किसानों के हित में एक कदम

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक समिति ने 2017-18 के लिए गन्ना के लिए उचित और लाभकारी मूल्य 255 रुपये प्रति क्विंटल तय करने को मंजूरी प्रदान कर दी है।इससे बेसिक तौर पर 9.5 प्रतिशत की रिकवरी होगी जो 2.68 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रत्येक प्वांट पर 0.1 प्रतिशत की वृद्धि होगी। 

अनुमोदित एफआरपी चीनी सीजन 2016-17 के एफआरपी पर 10.87% की वृद्धि को दर्शाता है। स्वीकृत मूल्य 2017-18 के दौरान किसानों से गन्ना खरीद के लिए लागू होगा। यह फैसला सरकार के किसानों उन्नमुखी होने को दर्शाता है जिसे चीनी उद्योग और गन्ना किसानों के हितों को देखते हुए लिया गया है। 

विवरण 

चीनी उद्योग एक महत्वपूर्ण कृषि आधारित उद्योग है, जो लगभग 50 मिलियन गन्ना किसानों की आजीविका पर प्रभाव डालता है और खेत श्रम एवं ट्रांसपोर्टरों सहित विभिन्न अनुषंगी गतिविधियों में कार्यरत लोगों के अलावा इससे लगभग 5  लाख श्रमिकों को सीधे चीनी मिलों में काम मिलता है। किसानों को गन्ने का उचित मूल्य मिले इस लिए यह फैसला लिया गया है।

राज्य सरकारों और अन्य हिस्सेदारों के साथ विचार-विमर्श के बाद कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर गन्ने का एफआरपी तय किया जाता है। अनुशंसित एफआरपी को विभिन्न कारकों जैसे कि उत्पादन की लागत, समग्र मांग-आपूर्ति की स्थिति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों, अंतर-फसल की कीमत समानता, प्राथमिक उप-उत्पादों के व्यापार की कीमतों को ध्यान में रखते तय किया जाता है। आम मूल्य स्तर और संसाधन उपयोग दक्षता पर नए गन्ना मूल्य का संभावित प्रभाव पड़ता है।

पिछले तीन वर्षों में गन्ना किसानों को मदद देने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनकी बकाया राशि का चीनी मिलों द्वारा भुगतान किया जाए भारत सरकार ने एसईएफएएसयू- चीनी उत्पादन और निर्यात को प्रोत्साहित करने की योजना शुरू की है। इन कदमों से, गन्ना मिलों के लिए फंड उपलब्ध हो सकेगा जिससे वे गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान आसानी से कर सकेंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसे आएंगे।


इसकी वजह से, 2014-15 और 2015-16 के लिए किसानों के गन्ना मूल्य बकाया की मंजूरी क्रमश: 99.33% और 98.5% तक पहुंच गई है। पिछले पांच वर्षों की तुलना में इसी अवधि में 2016-17 के लिए गन्ना मूल्य बकाया सबसे कम है।मौजूदा चीनी सीजन की उत्पादन में कमी और किसी भी संभावित प्रतिकूल कीमत की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने शून्य सीमा शुल्क पर पांच लाख मिट्रिक टन चीनी के आयात को मंजूरी भी दी है।हालांकि, भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए आयात मात्रा को क्षेत्रीय प्रतिबंधों के साथ प्रतिबंधित कर दिया गया है ताकि इसे केवल वास्तव में कमी वाले क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जाए और गन्ना किसानों के हित की भी रक्षा की जा सके।

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