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फसल के अनुसार करें उपकरण का चुनाव...

कृषि से बेहतर उत्पादन लेने के लिए उचित मशीनीकरण भी आवश्क है। ऐसे में किसानों को क्षेत्रफल के हिसाब से मशीनीकरण और प्रौद्दोगिकी का प्रयोग करना चाहिए। आज के समय में कस्टम हायरिंग से मशीनरी या उपकरण प्राप्त कर सकते हैं। भारत सरकार द्वारा मशीनरी और आधुनिक उपकरणों को प्राप्त कर सकते हैं। किसान भाइयों  ज्ञात हो कि आपको अपने कृषि विज्ञान केंद्रों राज्य कृषि विश्वविद्दालयों से मशीनरी के रख-रखाव के साथ-साथ ट्रेनिंग भी दी जाती है। साथ ही किसान भाइयों कृषि यंत्रीकरण के लिए यंत्रों एवं उपकरणों की खरीद पर आपको भारत सरकार द्वारा एसएमएएम के अनतर्गत लागत मानक सहायता भी प्रदान की जा रही है।

कृषि को बेहतर ढंग से प्रबंधन के लिए आपको आवश्यकतानुसार उपकरण का चयन कर सकते हैं। जैसे आपकी खेती के क्षेत्रफल के अनुसार उपकरणों को चयनित करें।

ट्रैक्टर- ट्रैक्टर के विषय के लिए एक प्रश्न खड़ा होता है कि क्या ट्रैक्टर सभी किसानों के लिए आवश्यक है। इसका सही जवाब है कि किसानों को अपनी भूमि के प्रकार के अनुसार ही किसानों को ट्रैक्टर की खरीद करनी चाहिए। लेकिन कुछ किसान ट्रैक्टर खरीदकर कस्टम हायरिंग( किराए पर काम उठाना) चाहते हैं, ऐसे किसान ट्रैक्टर की खरीद के लिए अनुदान भी प्राप्त कर सकते हैं। ट्रैक्टर की क्षमता अनुसार अनुदान दिया जाता है। 8 से 20 हॉर्सपॉवर के ट्रैक्टर के लिए अनुसूचित जनजाति व सीमांत एवं महिला किसानों के लिए 35 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। तो वहीं 20 से 70 हॉर्सपॉवर के ट्रैक्टर के लिए 1,25,000 रुपए तक का अनुदान दिया जाता है। जबकि अन्य लाभार्थियों के लिए मात्र 25 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है।

पावर टिलर- पावर टिलर 8 बीएचपी से कम व 8 बीएचपी से अधिक के लिए 50 प्रतिशत का अनुदान मिलता है। इसमें भी किसान को सीमांत किसान व अनुसूचित जनजाति के लिए अलग-अलग वर्गीकृत कर अनुदान दिया जाता है।

राइस ट्रांसप्लांटर- स्वाचालित राइस ट्रांसप्लांटर( पंक्तियों के अनुसार) के लिए 50 प्रतिशत तक की सहायता की जाती है। जबकि 4 से अधिक पंक्तियों वाले राइस ट्रांसप्लांटर के लिए 40 प्रतिशत का अनुदान प्राप्त किया जा सकता है। अनुदान के लिए इसमें भी किसानों को वर्गीकृत किया जाता है।

रीपर, डिगर, अन्य प्लांटर- इन उपकरणों के लिए 63,000 रुपए तक की अधिकतम अनुदान प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही किसानों को इसके लिए भी अलग-अलग श्रेणी में वर्गीकृत कर अनुदान दिया जाता है।

बागवानी वाले खेती उपकरणों के लिए भी सरकार द्वारा सहायता प्रदान किया जाता है।

फ्रूट , ट्री प्रूनर, फ्रूट हार्वेस्टर, फ्रूट हार्वेस्टर, फ्रूट ग्रेडर, नर्सरी मीडिया फिलिंग अधिकतम 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। सामान्य लाभार्थियों के लिए 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है।

खेती में हमेशा में आवश्क उपकरणों के लिए सब्सिडी दी जाती है। इन उपकरणों में एमबी प्लाऊ, डिस्क प्लाऊ, कल्टीवेटर, हैरो, लेवलर ब्लेड, केज व्हील, फरो ओपनर, रिज़र, रोटा कल्टीवेटर के लिए 40 से 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है।

बुवाई, रोपण, कटाई और खुदाई करने वाले उपकरणों के लिए पोस्ट होल डिगर, पोटेटे डिगर, प्याज हार्वेस्टर, शुगर केन कटर, सीड ड्रिल, रेज़्ड बेड प्लांटर, मल्टीक्रॉप प्लांटर के लिए भी सरकार किसानों को अधिकतम 50 से 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है।

फार्म मशीनरी बैंको की स्थापना - उचित स्थानों एवं फसल के लिए कस्टम हायरिंग के लिए फार्म मशीनरी बैंकों की स्थापना हेतु उपयुक्त सहायता प्रदान करता है।

10 लाख तक की लागत के कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना हेतु अनुदान 4 लाख तक दिया जाता है। इसी प्रकार 60 लाख रुपए तक कस्टम हायरिंग बैंको 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। एसएमएएम के अनतर्गत किराए पर दिये जाने वाले उपकरणों की सूची http\\farmech.dac.gov.in पर दी गई है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित किसी अन्य उपकरण पर सहायता के लिए श्रेणी के अनुसार कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विचार किया जाता है।   



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