देशभर के किसान भाई खरीफ सीजन की फसलों की खेती करने में व्यस्त है और कुछ किसान भाइयों के मन में यह सवाल है कि वह किस फसल का चुनाव करें, जिससे वह अपनी आमदनी में कुछ इजाफा कर सकें. ऐसे में एलोवेरा की खेती किसानों के लिए सही विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि यह ऐसी फसल है, जिसकी बाजार में 12 महीने मांग बनी रहती है. साथ ही यह सदाबहार औषधीय फसल और 7 महीनों में ही कटाई के लिए तैयार हो जाती है और किसानों को बाजारों में भी अच्छे दाम मिल जाते हैं.
क्यों बढ़ रही है एलोवेरा की मांग
एलोवेरा एक ऐसी औषधीय फसल है, जिसका उपयोग कई प्रकार के उत्पादों में किया जाता है जैसे कि कॉस्मेटिक और हर्बल उत्पादों में इसकी मांग सबसे अधिक बनी रहती है और मार्किट में एलोवेरा फेसवॉश, क्रीम, फेस पैक, जेल, शैंपू और कई अन्य उत्पाद बड़ी मात्रा में बिक रहे हैं. यही वजह है कि आयुर्वेदिक और कॉस्मेटिक कंपनियां किसानों से सीधे एलोवेरा की खरीद करती है. इसलिए कई किसान भाई इस फसल की ओर बढ़ रहे हैं.
आगे इसी क्रम में जानेंगे की एलोवेरा की खेती करने के आसान तरीकों के बारे में विस्तार से-
कैसी होनी चहिए जलवायु और मिट्टी?
एलोवेरा की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. यह पौधा अत्यधिक ठंड को सहन नहीं कर पाता. इसकी खेती रेतीली, दोमट और काली मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली भूमि होना जरूरी है और मिट्टी का पीएच मान लगभग 8.5 तक उपयुक्त होना चहिए.
रोपण का सही समय
एलोवेरा की रोपाई के लिए उचित समय सबसे अच्छा समय जुलाई-अगस्त है या फिर फरवरी-मार्च में भी इस फसल को लगा सकते हैं. यानी की सर्दियों को छोड़कर वर्ष के अन्य महीनों में भी इसकी खेती की जा सकती है और इस फसल से अच्छा उत्पादन पा सकते हैं.
कैसे करें खेत की तैयारी और रोपाई?
किसान भाई अगर ऐलावेरा की खेती कर रहे हैं तो सबसे पहले खेत की अच्छे से जुताई कर लें और उसके बाद 15 से 20 टन सड़ी हुई गोबर की खाद का मिला दे, ताकि मिट्टी की उर्वरता बढ़ें और उपज अधिक मिले. इसके अलावा, किसान रोपाई के लिए तीन से चार महीने पुराने चार-पांच पत्तियों वाले पौधों का उपयोग करें, क्योंकि चार महीने पुराने पौधे तेजी से बढ़ते हैं और कटाई के लिए भी कम समय में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं.
सिंचाई और देखभाल
एलोवेरा को बहुत अधिक पानी की जरुरत नहीं होती. रोपाई के तुरंत बाद एक बार सिंचाई करनी चाहिए और इसके बाद जरूरत के अनुसार पानी देना चाहिए, क्योंकि अधिक पानी देने से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है, तो ध्यान रहे कि सामान्य मौसम में सप्ताह में एक बार ही सिंचाई करें.
खेती में लागत और मुनाफा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार एक हेक्टेयर में एलोवेरा की खेती करने पर शुरुआती खर्च लगभग 50 हजार रुपये तक आता है, जिसमें खेत की तैयारी, मजदूरी और खाद शामिल होती है. इसके अलावा, बाजार में एलोवेरा की पत्तियों की कीमत लगभग 15,000 से 25,000 रुपये प्रति टन तक मिल जाती है. इस हिसाब से किसान एक हेक्टेयर क्षेत्र से 8 से 10 लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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