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स्वराज ट्रैक्टर्स और महिंद्रा सस्टेन ने शुरू किया पंजाब के सबसे बड़े ग्रुप कैप्टिव में से एक सोलर प्रोजेक्ट्स

महिंद्रा स्वराज ट्रैक्टर्स और महिंद्रा सस्टेन ने पंजाब के बठिंडा में 42 MWp ग्रुप कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया है. इससे स्वराज की करीब 50% बिजली जरूरत पूरी होगी. परियोजना सालाना 6.15 करोड़ यूनिट हरित ऊर्जा बनाएगी, 42,000 टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन घटाएगी और पानी की भी बचत करेगी.

KJ Staff

महिंद्रा ग्रुप की कंपनी स्वराज ट्रैक्टर्स और ग्रुप के रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म व स्वतंत्र बिजली उत्पादक महिंद्रा सस्टेन ने आज बठिंडा, पंजाब में 42 मेगावाट पीक (MWp) के ग्रुप कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट की शुरुआत की घोषणा की. यह राज्य के अपनी तरह के सबसे बड़े ग्रुप कैप्टिव सोलर इंस्टॉलेशन में से एक है.

इस प्रोजेक्ट से स्वराज ट्रैक्टर्स की फैक्ट्रियों की करीब 50% बिजली जरूरत पूरी होने की उम्मीद है. कंपनी की जो व्यापक रणनीति भविष्य के लिए तैयार और कम कार्बन वाला मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने की है, यह उसका बड़ा पड़ाव है. यह रणनीति महिंद्रा ग्रुप की सस्टेनेबिलिटी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है.

महिंद्रा सस्टेन ने इस 42 MWp सोलर प्रोजेक्ट को विकसित किया है और चालू किया है. यह मोहाली, पंजाब स्थित स्वराज ट्रैक्टर्स के मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और फाउंड्री ऑपरेशंस को रिन्यूएबल बिजली देगा. करीब 141 एकड़ में फैले इस इंस्टॉलेशन में फिक्स्ड टिल्ट स्ट्रक्चर पर लगे हाई एफिशिएंसी एन-टाइप टॉपकॉन बाइफेशियल सोलर मॉड्यूल्स लगाए गए हैं. प्रोजेक्ट की शेष क्षमता से पंजाब में मौजूद महिंद्रा ग्रुप की दूसरी इकाइयों की बिजली खपत को ग्रीन बनाने का प्रस्ताव है.

महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के स्वराज डिवीजन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर गगनजोत सिंह ने इस मौके पर कहा, "करीब आधी सदी पहले स्वराज की नींव आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर रखी गई थी. आज जब भारत फॉसिल फ्यूल पर अपनी निर्भरता घटा रहा है और अपने लोगों के लिए हरित पर्यावरण की ओर बढ़ रहा है, स्वराज को दोहरी रणनीति के जरिए इसमें योगदान देने पर गर्व है. एक, ऊर्जा की खपत कम करना और दूसरा, पारंपरिक स्रोतों की जगह धीरे-धीरे रिन्यूएबल एनर्जी लाना. इस साल की शुरुआत में स्वराज को एनर्जी एफिशिएंसी के लिए गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड मिला था. अब हम अपनी आधी से ज्यादा ऊर्जा जरूरत रिन्यूएबल स्रोतों से पूरी करके अपनी एनर्जी एफिशिएंसी की पहलों को और आगे ले जा रहे हैं. यह महिंद्रा सस्टेन के साथ साझेदारी से संभव हुआ है, जिसने बठिंडा, पंजाब में यह अत्याधुनिक सोलर प्रोजेक्ट तैयार किया है. यह प्रोजेक्ट हमारी ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है, महिंद्रा ग्रुप की 'प्लैनेट पॉजिटिव' बनने की महत्वाकांक्षा में योगदान देता है और हमारे विजन 'टुगेदर वी राइज फॉर ए मोर इक्वल, मोर सस्टेनेबल वर्ल्ड' को आगे बढ़ाता है.“

स्वराज की सस्टेनेबिलिटी यात्रा सिर्फ रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने तक सीमित नहीं है. 2023 में स्वराज के सभी ट्रैक्टर प्लांट ने ऊर्जा उत्पादकता दोगुनी करने के लिए ईपी100 सर्टिफिकेशन हासिल किया, जो महिंद्रा ग्रुप की तय समय सीमा से सात साल पहले था.

इस साझेदारी पर महिंद्रा सस्टेन के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अविनाश राव ने कहा, "रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ने और सस्टेनेबिलिटी के एजेंडे को आगे ले जाने में स्वराज ट्रैक्टर्स के साथ साझेदारी करते हुए हमें गर्व है. इस प्रोजेक्ट के साथ महिंद्रा सस्टेन ने ग्रुप कैप्टिव ढांचे के जरिए मजबूत वित्तीय साख वाले कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों को बिजली देने के क्षेत्र में पहली बार कदम रखा है, जो सरकारी बिजली कंपनियों को बिजली देने के हमारे पारंपरिक मॉडल के साथ-साथ चलता है. शुरुआत के समय यह पंजाब के सबसे बड़े ग्रुप कैप्टिव सोलर इंस्टॉलेशन में से एक है और इससे हर साल 42,000 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है."

महिंद्रा सस्टेन महिंद्रा ग्रुप का रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म और एक प्रमुख इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर यानी स्वतंत्र बिजली उत्पादक है. चालू और निर्माणाधीन रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के मजबूत पोर्टफोलियो तथा आगे विकसित होने वाले प्रोजेक्ट्स की महत्वाकांक्षी शृंखला के साथ महिंद्रा सस्टेन स्वच्छ ऊर्जा की ओर भारत के बढ़ते कदमों में मदद कर रहा है.

कंपनी की क्षमताएं सिर्फ सौर ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं. ये हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तक फैली हैं, जिनसे रिन्यूएबल एनर्जी को भरोसेमंद, लचीले और भविष्य के लिए तैयार ढंग से जोड़ा जा सकता है. महिंद्रा सस्टेन 'सस्टेनेबल एनर्जी इंफ्रा ट्रस्ट' का सह प्रायोजक भी है, जो एनएसई पर सूचीबद्ध रिन्यूएबल एनर्जी केंद्रित इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट है.

स्वराज महिंद्रा ग्रुप के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के उस लक्ष्य में अहम योगदान दे रहा है, जिसके तहत इस दशक में राजस्व तीन गुना करना है. साथ ही कंपनी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि प्रदर्शन, लोग और धरती, तीनों साथ-साथ आगे बढ़ें.

हाल के वर्षों की मजबूत वृद्धि के साथ स्वराज ने लोगों के विकास, विविधता और समावेश तथा समुदायों को सशक्त बनाने में निवेश जारी रखा है. फरवरी 2026 में स्वराज को ग्रामीण समुदायों को मजबूत करने और भारत के गांवों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने की लगातार प्रतिबद्धता के लिए सीएसआर एक्सीलेंस का गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड मिला.

स्वराज के सभी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट वाटर पॉजिटिव हैं और 'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' सुविधा के रूप में प्रमाणित हैं. स्वराज की फाउंड्री देश की पहली फाउंड्री थी, जिसे 'जीरो वेस्ट टू लैंडफिल' सर्टिफिकेशन मिला. आगे की योजना के तहत कंपनी उत्पाद से जुड़े स्कोप 3 उत्सर्जन को घटाने, सप्लायर डीकार्बोनाइजेशन में तेजी लाने, ईएसजी क्षमताएं बनाने, ग्रीन डीलरशिप कार्यक्रमों का विस्तार करने और अपने कामकाज में विविधता मजबूत करने पर ध्यान दे रही है.

महिंद्रा ग्रुप को सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में अगुवाई के लिए कई सम्मान मिले हैं और इसे उन अग्रणी भारतीय कंपनियों में गिना जाता है, जिन्होंने रणनीति, रिपोर्टिंग, डिस्क्लोजर और अमल, हर स्तर पर जलवायु से जुड़े कदमों और ईएसजी सिद्धांतों को शामिल किया है. जिम्मेदार विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के जरिए ग्रुप अपने हितधारकों के लिए लंबी अवधि का मूल्य बनाता आ रहा है.

मुख्य प्रोजेक्ट तथ्य

  • यह सोलर फैसिलिटी बठिंडा जिले की तलवंडी साबो तहसील के गांव तेओना पुजारियां में करीब 141 एकड़ में विकसित की गई है.

  • प्रोजेक्ट में फिक्स्ड टिल्ट स्ट्रक्चर पर लगे हाई एफिशिएंसी एन-टाइप टॉपकॉन बाइफेशियल सोलर मॉड्यूल्स लगाए गए हैं. यह तकनीक इसलिए चुनी गई ताकि उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल करते हुए ज्यादा बिजली बनाई जा सके.

  • इस फैसिलिटी से हर साल करीब 15 करोड़ यूनिट रिन्यूएबल बिजली बनने की उम्मीद है, जिससे सालाना 42,000 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा.

  • प्रोजेक्ट घरेलू खरीद के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता भी दिखाता है. इसके 97% से अधिक कंपोनेंट भारत से ही लिए गए हैं, जिससे देश के रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और आत्मनिर्भर विकास के व्यापक लक्ष्य को बल मिलता है.

  • सोलर मॉड्यूल्स की सफाई के लिए सेमी ऑटोमेटेड रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल होगा, जिससे हर साल करीब 2 लाख लीटर पानी बचेगा.

  • प्रोजेक्ट के विकास के दौरान पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव का आकलन तथा जलवायु परिवर्तन आकलन कराया गया. कचरा प्रबंधन, वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण और आसपास की पारिस्थितिकी को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए भी कदम उठाए गए हैं.

English Summary: Swaraj Tractors and Mahindra Susten Commission One of Punjab’s Largest Group Captive Solar Projects Published on: 02 September 2026, 03:59 PM IST

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