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बिहार में डिजिटल कृषि की नई पहल: ‘भारत-विस्तार’ का ‘बिहार कृषि’ ऐप से समेकन, एआई आधारित परामर्श एक ही मंच पर
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बिहार देश का पहला राज्य है जिसने ‘भारत-विस्तार’ का आधिकारिक लोगो अपनाया और इसकी चैटबॉट सुविधा को व्यवहार में लागू किया।
सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, बिहार के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में रामकृपाल यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने ‘भारत-विस्तार’ प्लेटफॉर्म का सफलतापूर्वक ‘बिहार कृषि’ मोबाइल ऐप के साथ समेकन कर दिया है। इस एकीकृत डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसानों को अब एआई-आधारित कृषि परामर्श, योजनाओं की जानकारी और विभागीय सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी। इस अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, कृषि निदेशक, उद्यान निदेशक सहित वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
क्या है ‘भारत-विस्तार’ और ‘बिहार कृषि’ ऐप
‘बिहार कृषि’ मोबाइल ऐप राज्य सरकार का आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से किसानों को योजनाओं, अनुदान, बीज वितरण, फसल बीमा, मौसम आधारित सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन की जानकारी दी जाती है।
वहीं ‘भारत-विस्तार’ (Bharat Vistar) एक डिजिटल एग्री-एडवाइजरी प्रणाली है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स और रीयल-टाइम कृषि परामर्श जैसी सुविधाएं शामिल हैं। मंत्री के अनुसार, बिहार देश का पहला राज्य है जिसने ‘भारत-विस्तार’ का आधिकारिक लोगो अपनाया और इसकी चैटबॉट सुविधा को व्यवहार में लागू किया।
एआई आधारित चैटबॉट से क्या बदलेगा
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मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि अब किसान अपनी फसल से जुड़ी समस्या का समाधान चैटबॉट के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे मौसम आधारित सलाह और रोग-निदान संबंधी सुझाव तुरंत पा सकेंगे
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सरकारी योजनाओं की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी डिजिटल माध्यम से जान सकेंगे,निकटतम कृषि कार्यालय या सेवा केंद्र की जानकारी पा सकेंगे,
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यह सुविधा विशेष रूप से उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो बार-बार प्रखंड या जिला मुख्यालय नहीं जा पाते।
डिजिटल कृषि नवाचार की दिशा में बिहार
राज्य सरकार के अनुसार, इस समेकन का उद्देश्य कृषि विस्तार सेवाओं को अधिक पारदर्शी, त्वरित और वैज्ञानिक बनाना है। बिहार में करीब 75 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सेवा-प्रदान की प्रक्रिया तेज करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एआई-आधारित परामर्श स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय फसल-पद्धति के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो यह कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
किसानों को संभावित लाभ
समय और लागत की बचत
सलाह के लिए कार्यालयों के चक्कर कम लगेंगे, रोग एवं कीट नियंत्रण में तेजी, त्वरित डिजिटल निदान से नुकसान घटेगा, योजनाओं की बेहतर पहुँच जानकारी की पारदर्शिता बढ़ेगी, डेटा आधारित खेती मौसम और मिट्टी के आंकड़ों पर आधारित सलाह
चुनौतियाँ भी कम नहीं
हालांकि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कितनी मजबूत है।
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छोटे और सीमांत किसान ऐप का उपयोग करने में कितने सक्षम हैं।
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स्थानीय बोली (मगही, मैथिली, भोजपुरी आदि) में परामर्श कितना सटीक है
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फील्ड स्तर पर कृषि समन्वयकों का सहयोग कितना प्रभावी है।
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यदि इन बिंदुओं पर ध्यान दिया गया, तो यह पहल बिहार को डिजिटल कृषि नवाचार के अग्रणी राज्यों में ला सकती है।
‘भारत-विस्तार’ और ‘बिहार कृषि’ ऐप का समेकन बिहार सरकार की डिजिटल कृषि रणनीति का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एआई और डेटा आधारित परामर्श के जरिए राज्य सरकार किसानों को तकनीक-संचालित, त्वरित और वैज्ञानिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है और किसान इसे किस हद तक अपनाते हैं।
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