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कचरा प्रबंधन की उत्तम तकनीकी

देश में हर साल करीब 6 करोड़ 20 लाख टन अपघटन (गलन) किया जाने वाला कचरा पैदा होता है. शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी वाले क्षेत्रों में कृषि और ठोस कचरे (Urban solid waste) का प्रबंधन चिंता का विषय है. इस दिक्कत को दूर करने के लिए गाजियाबाद में राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (National Organic Farming Center) ने कचरा अपघटन नामक एक उत्पाद भी विकसित किया है. यह उत्पाद में लाभकारी सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) से निर्मित किया गया है. यह सभी प्रकार के कृषि और बागवानी फसलों में उपयोग कर रोगों से लड़ने और पैदावार बढ़ाने में मदद करता है. इससे शीघ्र खाद के साथ-साथ बीज उपचार के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है.

हेमन्त वर्मा
Organic Farm at CAZRI, Jodhpur
Organic Farm at CAZRI, Jodhpur

देश में हर साल करीब 6 करोड़ 20 लाख टन अपघटन (गलन) किया जाने वाला कचरा पैदा होता है. शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी वाले क्षेत्रों में कृषि और ठोस कचरे (Urban solid waste) का प्रबंधन चिंता का विषय है. इस दिक्कत को दूर करने के लिए गाजियाबाद में राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (National Organic Farming Center) ने कचरा अपघटन नामक एक उत्पाद भी विकसित किया है. यह उत्पाद में लाभकारी सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) से निर्मित किया गया है. यह सभी प्रकार के कृषि और बागवानी फसलों में उपयोग कर रोगों से लड़ने और पैदावार बढ़ाने में मदद करता है. इससे शीघ्र खाद के साथ-साथ बीज उपचार के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है.

कचरा अपघटन तकनीक की विशेषताएं (features of Waste decomposition technique)

  • कचरे का अपघटन करके खाद् बनाने वाली ये विधि बहुत सरल है.

  • यह प्रॉडक्ट लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, और इसे उपज बढ़ाने के लिए सभी फसलों में प्रयोग कर सकते हैं.

  • इसको तैयार करने में खर्चा बहुत कम होता है

  • यह एक बोतल 20 रुपए में मिल जाती है.

  • इसके उपयोग से प्रतिवर्ष एक लाख मैट्रिक टन से अधिक जैविक खाद (Organic manure) का उत्पादन किया जा सकता है.

  • कचरे का गलन और खाद (Waste decomposition) का उपयोग मिट्टी की भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों को सुधारता है.

  • वेस्ट डीकंपोजर के प्रयोग करने से रासायनिक उर्वरक जैसे यूरिया, डाई अमोनियम फास्फेट (DAP) आदि फसलों के लिए जरूरी नहीं रह जाता.

  • परंपरागत खेती में कचरा डिकम्पोज़ के उपयोग से 60% कृषि लागत को रासायनिक उर्वरक न देकर बचाया जा सकता है इसका मतलब यह है कि जब कचरा अपघटन (गलन) को पारंपरिक खेती में उपयोग किया जाता है तो कम फर्टिलिजर का इस्तेमाल होता है.

  • इससे मिट्टी में जैविक कार्बन (Organic carbon) में वृद्धि भी होती है. वेस्ट डेकम्पोजर को फसल पर इस्तेमाल करने से फसल को नीलगाय नहीं खाती है.

  • इसका उपयोग सभी कीटनाशकों की जरूरत को कम कर देता है क्योंकि यह रोगों लगने से रोकता है.

  • इसके अलावा खड़ी फसल पर वेस्ट डीकंपोजर के नियमित सिंचाई के साथ उपयोग करने से पौधों को सभी प्रकार के रोगों और कीटों से बचाया जा सकता है.  

वेस्ट डेकम्पोजर तकनीक की विधि (Method of waste decomposition technique)

2 किलो गुड़ को 200 लीटर पानी भरकर प्लास्टिक के ड्रम में मिला लें. कचरा अपघटन की एक बोतल लें और इसमें उपस्थित सामग्री को गुड़ के घोल वाले प्लास्टिक ड्रम में डाल दें. कचरा अपघटन को अच्छी तरह घोलने के लिए लकड़ी का उपयोग करना चाहिए. घोल की ऊपरी सतह जब दूधिया हो जाये तो समझे यह उत्पाद तैयार हो गया है.  

इस घोल से बार-बार कचरा अपघटन का निर्माण भी कर सकते हैं, इसके लिए 20 लीटर इस शुद्ध घोल को 2 किलोग्राम गुड़ के साथ ड्रम में 200 लीटर पानी में मिला दे. जिससे यह फिर से यह 7 दिनों में तैयार हो जाएगा कचरा अपघटन का उपयोग जैविक खाद तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है. यानि 20 रुपए की बोतल से मल्टीप्लाइ (गुणन) करने पर हर साल उपयोग कर सकते है.

इस घोल से बार-बार कचरा अपघटन का निर्माण भी कर सकते हैं, इसके लिए 20 लीटर इस शुद्ध घोल को 2 किलोग्राम गुड़ के साथ ड्रम में 200 लीटर पानी में मिला दे. जिससे यह फिर से यह 7 दिनों में तैयार हो जाएगा कचरा अपघटन का उपयोग जैविक खाद तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है. यानि 20 रुपए की बोतल से मल्टीप्लाइ (गुणन) करने पर हर साल उपयोग कर सकते है.

English Summary: Best waste management technique Published on: 30 December 2020, 05:49 PM IST

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