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कभी घर का खर्च भी चलाना मुश्किल था लेकिन आज मटर की खेती से लखपति बन गया यह किसान

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर निवासी किसान सुशील कुमार बिंद ने सफलता की नई इबारत लिखी है। इन्होंने मटर की खेती में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। हालांकि पहले वह परेशानियों का सामना कर रहे थे जिस बीच वह अपने परिवार का खर्च बमुश्किल ही चला सकते थे। लेकिन उनकी सफलता की कहानी की शुरुआत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (वाराणसी) में एक किसान मेले में वैज्ञानिकों से मुलाकात के दौरान हुई। इसके बाद उन्हें पूर्वांचल में एन.ए.आई.पी प्रोजेक्ट से उर्वरक व उन्नत बीज हासिल किए। वह मूल रूप से मिर्जापुर जिले के मरिहान जिले के बाहूती गाँव के रहने वाले हैं।

इस दौरान उन्हें पूरे रकबे में मटर की खेती करने की सलाह दी गई जिसे मानकर सुशील ने भूमि की तैयारी शुरु की। लेकिन इसके लिए उन्होंने खेत की गहरी जुताई की और गोबर की खाद का इस्तेमाल किया साथ सिंचाईं कर खर-पतवारों का नियंत्रण किया। जिसके बाद उन्होंने काशी उदय व काशी नंदिनी किस्मों का इस्तेमाल किया जिनकी बुवाई अक्टूबर माह के अंत में किया। बीज की बुवाई के बाद उसका जमाव काफी जल्द शुरु हो गया। पौधों के संरक्षण के लिए उन्होंने काफी ध्यान दिया और खर-पतवार पर काबू पाया।

एक महीने के अंतराल के बाद मटर में फल आने लगा और दिसंबर माह तक उन्होंने मटर को बेचना भी शुरु कर दिया। बाजार में 25-35 रुपए प्रति किलो तक बेचना शुरु कर दिया। 12000 किलोग्राम मटर की बिक्रीकर उन्होंने लगभग 40,000 रुपए की आमदनी हुई।

जनवरी माह तक उत्पादन और अधिक होने लगा जिससे उन्हें 5-10 रुपए प्रति किलो की दर से 3500 किलोग्राम मटर से 57,500 रुपए की आमदनी हुई। जबकि फरवरी में भाव कम होने से मात्र 1500 किलोग्राम मटर की तोड़ाई कर 10-15 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से 11,250 रुपए की आमदनी प्राप्त की। अंत में 25 किलो बीज के रूप में प्राप्त किया। इस दौरान भी उन्हें 15,000 रुपए की आमदनी हुई।

इस बीच सुशील कुमार बिंद ने 1,23,000 रुपए की आमदनी प्राप्त की। जबकि कुल लागत में उन्होंने मात्र 5000 रुपए बीज में,10,000 रुपए परिवहन, 1000 रुपए सिंचाईं में व 5000 रुपए भूमि की तैयारी व उर्वरक के लिए खर्च की थी। आज वह अन्य किसानों को भी सब्जी की खेती के लिए प्रेरित करते हैं। इस बीच भारतीय सब्जी अनुसंधान केंद्र पूर्वी उत्तर प्रदेश में किसानों को मटर की खेती के लिए अधिक उत्पादन के लिए किस्में विकसित की हैं। काशी उदय 750-900 किलोग्राम मटर का कुल उत्पादन किया जा सकता है जबकि काशी नंदिनी 900 किलोग्राम तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यह किस्में विभिन्न प्रकार के रोगों के लिए प्रतिरोधक है।



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