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सूंडाराम वर्मा और हिम्मताराम भांभू समेत कृषि क्षेत्र की इन हस्तियों को मिलेगा पद्म श्री पुरस्कार

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हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म श्री पुरस्कार की घोषणा की जाती है. ये पुरस्कार सभी क्षेत्रों में अनोखे और विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाता है. कृषि प्रधान राष्ट्र होने के नाते, यह गर्व और सम्मान की बात है कि हर साल, कई किसानों को कृषि के क्षेत्र में उनके असाधारण कार्यों के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलता है. हर साल की तरह, इस साल भी कई किसानों को पद्म श्री प्राप्त करने का सौभाग्य मिलेगा. ऐसे में आइए जानते है उन किसानों के बारे में जिन्हें पद्म श्री पुरस्कार 2020 के लिए चुना गया है.

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सूंडाराम वर्मा (Sundaram Verma)

सूंडाराम वर्मा ने सिंचाई की अनूठी तकनीक खोजी है जिससे कम पानी में आसानी से सिंचाई कर सकेंगे. इस कम पानी वाली तकनीक से सूंडाराम वर्मा अब तक लगभग 50 हजार पेड़ लगा चुके हैं जिसमें प्रति पेड़ को केवल एक लीटर पानी की आवश्यकता होती है. राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्र में, सूंडाराम की तकनीक किसानों के लिए बहुत मददगार साबित हो रही है. उनकी तकनीक को तब लोगों ने नोटिस किया, जब उन्होंने पानी की बचत करने वाली तकनीक से ड्राईलैंड एग्रोफ़ोरेस्ट्री नामक 50,000 पेड़ उगाने में कामयाबी हासिल की. राजस्थान के सीकर जिले के दांता तहसील के रहने वाले सूंडाराम वर्मा ने कृषि के क्षेत्र में क्रांति पैदा की है, जिसके लिए उन्हें सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

हिम्मताराम भांभू (Himmataram Bhambhu) 

हिम्मताराम भांभू, पिछले 25 वर्षों से रोपण और संरक्षण कर रहे हैं. वह नागपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, सीकर, अजमेर जैसे जिलों में प्रकृति संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं. वह 2013 से ग्रीन इंडिया मिशन के लिए महावीर इंटरनेशनल संस्था नागपुर से भी जुड़े हुए हैं. पर्यावरण के प्रति उनके प्रयासों के लिए उन्हें व्यापक रूप से सराहना मिली है. अब उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

चिंटाला वेंकट रेड्डी (Chintala Venkat Reddy)

वेंकट रेड्डी का जन्म अलवाल के एक किसान परिवार में हुआ था. वो किशोरावस्था के बाद से ही कृषि को लेकर उत्सुक थे. अपनी कॉलेज की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने खेती में प्रवेश किया. जहाँ उन्होंने गेहूं, धान, मक्का, बाजरा, मोती बाजरा, गन्ना, सब्जियाँ और अन्य विभिन्न प्रकार के बीजों को सफलतापूर्वक बोने के बाद, चिंटला राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) के साथ-साथ आंध्र प्रदेश राज्य बीज विकास निगम में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बन गए. उनके पास किशनारा में कुंदनपल्ली में एक अंगूर का खेत है और अलवाल में एक कृषि अनुसंधान फार्म है, जहां वह चावल, गेहूं, काले अंगूर और सब्जियों की खेती करते हैं.

वो अंगूर किसानों को रोग, कीट, मृदा स्वास्थ्य, खेती का प्रशिक्षण और फसल प्रबंधन की जानकारी देने के अलावा ड्रिप सिंचाई आदि के बेहतर प्रबंधन के लिए सलाह भी देते हैं. गौरतलब है कि चिंटाला वेंकट रेड्डी ने प्रौद्योगिकी के लिए 60 से अधिक देशों में पेटेंट के लिए आवेदन किया है और भारत, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, यूरेशिया, मेडागास्कर, मैक्सिको, फिलीपींस, वियतनाम, रोमानिया, नाइजीरिया से पेटेंट प्राप्त किया है. इसके अलावा, उन्होंने 1999 और 2001 में राज्य पुरस्कार, 2006 में उत्तम रायतु पुरस्कार सहित कई पुरस्कार जीते हैं.

उक्त किसानों के अलावा भी कई और किसान हैं जिनका नाम पद्म श्री पुरस्कार के लिए घोषित किया गया है. तो आइए जानते हैं पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अन्य किसानों के नाम -

  • पोपटराव पवार (Popatrao Pawar)

  • राधा मोहन और साबरमती (Radha Mohan and Sabarmatee)

  • बतकृष्णा साहू (Batakrushna Sahoo)

  • कुशाल कोंवर शर्मा (Kushal Konwar Sharma)

  • त्रिनिति साईऊ (Trinity Saioo)

  • रहिबाई सोम पोपेरे (Rahibai Soma Popere)

पद्म श्री या पद्मश्री, भारत सरकार द्वारा आमतौर पर सिर्फ भारतीय नागरिकों को दिया जाने वाला सम्मान है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि, कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में उनके विशिष्ट योगदान को मान्यता प्रदान करने के लिए दिया जाता है. भारत के नागरिक पुरस्कारों के पदानुक्रम में यह चौथा पुरस्कार है इससे पहले क्रमश: भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण का स्थान है.



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