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विश्व जल दिवस मंथन : 2070 में ख़त्म हो जाएगा जल

हमारा शरीर पांच मुख्य तत्वों से मिलकर बना है. आकाश, मृदा,वायु, अग्नि और जल.  हमारे शरीर के लिए पाँचों तत्व बहुत अहम है. लेकिन वायु और जल दो ऐसे तत्व है जिनके बिना एक इन्सान नहीं रह सकता है. क्योंकि एक इन्सान पानी और सांस के बिना नहीं रह सकता है. यह पता होते हुए भी हम अपने पैरों पर स्वयं कुल्हाड़ी मार रहे हैं अपने साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों का जीवन शुरू होने से पहले ही खत्म कर रहे हैं. कारण है कि जिस जल की हमें भविष्य में भारी मात्रा में आवश्यकता पड़ने वाली है. उसको हम स्वयं ही बर्बाद कर रहे हैं. विश्वभर में 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जा रहा है. यदि हम पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड उठाकर देख ले तो साफ़-साफ़ पता लग जायेगा की इस एक दशक में जलस्तर कितना निचे आया है. इसका कारण है मानव जाती द्वारा जल की बर्बादी.

यह सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की समस्या है. भारत में इस समय पीने योग्य जल का स्तर बहुत घटा है. जिससे की गर्मियों के दिनों सिर्फ शहरों में ही नहीं बल्कि गाँव में भी पीने के पानी और सिंचाई के पानी समस्या हुई है. पिछली बार महाराष्ट्र राज्य में किसानों को सिंचाई के पानी की सबसे अधिक समस्या हुयी थी. भविष्य में इस समस्या से निपटने के लिए योजनाए तैयार की जा सके इसके लिए निजी क्ष्टर की कंपनिया और सरकारी तंत्र एक साथ मिलकर नीतियाँ बनाने पर काम कर रहे हैं. इसी का मंथन करने के लिए इंडिया हैबिटैट सेंटर में फिक्की, एग्रोकेमिकल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया और निजी क्षेत्र की धानुका, क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, विलोवुड, पारिजात जैसी कृषि रसायन कंपनियों ने एक साथ मिलकर विश्व जल दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से इस बात पर मंथन किया गया कि कृषि सिंचाई में बर्बाद होने वाले को किस तरीके से सदुपयोग में लाया जा सकता है.

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य वक्ता पैनल आर.जी. अग्रवाल, ग्रुप चेयरमैन धानुका एग्रीटेक, राम अर्जुन मेघवाल, केन्द्रीय राज्य मंत्री, जल संरक्षण एवं नदी विकास, भारत सरकार, डॉ.आर.बी. सिंह, वाईस चांसलर, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, विपिन सैनी, डिप्टी डायरेक्टर, एसीएफआई डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पर जीतेन्द्र कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारम्भ किया. इसके बाद शुरूआती भाषण देते हुए आरजी अग्रवाल ने महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे का उदहारण देते हुए कहा कि एक बार अब्दुल कलम साहब ने कहा था कि 2070 आते-आते पानी की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी. पानी के लिए विश्व भर में जलसंकट होगा.यह जिक्र करते हुए आर.जी. अग्रवाल ने पानी की महत्ता पर प्रकाश डाल. उन्होंने कृषि सिंचाई में बर्बाद होने वाले पानी को बचाने के की कोशिश के विषय में बताया कि किस तरीके से पानी को बचाया सही इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इसके बाद केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कार्यक्रम उदहारण देते हुए कहा कि हम हर जगह पानी की बर्बादी कर रहे हैं. फिर चाहे शहर में रहने वाले लोगो हो या गाँव में रहने वाले हर कोई पानी की बर्बादी कर रहा है. अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एक इन्सान जो सेविंग बनाता  है वो सेविंग करते-करते नल को खुला छोड़ देते हैं. जिसके चलते कई लीटर पानी ख़राब जाता है. इसलिए जल के सही इस्तेमाल को सीखिए फिर चाहे दैनिक जीवन में जल का इस्तेमाल करें या फिर सिंचाई के लिए.

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.बी. सिंह ने इस क्षेत्र में अपने 20 साल अनुभव को सबके साथ साझा किया. इसके बाद उन्होंने विश्व स्तर पर जलस्तर को बचाने के लिए हो रहे कार्यों पर चर्चा की. इसके बाद एसीएफआई के डिप्टी डायरेक्टर विपिन सैनी ने जल की महत्ता को बताते हुए इस परिचर्चा को अंतिम चरण में ले गए और सभी का धन्यवाद किया. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि नितिन गडकरी, केन्द्रीय मंत्री, जल संरक्षण एवं नदी विकास, भारत सरकार ने कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश किया. उन्होंने शुरुआत में ही जल संरक्षण पर बात करते हुए कहा कि देश में जल की कोई कमी नही है बशर्ते की उसका सही इस्तेमाल किया जाए. उन्होंने कहा कि हम जिस पानी को बर्बाद करते हैं उसका 60 प्रतिशत जल समुन्द्र में चला जाता है बाकी है इधर-उधर चला जाता है यदि हम इस पानी को बचा ले तो यह आने वाली समस्या से निपटने के लिए काफी है. उन्होंने पानी को संरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के विषय में भी बताया. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार कई पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जिससे कि पानी को बचाया जा सके. उन्होंने कहा कि जो सीवेज का पानी है सरकार उसको शुद्ध करने के लिए प्रोजेक्ट पर काम कर रही है.

 इस पानी को शुद्ध करने के बाद उद्योग, बिजली बनाने और रेल की धुलाई आदि में इस्तेमाल किया जायेगा. ताकि जो पानी इस समय इन कामों में इस्तेमाल हो रहा है उसको बचाया जा सके . इसी के साथ उन्होंने खेती में पानी की महत्ता के विषय में बताया. उनके भाषण के पश्चात क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के डायरेक्टर एन.के. अग्रवाल ने केन्द्रीय मंत्री का धन्यवाद करते हुए जल की महत्ता के विषय में बताया. इसके बाद विशेषज्ञों द्वारा जल संरक्षण हेतु तकनीकों के विषय में किसानों को जानकारी दी गई. साथ ही साथ प्रगतिशील किसानों द्वारा जल के सही उपयोग के विषय में भी बताया गया.

इस कार्यक्रम में  कृषि सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले जल के विषय पर मुख्य रूप से चर्चा की गई. कृषि सिंचाई में लगभग 50 प्रतिशत पानी बर्बाद होता है. तकनीक के माध्यम से कैसे इस पानी का सदुपयोग किया जा सके. यह इस कार्यक्रम में चर्चा का मुख्य विषय रहा. कार्यक्रम में इसी समस्या का समाधान खोजने की कोशिश की गई. क्योंकि यह भविष्य में होने वाली एक बड़ी समस्या है. जिसका समाधान अभी खोजना आवश्यक है. बूँद सिंचाई और पाइपलाइन द्वारा खेतों की सिंचाई पर भी चर्चा की गई. पाइपलाइन के जरिए पानी को काफी हद तक बर्बादी से रोका जा सकता है. वहीँ बूँद सिंचाई के माध्यम से किसानों सिंचाई में बर्बाद होने वाले जल को पूरी तरह से बचाया जा सकता है. इस तरीके के कार्यक्रम में ऐसी समस्याओं का मंथन होना आवश्यक है.



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