासुगामायसिन 3% SL@ 400 मिली/ 200 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.

  • जैविक उपचार के रूप में स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/200 लीटर पानी प्रति एकड़ छिड़काव के रूप में उपयोग करें.

गेहूं में गेरुआ रोग के लक्षण (Symptom Rust disease)

गेहूं की फसल में लगने वाले गेरुआ रोग (Rust) तीन प्रकार का पीला गेरुआ, काला गेरुआ, भूरा गेरुआ होता है. गेरुआ रोग के कारण पीले, काले एवं भूरे रंग का पाउडर पत्तियों पर जमा हो जाता है. जैसे-जैसे तापमान में गिरावट होती है वैसे-वैसे इस रोग का प्रकोप बढ़ता जाता है. पाउडर जमा होने के कारण पत्तियों की भोजन बनाने की क्षमता बहुत प्रभावित होती है. जिसके कारण बाद में पत्तियां सूखने लगती है जिसके कारण उत्पादन बहुत ज्यादा प्रभावित होता है.

गेरुआ रोग के रोकथाम उपाय (Prevention of Rust disease)

  • इस रोग के नियंत्रण के लिए हेक्साकोनाज़ोल 5% SC@ 400 मिली/एकड़ या प्रोपिकोनाज़ोल 25% EC @ 200 मिली/एकड़ या टेबुकोनाज़ोल 25.9% EC @ 200 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करें.

  • जैविक उपचार के रूप में ट्रायकोडर्मा विरिडी @ 500 ग्राम/एकड़ या स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें. छिड़काव के लिए 200 लीटर पानी की आवश्यकता होती है.

English Summary: How to save from major diseases in Wheat crop

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