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हजार किमी जंगली भैंसों का भ्रमण, जीवन के लिए क्यों जरूरी है गमन

इस वर्ष मानसून खत्म होते ही, असम के मानस नेशनल पार्क(MNP) में रहने वाली पांच जंगली भैसें अपने जीवन की सबसे लंबी यात्रा करेंगी. यह यात्रा असम के मानस नेशनल पार्क से शुरू होते हुए छत्तीसगढ़ के उदंती वन्यजीव अभयारण्य(USTR)तक पहुंचेगी. जो कि करीब 1,500 किमी तक है. उनके द्वारा की जाने वाली यह यात्रा कोई साधारण यात्रा नहीं होगी.

गौरतलब है कि भैंसों की इस यात्रा पर ही छत्तीसगढ़ राज्य के पशुओं का भविष्य निर्भर होगा. क्योंकि छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु यानि कि जंगली भैंसा अब विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गया है. इस बारे में बताते हुए भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट के एक अधिकारी ने कहा है कि "भैसों में नर और मादा की जनसंख्या व्यवहारिक नहीं है और हमें ज्यादा मादा भैंसों की जरूरत है. इसलिए हमने देश में सभी जंगली भैसों की आबादी का आनुवंशिक अध्ययन किया है. इस रिसर्च से पता लगा है कि मध्य भारतीय और उत्तर पूर्वी जंगली भैंसों का आनुवंशिक प्रकृति बाकि जीवों से थोड़ी अलग है. इसलिए केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार ने भी कहा है कि वे 40 हिरन असम भेजकर इसका बदला पूरा करेगी.

जंगली भैंस का औसतन वजन 2,000 किलो होता हैं. ऐसे में इतनी दूर का सफर अपने आप में एक बड़ी चुनौती है. यहां तक कि गेंडे और हाथियों को ट्रांसपोर्ट करने से भी ज्यादा मुश्किल है, जंगली भैसों को इतने लम्बे सफर पर ले जाना. यह पहली बार होगा जब  एक वन्य अभ्यारण से दूसरे अभ्यारण तक ऐसे जानवरों का स्थानांतरण किया जाएगा.

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