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जई की यह नई किस्म बिजाई के लिए अनुमोदित

 

हिसार। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई जई की एक उन्नत किस्म सैंट्रल ओट्स ओएस 424 की खेती के लिए पहचान की गई है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि उत्पादन तथा पोषण की दृष्टि से ये एक बेहतर किस्म है। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की फसल किस्म पहचान कमेटी ने जई की नई सैंट्रल ओट्स ओएस 424 किस्म की हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा उत्तराखंड में बिजाई के लिए अनुमोदन के लिए पहचान की है। कुलपति ने बताया कि जई की उपरोक्त किस्म एक कटाई तथा सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए बहुत उपयुक्त किस्म है। उनके अनुसार नई किस्म सैंट्रल ओट्स ओ एस 424 की हरा चारा की पैदावार 296 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है जोकि जई की राष्ट्रीय चैक किस्म कैन्ट (256 क्विंटल प्रति हैक्टेयर) से 15.8 प्रतिशत तथा ओ एस 6 किस्म (256.4 क्विंटल प्रति हैक्टेयर) से 15.6 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार ओ एस 424 किस्म की सूखा चारा की पैदावार 65.1 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है जोकि राष्ट्रीय चैक किस्म कैन्ट (55.3 क्विंटल प्रति हैक्टेयर) तथा ओ एस 6 किस्म (55.9 क्विंटल प्रति हैक्टेयर) से क्रमश: 17.6 प्रतिशत व 16.4 प्रतिशत अधिक है।

प्रो. सिंह ने बताया कि पौष्टिकता की दृष्टि से भी यह बेहतर किस्म  है। इसमें अपक्व प्रोटीन 9 प्रतिशत है तथा इसमें प्रति हैक्टेयर 13.5 क्विंटल तक बीज उत्पादन की क्षमता है। विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सेठी ने बताया कि विश्वविद्यालय में जई की अब तक कुल 9 किस्में विकसित की जा चुकी हैं। इनमें से जई की ओ एस 6 किस्म की पूरे देश में जबकि ओ एस 346 तथा ओ एस 377  किस्मों की सैंट्रल जोन में खेती की जा रही है।

इन वैज्ञानिकों ने विकसित की जई की ओ एस 424 किस्म

यहां उल्लेखनीय है कि जई की ओ एस 424 किस्म विश्वविद्यालय के चारा अनुभाग के वैज्ञानिकों डॉ. आर.एन.अरोड़ा,  डॉ. डी.एस. फोगाट,  डॉ. योगेश जिन्दल तथा डॉ. एन. के. ठकराल द्वारा विकसित की गई है। इस किस्म के विकास में डॉ. आर.एस. श्योराण,  डॉ. अनिल गुप्ता तथा डॉ. यू.एन. जोशी का भी बहुतायत सहयोग रहा है।

चारा वैज्ञानिक हुए सम्मानित

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के चारा अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. एन. के. ठकराल ने बताया कि यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसिज़, बैंगलुरु में चारा फसलों एवं उपयोग पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की हुई राष्ट्रीय समूह बैठक जिसमें जई की उपरोक्त किस्म की पहचान की गई है, में चारा संसाधन विकास में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के चारा अनुभाग के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के दृष्टिगत वैज्ञानिकों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।



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