1. मौसम

किसान भाई मार्च महीने में क्या करें

गेहूँ की फसल में-

गेहूँ की फसल इस समय दाना भरने अथवा दाना सख्त होने की अवस्था में है | इस अवस्था में मिट्टी में नमी की कमी होने से उपज में कमी आ जाएगी, अत: किसान भाई अपनी फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें | किसान भाई यह ध्यान रखें कि गेहूँ का मामा (जो एक खरपतवार है) तथा लूज स्मट (अनावृत कंड) रोग से ग्रसित बालियाँ (जिसमें सभी बालियाँ काले चूर्ण का रूप ले लेती है एवं उसमें दाने नही बनते है) अगर दिखाई पड़े तो उन्हें पोलीथीन के थैली से ढककर तोड़ लें तथा उन्हें जलाकर किसी गढ्ढे में दबा कर नष्ट कर दें | साथ ही साथ यह ध्यान रखें कि रोगी बालियों को काटते समय उसका चूर्ण जमीन पर नहीं गिरने दे | इससे तैयार अनाज की गुणवत्ता बढ़ जाती है | यह प्रक्रिया उन किसान भाईयों के लिए अति महत्वपूर्ण है जो अगले वर्ष इस फसल को बीज के रूप में व्यवहार करना चाहते है | 

गरमा धान-

खेत में जल जमाव बनाए रखें | रोपा के 25 से 30 दिनों बाद खरपतवार नियंत्रित कर यूरिया का बुरकाव करें | रोपा के 25 से 30 दिनों बाद कोनोवीडर मशीन को दो पंक्तियों के बीच में आगे –पीछे करते हुए चला दें, इससे खरपतवार नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाती है | साथ ही मिट्टी के हल्का होने से वायु संचार की स्थिति में भी सुधार होता है और पौधों में कल्ले अधिकाधिक संख्या में निकलते हैं | 

जैट्रोफा-

समतल क्यारी: 15 X 15 सें.मी. दूरी पर बीज बोयें | बोने के पूर्व बीज को 12 घंटों तक भिगोयें| तीन माह बाद स्वस्थ पौधों का रोपण करें | 

राई/सरसों-

राई-सरसों की कटाई 75% फलियों के सुनहरे होने पर करनी चाहिए | इस अवस्था में दानों में तेल की मात्रा अधिक रहती है | 

आलू-

आलू पौधे के पत्ते पीले पड़ने लगे तथा तापमान बढ़ने पर हल से कोड़ाई कर देनी चाहिए | कोड़ाई के बाद आलू कन्दों को छप्परवाले घर में फैला कर कुछ दिन रखना चाहिए ताकि छिलके कड़े हो जाए | 

गरमा मूंग-

जिन किसान भाई के पास सिर्फ एक से दो सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो तो वे रबी फसल को काटने के बाद गरमा मूंग की खेती कर सकते हैं | 

आम-

(1)  इस समय मृदा में मौजूद नमी को बनाए रखने के लिए पौधे के तने के चारों तरफ सूखे खरपतवार या काली पोलीथीन की मल्चिंग बिछाना लाभदायक पाया गया है |

(2) गुजिया: (मिली बग) फलों की निचली सतह, टहनियों तथा फलों पर रस शोषक सफेद कीट समूह, कपासनुमा शरीर के कारण जल्दी ही दिख जाती है | उग्रता की स्थिति में टहनियां सूखने लगती है | इसके प्रबंधन के लिए क्किनॉलफास 2 मि.ली./ली. या मोनो क्रोटोफास 1.5 मि.ली./ली. का छिड़काव करना चाहिए |

लीची

(1)  फल लगने के एक सप्ताह बाद प्लैनोफिक्स (2 मि.ली./4.8 ली.) या एन.ए.ए. (20 मि.ग्रा./ली.) का एक छिड़काव करके फलों को झड़ने से बचाएं |

(2) फल लगने के 15 दिन बाद के बोरिक आम्ल (2 ग्रा. ली.) या बोरेक्स (5 ग्रा./ली.) के घोल का 15 दिनों के अंतराल पर तीन छिड़काव करने से फलों का झड़ना कम हो जाता है, मिठास में वृद्धि होती है तथा फल के आकार एवं रंग में सुधार होने के साथ-साथ फल फटने की समस्या भी कम हो जाती है | 

आँवला-

(1) आंवले के लिए कांचन, कृष्णा, नरेन्द्र आँवला-6, नरेन्द्र आँवला-7, नरेन्द्र आँवला-10 यह किस्में अनुशंषित की जाती है |

(2) बीज को बोने से 12 घंटे पहले पानी में भिगो देना चाहिए | जो बीज पानी में तैरने लगे उन बीजों को फेंक देना चाहिए | 

पशुपालन-

थन कटना: थन कटने पर सबसे पहले उसे साफ़ पानी से धोकर उसके उपर एंटीसेप्टिक क्रीम का उपयोग करना चाहिए | अगर क्रीम नहीं हो तो पोटाश के पानी से धोकर फिटकिरी पीस कर लगाना चाहिए | जाड़े के मौसम में दूध दोहने के पहले थन को गर्म पानी से धोना चाहिए और दोहने के उपरान्त नारियल तेल या सरसों तेल लगाना चाहिए |

English Summary: What will the farmer brother do in the month of March

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