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छह सौ रूपये क्विंटल की दर से आलू खरीदेगी सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के किसानों से 600 रूपये क्विंटल की दर से आलू की  खरीद करेगी. राज्य में आलू के बीज के दामों में वृद्धि को देखते हुए राज्य सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत ब़ढ़ी हुई कीमतों पर आलू खरीदने की संस्तुति केंद्र सरकार से की है.

केंद्र से मंजूरी मिलते ही शुरू होगी खरीददारी

आमतौर पर ऐसे मामलों में राज्य की संस्तुतियों को केंद्र सरकार मान लेती है. इस लिहाज से राज्य का आलू खरीदने वाला उद्यान विभाग अभी से आलू का समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 600 रूपये मानकर चल रहा है. जैसे ही केंद्र सरकार की तरफ से मंजूरी मिलती है आलू विभाग खरीददारी शुरू कर देगा. फिलहाल इसका प्रस्तावित मूल्य पिछले वर्ष की अपेक्षा 51 रूपये प्रति क्विंटल अधिक है. पिछले साल आलू का समर्थन मूल्य 549 रूपये जबकि वर्ष 2017 में 487 रूपये प्रति क्विंटल तय किया गया था.

तय समय से पहले आई संस्तुति

आलू का समर्थन मूल्य घोषित करने के बेहतर परिणाम को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को तय समय में ही संस्तुति भेज दी थी. जानकारों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश आलू का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. देशभर में पैदा होने वाले कुल आलू का 35 से 38 फीसदी हिस्सा यूपी में ही पैदा होता है. दक्षिण से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में उत्तर प्रदेश से ही आलू की आपूर्ति की जाती है. किसानों को आर्थिक रूप से ज्यादा क्षति ना हो इसके लिए सरकार ने काश्तकार का न्यूनतम लाभ जोड़कर केंद्र से संस्तुति की है.

आलू उत्पादन की स्थिति

यदि उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश आलू उत्पादक करने वाला सबसे बड़ा राज्य है. यहाँ देश का 35 से 38 फीसदी आलू उत्पादन होता है. वर्ष 2018 में प्रदेश में 162 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था. प्रदेश में आलू की भंडारण क्षमता 150.55 लाख टन है. सूबे में सरकारी, सहकारी और निजी क्षेत्र के कुल 1919 कोल्ड स्टोर है. इनमें से सहकारी क्षेत्र के करीब 32 कोल्ड स्टोरेज बंद पड़े हुए हैं.

पिछले साल खरीदा गया 8 हजार क्विंटल आलू

अगर प्रदेश में आलू खरीद योजना की बात करें तो पिछले साल राज्य में आलू खरीद योजना के तहत किसानों से करीब 8 हजार क्विंटल आलू की खरीद हुई थी. जबकि वर्ष 2017 में 12,937 हजार क्विंटल ही आलू खरीदा जा सका था. दोनों ही सालों में आलू खरीद का लक्ष्य एक लाख क्विंटल रखा गया था लेकिन आलू की सरकारी खरीद शुरू होने से दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. इसका सबसे बड़ा फायदा राज्य के किसानों को हुआ है.



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