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नींबू की बढ़ती जा रही खटास ने स्वाद फीका किया

गर्मियों के मौसम में पानी की कमी को दूर करने वाले नींबू की खटास बढ गई है. दरअसल राजस्थान में पानी की कमी और मौसम की मार के कारण प्रदेश में नींबू की आवक काफी ज्यादा प्रभावित हो रही है. इसके कारण पिछले दो सप्ताह के अंदर नींबू के थोक भाव में 55 से 60 रूपए किलो तक पहुंच जाते है. वही खुदरा भाव 100 से 120 रूपये किलो तक पहुंच गए है.

अन्य राज्यों से आवक प्रभावित

एशिया की सबसे बड़ी मंडी मुहाना में नींबू मुख्य रूप से तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई, कोडम्बू, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और राजस्थान की राजधानी जयपुर के आस पास चौमूं, आमेर राजगढ़ , जालौर के सिरोही जिले से आता है. लेकिन फिलहाल गुजरात के मेहसाणा, तमिलनाडु के चेनन्ई के आसपास क्षेत्रों में इसकी 50 से 60 टन आवक हो रही है.यानि कि मुहाना मंडी में कुल 15 ट्रक नींबू की कुल आवक हो रही है. पिछले साल की तुलना में इस वर्षनींबू के भावों में कुल 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है. पिछले साल नींबू के थोकदामों में  30 से 35 रूपए प्रति किलो का रेट था लेकिन बादज में यह 50 से 60 रूपए किलो तक का हो गया. नींबू के बढ़ते दामों पर जयपुर फल और सब्जी के विक्रेतासंघ के अध्यक्ष राहुल के मुताबिक इस बार नींबू के भावों में 20 से 30 रूपये किलों की तेजी देखने को मिल रही है. उन्होंने यह बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण दक्षिण क्षेत्र और गुजरात से नींबू की तेजी से आवक होना है. जैसे ही जुलाई का महीना शुरू होगा तो महाराष्ट्र से नींबू की आवक शुरू हो जाएगी उसके बाद इनके भावों में कमी होने के आसार है. राजस्थान में पानी की कमी और मौसम के बिगड़ने के कारण नींबू की पैदावार बेहद ही कम होगी.

नींबू प्रदेश में आवक

अभी देश के दक्षिण क्षेत्र से 25 से 30 टन प्रतिदिन आवक होने से इसके भावों में भी बढ़ोतरी हुई है. देश में 50 से 60 टन तक अभी दक्षिण क्षेत्र के चेन्नई, आंध्र प्रदेश और गुजरात के वालसाड, मेहसाणा समेत की क्षेत्रों से आ रही है. इसीले इनका भाव बढ जाता है.

यह है किस्म

अगर हम नींबू की किस्म की बात करें तो राजस्थान में बासमती किस्म का नींबू आता है. यहां के बिजोरयां और चक्रधर नींबू में बीज नहीं होते है. इनके नींबू के फल से कम से कम 65 प्रतिशत रस निकलता है. यह नींबू पथरी, गठिया, हैजा और मलेरिया में काफी ज्यादा लाभदायक होता है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई से सिंतबर के मध्य और महाराष्ट्र और राजस्थान के जयपुर के आसपास के क्षेत्रों, जालौर व सिरोही से आवक शुरू होगी.



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