News

पंतनगर की सोयाबीन की तीन किस्में केन्द्रीय समिति द्वारा जारी

पंतनगर विश्विद्यालय के कृषि महाविद्यालय में चल रही अखिल भारतीय सोयाबीन समन्वित परियोजना के वैज्ञानिकों द्वारा सोयाबीन की एक और उन्नत किस्म, पन्त सोयाबीन 24, विकसित की गयी है, जिसे केन्द्रीय किस्म विमोचन समिति की 77वीं वैठक में उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रां के लिए अनुमोदित किया गया है। यह किस्म जे.एस. 335 व पी.एस. 1024 के संकरण से वंशावली विधि द्वारा विकसित की गयी है तथा सोयाबीन की अन्य प्रचलित किस्मों से गुणात्मक लक्षणों में भिन्न है। इस किस्म के विकास हेतु महत्वपूर्ण गुणों के समायोजन के लिए जे.एस. 335, जो मध्य भारत की एक लैंडमार्क किस्म के साथ-साथ किसानों द्वारा व्यापक रूप से स्वीकार्य महत्वपूर्ण किस्म है, तथा पी. एस. 1024, जो पतली नुकीली पत्तियों वाली एवं पीला विषाणु रोग के लिए रोधी किस्म है, का संकरण किया गया है। पन्त सोयाबीन 24 के पौधे सुदृढ़ मजबूत एवं फलियां से लदे रहने पर भी झुकते नहीं है और इसकी फलियां चटकती भी नही है। इस किस्म में फूल बैंगनी, रोएं कत्थई, पत्तियां साधारण, दाना पीला व चमकीला तथा नाभिका गेरूई रंग की होती है। यह किस्म पीला विषाणु व जीवाणु स्फोट रोग के लिए रोधी तथा झुलसा रोग के लिए मध्यम रोधी है। इसमें प्रोटीन एवं तेल की मात्रा क्रमशः लगभग 40 एवं 20 प्रतिशत है तथा इसके 100 दानों का भार 10-11 ग्राम है। यह किस्म 113-120 दिन में पक कर तैयार होती है तथा इसकी उत्पादन क्षमता 30-35 कु. प्रति है. है। 

सोयाबीन प्रजनक डा. पुष्पेन्द्र के अनुसार उत्तर भारत में व्याप्त पीला विषाणु रोग के निरन्तर बढ़ रहे प्रकोप से सोयाबीन का क्षेत्रफल प्रभावित हो रहा है। यह किस्म पीला विषाणु रोग के प्रति रोधिता व अधिक उत्पादन क्षमता के साथ-साथ पीले चमकदार दाने एवं 113-120 दिन में परिपक्वता जैसे गुणों के कारण उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण किस्म के रूप साबित होगी। 

पंतनगर विश्विद्यालय से विकसित दो अन्य किस्में, पन्त सोयाबीन 21 व पन्त सोयाबीन 23, जो उत्तराखण्ड राज्य किस्म विमोचन समिति द्वारा वर्ष 2015 में उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेष के लिए जारी की गयी थीं, को भी केन्द्रीय किस्म विमोचन समिति की 77 वीं बैठक में सामान्य उत्पादन के लिए अनुमोदित किया गया है। इन तीनां किस्मों के नाभिकीय बीज का उत्पादन पंतनगर विश्विद्यालय के एन.ई.बी. फसल अनसंधान केन्द्र व प्रजनक बीज उत्पादन केन्द्र द्वारा किया जा रहा है, जिससे इन किस्मों के उन्नत बीज तैयार कर किसानों को जल्द से जल्द उपलब्ध कराये जा सकें। 

सोयाबीन की उन्नतषील किस्मों के विकास में पंतनगर कृषि विश्विद्यालय की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहां से अब तक सोयाबीन की 23 किस्में विकसित की गयी है जो देष व प्रदेष के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों द्वारा सफलतापूर्वक उगायी जा रही हैं। यहां से विकसित किस्म अधिक उत्पादन क्षमता के साथ-साथ पीला विषाणु रोग रोधिता के लिए जानी जाती हैं। इसी वर्ष सम्पन हुई अखिल भारतीय सोयाबीन समन्वित परियोजना की 47 वीं वार्षिक कार्यषाला में पंतनगर विश्विद्यालय में चल रहे सोयाबीन अनुसंधान एवं किस्म विकास कार्यक्रम की उपलब्धियों एवं योगदान के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पंतनगर केन्द्र को सम्मानित किया गया है। 

पंतनगर कृषि विश्विद्यालय के कुलपति, डा. जे. कुमार; निदेशक शोध, डा. एस. एन. तिवारी; अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, डा. एन. एस. मूर्ति, व पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष, डा. एच.एस. चावला, ने सोयाबीन परियोजना के सभी वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को इस महत्वपूर्ण योगदान पर बधाई दी एवं इन किस्मों के प्रजनक बीज उत्पादन एवं संवर्धन पर विषेष बल देते हुए इन किस्मों के अधिक से अधिक बीज उत्पादित कर सम्बन्धित क्षेत्रां के किसानों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।



English Summary: Three varieties of soyabeen of Pantnagar released by the Central Committee

Share your comments


Subscribe to newsletter

Sign up with your email to get updates about the most important stories directly into your inbox

Just in