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रेतीली जमीन पर तरबूज की खेती कर, किसान कमा रहे बंपर मुनाफा !

रेतीली जमीन पर तरबूज की खेती कर, किसान कमा रहे बंपर मुनाफा !

एक वक्त ऐसा था की गंडक नदी को अभिशाप माना जाता था लेकिन आज वही गंडक नदी की रेतीली धरती अब सोना उगलने का कार्य कर रही है. दरअसल किसानों ने गंडक नदी के किनारे खरबूज और तरबूज की खेती करने के लिए पूरी मेहनत की है. जिस कारण इनका उत्पादन काफी तेजी से बढ़ा है. बिहार के बगहा में उगने वाले इन खरबूज और तरबूज की मांग उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर और बनारस आदि तक है. दरअसल यहां पर हाइब्रीड बीज से खेती करने वाले किसान हर सीजन में लाखों रुपये कमा रहे है. रेत से तरबूजों की बढ़िया मिठास होती है, यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के व्यापारी यहां पर आते है और किसानों को रकम पहले ही एडवांस में दे जाते है.

किसान हालात सुधारने पर कर रहे कार्य

इस बार बिहार की गंडक नदी की रेतीली सैकड़ों एकड़ जमीन पर किसानों ने तरबूज की खेती करने का कार्य किया है. अभी फिलहाल तरबूज पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है, लेकिन इस रेत में कददू, कैदा, नेनुआ आदि की पूरी फसल लहलहा रही है. इसीलिए किसान अपनी हालात को सुधारने की दिशा में कार्य कर रहे है.

तरबूज की खेती

गंडक नदी की मुख्यधारा में जहां पर भी बाढ़ का पानी पूरी तरह से उछाल मारता था उस जगह पर किसान आज तरबूज की खेती कर रहे है. हालांकि यह भूमि उन सभी किसानों की है जो कि गंडक नदी के कटाव के चलते पूरी तरह से यहां से पलायन कर चुके थे. बाद में उन किसानों पर अजीविका को कोई रास्ता नहीं बचा था. लेकिन गंडक नदी के द्वारा छोड़ी गई रेत किसानों के लिए वरदान ही है. इस भूमि में तरबूज के अलावा कोई और फसल नहीं होती है. यहां पर तरबूज की ही बेहतर फसल होती है.

किसानों को नहीं मिली सरकारी सहायता

वैसे तो किसानों को अन्य खेती को करने पर सरकार की ओर से बीज और सिंचाई समेत कई तरह की सुविधाओं पर अनुदान की व्यवस्थाएं की गई है. लेकिन गंडक नदी में तरबूजे की खेती को करने वाले किसानों को किसी भी तरह से कोई भी सरकारी सुविधा की व्यवस्था नहीं की गई है. किसानों ने इसके लिए कृषि विभाग और प्रखंड कार्यालय तक के कई बार चक्कर लगाएं है लेकिन उनको कोई भी अनुदान नहीं मिला है.



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