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सेब की बागवानी कर हरियाणा के किसान कमा रहे है भारी मुनाफा

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश को आर्गेनिक बनाने के सपने से प्रेरणा लेकर एक किसान हरियाणा के अंतिम छोर पर रेतील टिब्बों में असंभव को संभव करते हुए सेब को पैदा कर रहे है. यही नहीं किसान ने एक ऐसी आर्गेनिक दवाई को भी बनाया है. जो फल नहीं देने वाला फलदार पौधा फल पर प्रयोग करने से फल देना शुरू कर देगा.चरखी दादरी जिले के अंतिम छोर पर बसे हुए गांव कान्हड़ा निवासी धर्मेन्द्र श्योरण ने ऐसा करके दिखाया है. जो कि देशभर में किसानों के लिए प्रेरणादायक है. हालांकि किसान को सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली है. फिर भी वह आगे बढते हुए रेगिस्तान में सेब के साथ बादाम, अखरोट, काजू, अंजीर सहित चंदन के पेड़ उगा लगा चुके है. उनको इस कार्य के लिए पीएमओ कार्यालय समेत राज्य सरकार की तरफ से भी कई तरह के पत्र आ चुके है.

कई तरह के उगाते है सेब

किसान धर्मेंद्र के द्वारा आर्गेनिक दवाई को लेकर कृषि विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि देशभर के आईसीआर(ICAR) भी हैरान है, उनका कहना है कि आर्गेनिक दवाई के बारे में उनके पास आईसीएआर के वैज्ञानिकों के भी फोन आ चुके है. किसान की मेहनत और उपलब्धि को देखकर लगता है कि वह दिन दूर नहीं है जब हरियाणा में भी सेब, काजू, बादाम, केशर, अंजीर और पिस्ता की खेती होगी. किसानों के दावारा लगाए गए सेब के पेड़ पर इस गर्मी के मौसम में भी 7 सेब लगे हुए है. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. पिछली साल उनके घर में सेब के कुल 14 पेड़ है जिनमें से कुछ पेड़ काफी छोटे है. उनका कहना है कि अगले साल इन छोटे पेड़ों पर भी फल आ जाएंगे.

सरकार से नहीं मिला कोई सहयोग

रेगिस्तान में सेब को उगाने और दवाई को इजाद करने वाले धर्मेंद्र का दर्द जुबां पर आया. किसान का कहना है  कि हरियाणा की सरकार और वहां के कृषि मंत्री या विभाग की तरफ से कोई भी तरह की सहायता प्राप्त नहीं हुई है. उनका कहना है कि उन्हें कोई भी शिकवा नहीं है वे पीएम मोदी के सपने को  आगे लेकर तेजी से बढ़ रहे है. वे हर मकसद को पूरा कर सकते है. भाजपा विधायक ने कहा कि किसान ने मेहनत करके असंभव को  संभव करके दिखाया है. सरकार ऐसे किसानों को हर तरह की संभव मदद देगी ताकि किसान खेती के विविधीकरण को अपनाकर नये तरीके से आयाम को स्थापित कर सकें.



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