1. खेती-बाड़ी

बैक्टीरिया से उत्पन्न हुए रोगों का फसल प्रबंधन कैसे करें

हेमन्त वर्मा
हेमन्त वर्मा
Bacteria

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पेड़-पौधों में कई प्रकार की बीमारियाँ हो जाती हैं, जिसका नियंत्रण जीवाणुनाशक दवा से करना चाहिए. ये रसायन जीवाणु के स्पोर पर हमला कर इन्हें नष्ट कर देते हैं. टमाटर में बैक्टीरियल स्पॉट, बैक्टीरियल लीफ़ ब्लाइट और बैक्टीरियल केंकर तथा गोभी की फसल में ब्लेक रोट, कपास में बैक्टीरियल ब्लाइट और एंगुलर लीफ स्पॉट, आम में बैक्टीरियल ब्लेक स्पॉट, आलू का स्कैब रोग, धान का पैनिकल ब्लाइट, सेब और नाशपाती में फायर ब्लाइट तथा नींबू में सिट्रस केंकर रोग बैक्टीरिया की वजह से पैदा होते हैं. इन रोगों के लिए कुछ जीवाणुनाशक दवा को प्रयोग करके नियंत्रण किया जा सकता है.   

1. कासुगमाइसिन (KASUGAMYCIN 3 SL)

कासुगमाइसिन 3 एसएल एक प्रणालीगत जीवाणुनाशक और कवकनाशी (systemic bactericide and fungicide) है. यह निवारक और उपचारात्मक कार्रवाई के साथ एक व्यापक स्पेक्ट्रम कवकनाशी है. यह बहुत क्षारीय उत्पाद को छोड़कर अधिकांश कवकनाशी और कीटनाशकों के साथ संगत है. यह प्रोटीन बायोसिंथेसिस को रोकता है, इसलिए बैक्टीरिया के विकास और प्रजनन को कम करता है. इसकी एंटीबायोटिक प्रणालीगत कार्रवाई के कारण, यह पौधों में फैल कर बहुत तेजी से और प्रभावी ढंग से रोगों को नियंत्रित करता है. यह बाजार में Kasu-B और बायोमाइसिन ब्राण्ड के नाम से मिलती है जो SL फोरमेशन में पाई जाती है.  

रोगों से नियंत्रण के लिए कासुगमाइसिन की मात्रा (Kasugamycin 3% SL dosage for control of diseases)

धान के ब्लास्ट रोग में 400-600 मिली और कपास में बैक्टीरियल ब्लाइट और एंगुलर लीफ स्पॉट रोगों के लिए 300 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं.

2. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride 50% WP)

यह बाजार में धनुकोप, ब्लू कॉपर और ब्लाइटोक्स नाम से उपलब्ध है. यह एक तांबा आधारित व्यापक स्पेक्ट्रम कवकनाशी (broad spectrum fungicide) है जो अपने contact द्वारा कवक के साथ-साथ जीवाणु रोगों को नियंत्रित करता है. यह अन्य कवकनाशकों के प्रतिरोधी कवक को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है. अपने बारीक कणों के कारण, यह पत्तियों से चिपक जाता है और कवक के विकास को रोकने में मदद करता है.

यह सुरक्षात्मक (protective action) के साथ एक व्यापक स्पेक्ट्रम संपर्क कवकनाशी है. कॉपर अमीनो एसिड और कार्बोक्सिल समूहों के लिए मजबूत संबंध के कारण, प्रोटीन के साथ प्रतिक्रिया करता है और लक्ष्य जीवों में एक एंजाइम रुकावट के रूप में कार्य करता है. कॉपर कुछ एंजाइमों के सल्फैहाइड्रल समूहों के साथ संयोजन करके बीजाणुओं को मारता है. इस तरह बीजाणुओं का कम सांद्रता पर भी अंकुरण बाधित होता है.

रोगों से नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की मात्रा (Copper Oxychloride 50% WP dosage for control of diseases)

यह अंगूर में एन्थ्रेक्नोज, बेक्टीयल लीफ ब्लाइट के लिए 300 ग्राम और धान के ब्लास्ट के लिए 300 ग्राम, आलू के अगेती और पिछेती झुलसा (Early And Late Blight) के लिए 1 किलो, टमाटर के अगेती झुलसा, पिछेती झुलसा और लीफ स्पॉट के लिए 1 किलो, मिर्च की फसल में Leaf Spot, Fruit Rot के लिए 1 किलो, केले में Banana Leaf Spot, Fruit Rot के लिए 1 किलो, जीरा में ब्लास्ट रोग के लिए 1 किलो, अंगूर में Downy Mildew के लिए 1 किलो तथा नींबू वर्गीय पेड़ों में सिट्रस केंकर के लिए 1 किलो प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए.

3. कासुगमाइसिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड मिश्रण (Kasugamycin 5 + Copper Oxychloride 45 WP)

यह बाजार में कोनिका के नाम से उपलब्ध है. यह एक नया संयोजन उत्पाद है जिसमें कई फसलों में बैक्टीरिया-कवक जटिल गठन (Bacterio-fungal complex formation) को रोकने के लिए कवकनाशी और जीवाणुनाशक की शक्ति होती है. यह एक संपर्क और प्रणालीगत कवकनाशी है जो बीजाणुओं और मायसेलियम के एंजाइम प्रणाली में हस्तक्षेप करता है और यह प्रोटीन जैव संश्लेषण को रोकता है. इसकी दोहरी क्रिया फसलों को फफूंद और जीवाणु रोगों से बचाने के लिए एक प्रभावी और शक्तिशाली उपकरण बनाती है. इसका समय पर प्रयोग किसानों को सुपर क्वालिटी की उपज के साथ रोग मुक्त स्वस्थ फसल देता है. यह धीरे-धीरे तांबे के आयनों को छोड़ता है, जिससे यह लंबे समय तक रोग को नियंत्रित करता है. इसके साथ ही प्राकृतिक यौगिक होने के नाते, स्तनधारियों के लिए सुरक्षित है.

रोगों से नियंत्रण के लिए कासुगमाइसिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड मिश्रण की मात्रा (Kasugamycin 5 + Copper Oxychloride 50% WP dosage for control of diseases)

यह कपास के बैक्टीरियल ब्लाइट और एंगुलर लीफ स्पॉट, टमाटर के डेंपिंग ऑफ और बैक्टीरियल स्पॉट में, धान में बैक्टीरियल लीफ़ ब्लाइट, मिर्च में बैक्टीरियल स्पॉट, आम में बैक्टीरियल ब्लेक स्पॉट, नींबू में सिट्रस केंकर रोग, खीरा पत्ती धब्बा रोग आदि के नियंत्रण के लिए 300 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी की दर से स्प्रे करना चाहिए.

4. Streptocycline (स्ट्रेप्टोसाइक्लिन)

स्ट्रेप्टोसाइक्लिन एक जीवाणुरोधी एंटीबायोटिक दवा है जो पौधों के जीवाणु रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए काम में आती है. यह 9: 1 के अनुपात में स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट और टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड युक्त पीले रंग का पाउडर है जो पानी में आसानी से घुलनशील है. Systemic तरीके से काम कर यह छिड़काव में आसानी से पौधे में अवशोषित हो जाता है और पौधों के अंदर प्रवेश करता है, जिससे बारिश में धोया नहीं जाता है.

रोगों से नियंत्रण के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन की मात्रा (Streptocycline dosage for control of bacterial diseases)

स्ट्रेप्टोसाइक्लिन आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकांश कीटनाशकों और कवकनाशी के साथ संगत है. यह धान में बैक्टीरियल लीफ़ ब्लाइट, टमाटर और मिर्च में बैक्टीरियल स्पॉट, गोभी में ब्लेक स्पॉट या ब्लेक रोट, कपास में बैक्टीरियल ब्लाइट और एंगुलर लीफ स्पॉट, आम में बैक्टीरियल ब्लेक स्पॉट, नींबू में सिट्रस केंकर रोग, खीरा पत्ती धब्बा रोग आदि के नियंत्रण के लिए 6 ग्राम मात्रा को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए.

English Summary: How to manage bacterial diseases of crops

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