सजावटी मछलीपालन पर पायलट परियोजना लांच करेगा :कृषि मंत्रालय

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के पशुपालन, डेयरी तथा मछलीपालन विभाग सजावटी मछलीपालन की क्षमता और व्यापकता को महसूस करते हुए 61.89 करोड रूपये की लागत से पायलट आधार पर सजावटी मछलीपालन परियोजना लांच करेगा। इस पायलट परियोजना को लागू करने के काम में मछलीपालन व्यवसाय और निर्यात में लगे लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सजावटी मछलीपालन के सशक्त और समग्र विकास का वातावरण बनाना है। क्लस्टर आधारित खेती तथा प्राकृतिक संसाधन-स्वदेशी और समुद्री-की वास पुर्नस्थापना और हितधारकों में जागरूकता पैदा करके सजावटी मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष क्षेत्रों की पहचान की गयी है।

पायलट परियोजना की प्रमुख विशेषताऐं हैं: (1) क्लस्टर आधार पर सजावटी मछलीपालन को प्रोत्साहित करना (2) सजावटी मछलीपालन और निर्यात से आय को सुदृढ़ बनाना (3) ग्रामीण और ग्रामीण क्षेत्र के बाहर की आबादी के लिए रोजगार अवसरों का सृजन करना (4) सजावटी मछलीपालन को फलता-फूलता व्यवसाय बनाने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और नवाचार का उपयोग।

पायलट परियोजना लागू करने के उद्देश्य से क्षमता वाले 8 राज्य-असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल-चिन्हित किए गए हैं। पायलट परियोजना की गतिविधियों को चार प्रमुख समूहों में रखा गया है ये हैं-(क) सजावटी मछली उत्पादन से संबधित गतिविधियां यानी घर के पीछे के हिस्से में मछलीपालन ईकाइयां स्थापित करना, मझोले आकार की ईकाइयां बनाना, एकीकृत प्रजनन और उत्पादन इकाइयां लगाना (ख) एक्वेरियम फैब्रिकेशन, व्यापार तथा मार्केटिंग से संबंधित गतिविधियां (ग) सजावटी मछलियों के प्रोत्साहन के लिए गतिविधियां तथा (घ) कौशल विकास और क्षमता सृजन से जुड़ी गतिविधियां।

सजावटी मछलीपालन की पायलट परियोजना राष्ट्रीय मछली पालन विकास बोर्ड (एनएफडीबी) राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के मछलीपालन विभागों के माध्यम से लागू करेगा। सजावटी मछलियों की पायलट परियोजना के अंतर्गत धन वितरण व्यवस्था सीएसएस ब्लू क्रांति: मछलियों के एकीकृत विकास और प्रबंधन के धन वितरण व्यवस्था के अनुरूप हैं। पायलट परियोजना लागू करने में केन्द्र सरकार के दायित्वों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधन जहां तक संभव होगा संमिलन रूप में भारत सरकार की अन्य योजनाओं की दी गयी निधि को तर्कसंगत बनाकर जुटाए जाएंगे। प्रस्तावित पायलट परियाजना लागू करने के लिए कम से कम 1 वर्ष की अवधि आवश्यक है।

दूसरी ओर सजावटी मछलीपालन परंपरागत मछलीपालन क्षेत्र का एक उप क्षेत्र है जिसमें प्रजनन और सामान्य जल और समुद्री जल में पालन सुविधा होती है। यद्यपि सजावटी मछलीपालन खाद्य और पोष्टिकता सुरक्षा में प्रत्यक्ष रूप से कोई योगदान नहीं करता लेकिन ग्रामीण क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र से बाहर की आबादी के लिए विशेषकर महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को अंशकालिक गतिविधियों के लिए आजीविका और आय प्रदान करता है। भारत में सजावटी मछली पालन उद्योग आकार में छोटा है लेकिन विकास की संभावनाओं से भरपूर है। इसके प्रमुख आकर्षणों में कम समय में कम उत्पादन लागत और अधिक प्राप्ति तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढती मांग है। अपने देश के विभिन्न हिस्सों में समुद्री सजावटी मछलियों की लगभग 400 प्रजातियां हैं और सामान्य जल में सजावटी मछलियों की 375 प्रजातियां हैं। 

मछली पालन और जल कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से परोसी जाने वाली मछलियों के उत्पादन पर बल देता है। परिणामस्वरूप सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में मछली के उत्पादन और उत्पादकता बढाने के लिए धन लगाया जाता है।

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