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प्रगतिशील किसानों के लिए बामेती में किया गया एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-फीडबैक कार्यक्रम का आयोजन

राज्य को बागवानी क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर पहुँचाने के लिए बामेती, पटना के सभागार में आयोजित उद्यान क्षेत्र में नवाचार से संबंधित प्रगतिशील किसानों का प्रशिक्षण-सह-फीडबैक कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।

माननीय कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि देश के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी के संकल्प वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के उद्देश्य तथा बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री के सपने हर भारतीय के थाल में बिहार का एक व्यंजन पहुँचाने में बागवानी की अहम भूमिका है। राज्य आज देश में मधु उत्पादन में प्रथम, सब्जी उत्पादन में दूसरा तथा फल उत्पादन में पाँचवें स्थान पर है।

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि उत्पाद खासकर साग-सब्जी एवं फलों की बढ़ती मांग से महंगाई में भी वृद्धि हो रही है, साथ ही अंधाधुंध रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवारनाशक दवाओं तथा फलों को पकाने हेतु एवं सब्जी को आकर्षक बनाने में अमानक रसायनों का उपयोग बढ़ता जा रहा है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता में भारी गिरावट देखने को मिल रहा है। शहरी क्षेत्रों में लगे पानी की निकासी के नालों के गंदे जल द्वारा सिंचित साग-सब्जी विशेषकर पत्तेदार (भाजी) सब्जियों में हानिकारक भारी तत्वों की निर्धारित सीमा से अधिक होना मानव स्वास्थ्य हेतु अत्यधिक हानिकारक है। शहरी क्षेत्रों में घरेलू कार्बनिक कचरा (साग-सब्जी के छिलके, बचे हुए खाद्य सामग्री आदि) भी आसपास के वातावरण को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। साथ ही, यह स्वच्छता अभियान में भी एक रूकावट का कार्य करती है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही साथ शहरी क्षेत्रों में भी भूमि एवं जल प्रबंधन के माध्यम से कृषि क्षेत्र में उत्पादन को बढ़ाने हेतु पारम्परिक एवं नवाचार पद्धतियों को अपनाया जाना जरूरी है।

डॉ० कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम में राज्य के प्रगतिशील किसान सरकारी योजनाओं के अतिरिक्त अपने पहल पर कौन-कौन सी नई तकनीक का उपयोग किये हैं, जिससे उन्हें लाभ भी प्राप्त हो रहा है, पर जानकारी प्राप्त की गई। आज के कार्यक्रम में सब्जी, फल, मशरूम तथा अन्य औद्यानिक उत्पाद पर किसानों के विचार आमंत्रित किये गये। कार्यक्रम में किसानों ने अपने पहल पर नित नये प्रयोगों की जानकारी उपलब्ध करायी। किसानों ने बताया कि बागवानी के उत्पादों में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिसके कारण इस रखने एवं भंडारण करने में उत्पाद का नुकसान ज्यादा होता है। भंडारण हेतु सहयोग तथा सोलर पैनल शीतगृह की सुविधा के संबंध में किसानों ने अपनी इच्छा व्यक्त की। किसानों के इस फीडबैक का उपयोग राज्य के कृषक हित में किया जा सकता है तथा बताया कि अगर बाजार व्यवस्था तथा प्रसंस्करण का सहयोग औद्यानिक उत्पादों में कर दिया जाये तो किसानों के दोगुनी आमदनी का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

इस बैठक में निदेशक उद्यान श्री नंद किशोर, निदेशक बामेती डॉ० जीतेन्द्र प्रसाद, संयुक्त निदेशक उद्यान सुनील कुमार पंकज, उप निदेशक उद्यान नीतेश कुमार राय तथा राज्य के सभी जिलों के लगभग 300 बागवानी से संबंधित नवाचार किसान और जिला स्तरीय बागवानी के पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

किसानों से प्राप्त अहम जानकारी एवं सुझाव निम्नांकित हैं-

1. अनानास के लिए प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

2. किशनगंज के किसानों को अनानास के ऊपर अनुदान की राशि दिया जाय।

3. अनानास के लिए किशनगंज तथा पोठही प्रखंड में मंडी का व्यवस्था।

4. मशरूम के संबंध में विभाग से छोटे यूनिट पर अनुदान उपलब्ध कराने की माँग।

5. मशरूम किसानों के मदद हेतु किसान क्रेडिट कार्ड की आवश्यकता।

6. ताजा मशरूम के भंडारण हेतु भंडार गृह तथा प्रसंस्करण यंत्र की माँग।

7. मशरूम सुखाने हेतु डिहाइड्रेटर की आवश्यकता।

8. जामुन की सीडलेस भेराईटी एस०आर० 13 एवं नींबू की सीडलेस भेराईटी को अपने राज्य में बढ़ावा देने की माँग।

9. तम्बाकू की खेती के स्थान पर केला, गन्ना एवं टमाटर की खेती पर किसानों ने सहमति व्यक्त की तथा इस संबंध में सरकार से सहयोग की माँग।

10. समस्तीपुर के किसानों के द्वारा जैविक ओल को बढ़ावा देने की माँग।

11. पटना जिले से फूल की मंडी पटना शहरी क्षेत्र में बनाने की माँग।

12. अररिया में मेंथा की खेती हेतु लक्ष्य निर्धारण तथा अनुदान उपलब्ध कराने की माँग।

13. राज्य बागवानी मिशन के द्वारा पूर्व में निर्मित किये गये पॉलीहाऊस एवं शेडनेट के जीर्णोद्धार हेतु अनुदान।

14. जैविक खेती करने वाले कृषकों ने पटना में सरकारी स्तर पर दुकाने उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि जैविक उत्पाद का अधिक मूल्य प्राप्त हो।

15. ड्रैगन फ्रूट की खेती में लागत अधिक आती है, इस पर अनुदान की व्यवस्था।

16. स्ट्रॉबेरी की स्लिप्स का उत्पादन बिहार में ही हो।

17. फल एवं सब्जी प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अनुदान।

18. मधुमक्खीपालकों को उपलब्ध कराये गये मधुमक्खी बॉक्स पर अनुदान में बढ़ोत्तरी।

19. नाबार्ड हाट के लिए सरकारी स्तर पर जमीन उपलब्ध करायी जाये।



English Summary: Organizing one-day training-cum-feedback program for progressive farmers in Bameti

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