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जहां लोगों ने मानी हार वहीं कन्हैयालाल ने पेश की अजब मिशाल...

रेतीली जमीन पर जब किसानी करने से कोई भी कतराता है तो राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले किसान कन्हैयालाल  पंचारिया ने अपनी दिन रात की मेहनत से रेत में आम और चीकू लगाकर एक नई कहानी लिख दी है।

यह इनकी दिन रात की मेहनत का परिणाम है कि आज कोई भी उनके द्वारा आम और चीकू के पेड़ देखकर उनकी तारीफ करने को मजबूर हो जाता है। आप को बता दें कि उनकी आयु 88 साल है। लेकिन उन्होंने अपनी कुछ करने के ख्याल को छोड़ा नहीं बल्कि उसे साकार किया।

बताते हैं कि उनके बागवानी के शौक ने यह काम करने के लिए प्रोत्साहित किया वैसे वह पूजा पाठ करते हैं। उनके पास 15 बीघा जमीन पर जिस पर वह खेती करते हैं इस दौरान वह फल-फूल आदि भी उगाते थे। लेकिन उन्हें उम्मीद के मुताबिक कभी सफलता नहीं मिली फिर भी वह अपने विचार पर अडिग रहकर खेती करते गए। कन्हैयालाल ने साल भर पहले साढ़ तीन लाख रुपए के पेड़ खरीदकर लगाए थे जो कि आज फल दे रहे हैं। इस बीच वह तकरीबन हजार किस्मों के पेड़-पौधे लगाकर बागवानी कर रहे हैं।

शुरुआत में जैसे-जैसे पेड़ उगते और फलते गए वैसे-वैसे उनके अंदर और उम्मीद जगी जिसके कारण वह और अधिक मेहनत करते गए और आज उनका बगीचा इन फलदार पौधे से भरा हुआ है। उनके बगीचे में आम और चीकू के सैकड़ों पेड़ लगे हुए हैं। जिसमें आम,संतरा,चीकू,इमली,नींबू व अमरूद के पौधे शामिल हैं।



English Summary: Kanhaiyalal, where the people defeated, said the strange mishra ...

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