Success Stories

बेरोज़गारी का इलाज- मशरुम की खेती

आज हर युवा नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है. नौकरी न मिल पाने के कारण लाखों लोग बेरोज़गार घूम रहे हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर के एक युवा ने नौकरी छोड़ मशरुम की खेती करने की ठानी.

जिला शाहजहांपुर के गांव नाहिल के निवासी सुमित शुक्ला कृषि से स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद एक एम.एन.सी ग्रुप 'पैस्टीसाइट्स' में नौकरी करने लगे. कुछ महीनों के बाद उनका नौकरी में मन न लगने के कारण उन्होंने कुछ अलग करने की सोची. सुमित मशरुम की खेती के बारे में जानकारी लेने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, नियामतपुर गये. वहां उन्हें प्रशिक्षण लेने के लिए कहा गया. सुमित ने प्रशिक्षण प्राप्त कर एक छोटे से कमरे से मशरुम की खेती शुरु की. शुरु में उन्होंने आयस्टर मशरुम की खेती की. उसके बाद बाजार में बटन मशरुम की खेती की. आयस्टर मशरुम की डिमांड देखते हुए उन्होनें आयस्टर मशरुम के साथ बहन मशरुम भी उगाना शुरु कर दिया. बटन मशरुम के लिए कंपोस्ट बनाने में थोड़ा समय लगता है तथा इसके लिए आयस्टर मशरुम से ज्यादा सावधानी रखी जाती है. सुमित के अनुसार मशरुम उगाकर युवा अपनी बेरोज़गारी दूर कर सकते हैं.

महिलाएं भी घर के काम के अतिरिक्त मशरुम उगाकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकती है.

सुमित तमाम युवाओं को मशरुम उत्पादन की जानकारी देकर रोज़गार से जोड़ चुके है. मशरुम की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. आजकल शादी, पार्टी आदि मौकों पर मशरुम की सब्जी जरुर बनती है.

मशरुम उत्पादन शुरु में छोटी पूंजी से शुरु किया जा सकता है. इसके लिए अधिक जगह की ज़रुरत भी नहीं पड़ती है. बाद में धीरे-धीरे मशरुम के बिज़नेस को बढ़ाया जा सकता है.

आज सुमित ने अपने मशरुम के बिज़नेस को बढ़ा लिया है. एक कमरे से शुरु करके आज वह हर सीज़न में 20 से 25 क्विंटल मशरुम का उत्पादन करते हैं. इसके फलस्वरुप उन्हें बाजार से मशरुम का दाम 150 रुपए प्रति किलो आराम से मिल जाता है. जिससे वह हर सीजन 3 से 4 लाख रुपए की आय करते हैं. सुमित के अनुसार मशरुम के उत्पादन में सीधा दुगना फायदा होता है. वह इस बार मशरुम का उत्पादन और बढ़ाने की सोच रहे है.



Share your comments