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खरीफ फसलों पर किसानों को डेढ़ गुना एमएसपी देने पर सरकार की तैयारी

कम न्यूनतम समर्थन मूल्य अर्थात् एमएसपी की वजह से किसान हमेशा अपना दुखड़ा रोते हैं। उनके इसी दुखड़े की शायद सुनवाई हो गई है और इस बार के बजट 2018-2019 में केंद्र सरकार ने किसानों को खरीफ फसलों के लिए लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने और इसके लिए नीति बनाने का ऐलान किया है। सरकार इस काम को जल्द शुरू करने की तैयारी कर रही है।

कृषि मंत्रालय का कहना है कि जल्द ही केंद्र सरकार और नीति आयोग इस मसले पर राज्यों से विचार-विमर्श शुरू कर देंगे कि खरीफ की सभी फसलों पर लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दिया जाएगा या फिर यह कुछ चुनिंदा फसलों के लिए मान्य होगा।

उम्मीद के मुताबिक नहीं एमएसपी

सरकार पिछले वर्ष नवंबर में रबी फसलों के लिए लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देने का ऐलान कर चुकी है लेकिन किसान संगठनों और विपक्ष ने सरकार पर लांछन लगाते हुए कहा कि सरकार ने लागत का आंकलन ठीक तरह से नहीं किया जिस कारण एमएसपी का निर्धारण किसानों की उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ है।

एमएसपी दिलवाना सबसे बड़ी चुनौती

केंद्र सरकार का मानना है कि लागत पर एमएसपी बढ़ाने से बात नहीं बनेगी बल्कि हमारे लिए किसानों को इसे दिलाना ही सबसे बड़ी चुनौती है। उत्पादन बढ़ने और मांग कम होने से फसलों के दाम गिर जाते हैं। ऐसी स्थिति से उबरने के लिए सरकार किसानों को नुकसान से बचाने और फसल का उचित दाम दिलवाने के लिए भी राज्य सरकारों से बातचीन करने की तैयारी में है।

मध्यप्रदेश की भावांतर योजना होगी लागू

इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए सरकार ने मध्यप्रदेश की भावान्तर योजना को पूरे देश में लागू करने की योजना बनाई है। यदि यह योजना पूरे देश में लागू होती है तो देशभर के किसानों को एमएसपी और बाजार रेट में अंतर होने पर किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

क्या है भावांतर योजना?

मध्यप्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में किसानों के कल्याण और कृषि के क्षेत्र में बेहतर भविष्य की संभावनाओं के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना शुरू की है। राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में कीमतों के जोखिम को कम कर उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करने व कृषि उत्पादों के लिए मुआवजा देने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों द्वारा आत्महत्या करने के मामलों की दर को प्रतिबंधित किया जा सकेगा। 

मूल्यों में अंतर

योजना के अनुसार सरकार ने पाया कि किसानों को दिए जा रहे मूल्य और मेहनत के अनुसार मंडी के वास्तविक मूल्य में बहुत अंतर है। यही वजह है कि सरकार ने फसल का पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने का निर्णय लिया।

किसानों को लाभ

यदि यह योजना पूरे देश में लागू होती है तो किसानों को इस योजना से बहुत सारे लाभ मिलेंगे क्योंकि इससे उन्हें किसी भी प्रकार का घाटा नहीं होगा। किसान अपने ऋण को जमा कर सकते हैं और अगले मौसम की फसलों की बुवाई भी कर सकते हैं।

मोबाइल एप भी होगा शुरू

सरकार इस योजना की लोकप्रियता के आधार पर एक मोबाइल एप भी शुरू करने की योजना बना रही है। यह विवादरहित योजना है। यदि किसी कारणवश किसी किसान के साथ कोई विवाद होता है तो मामले पर तीन माह तक विचार किया जाएगा उसके बाद ही किसान को सारे लाभ दिए जाएंगे।

दी जाने वाली राशि की कटौती वेतन से

इस योजना की खासियत यह है कि किसानों को दी जाने वाली राशि सरकारी कर्मचारियों के वेतन से काटी जाएगी। ये वे कर्मचारी होंगे जो काम नहीं करते हैं या जिनकी वजह से मामले की समय पर सुनवाई नहीं हो पाती है।

यह दीर्घकालिक समाधान नहीं

यह योजना यदि पूरे देश में लागू होती है तो निश्चित रूप से किसानों को आर्थिक मदद मिलेगी लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। इसके लिए सरकार को किसानों को सुविधा प्रदान करने के लिए आधारभूत संरचना का विकास करना होगा और अतिरिक्त बेहतर सिंचाई सुविधाओं को प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी को किसानों को प्रदान करना होगा।

यह फसलें हो सकती हैं शामिल

इस योजना के तहत सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग, उड़द, तुअर दाल को पहले चरण में शामिल किया जा सकता है। यदि योजना सफल होती है तो अन्य फसलें भी इस योजना के अंतर्गत लाई जा सकती हैं।



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