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बर्बाद हो चुके दुग्ध उद्योग को वर्गीज कुरियन ने संजीवनी दे दिया, जानिए अमूल की कहानी

सिप्पू कुमार
सिप्पू कुमार
Ammul

देश आज उस आदमी को नमन कर रहा है, जिसके कारण भारत में दूध की नदियां बह रही है. जी हां, आज ही के दिन डॉ. वर्गीज कुरियन की डेथ एनिवर्सिरी है. वर्गीज देश के ही नहीं बल्कि दुनिया के जाने-माने डेयरी प्रोडक्ट ब्रैंड अमूल (AMUL) के फाउंडर थे. उन्हें श्वेत क्रांति के जनक के रूप में भी जाना जाता है. चलिए इस लेख के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे छोटे से किसान का बेटा भारत में श्वेत क्रांति लाने में सफल रहा.

शिक्षा

'मिल्कमैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध हो चुके डॉ. वर्गीज कुरियन का जन्म केरल के एक छोटे से गांव कोझिकोड में 26 नवंबर 1921 में हुआ था. उन्होनें लोयोला कॉलेज से ग्रेजुएशन और गिंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पढ़ाई की. इस दौरान उन्हें सिर्फ अपनी पढ़ाई की चिंता थी. आम युवाओं की तरह वो काम की खोज करते हुए जमशेदपुर स्थित टिस्को चले गए.

स्कॉलरशिप से अमेरिका तक का सफर

वो दौर था जब भारत के युवा पढ़ाई के लिए अमेरिका जैसे बड़े देशों की तरफ आकर्षित हो रहे थे. वर्गीज को भी भारत सरकार से स्कॉलरशिप मिला और वो अमेरिका पढ़ाई करने चले गए. लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था, मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद भी वो वहां नहीं रूके. मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद वापस भारत लौटे.

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ammul

छोटी सी चिंगारी से आई क्रांति

अमेरिका से लौटने के बाद वर्गीज एक छोटे मिल्क पाउडर कारखाने में डेयरी इंजीनियर के तौर पर काम करने लगे. धीरे-धीरे उन्हें ऐहसास हुआ कि कैसे पशुपालकों का शोषण हो रहा है और उन्हें उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा. उसी दौरान दुग्ध उत्पादक संघ का एक निजी डेयरी के खिलाफ संघर्ष तेज हो गया. इन सभी घटनाओं ने उनके युवा मन को प्रभावित किया और आखिरकार उन्होनें नौकरी छड़कर कुछ अपना काम शुरू करने का मन बना लिया.बहुत सोचने के बाद एक छोटे से गैराज में एक डेयरी खोला गया, जिसका नाम उन्होंने अमूल डेयरी रखा. जिस बात को कोई नहीं समझ पा रहा था, वर्गीज वो समझने में कामयाब रहे. उन्होंने गांव के किसानों को दूध के बदले उचित मूल्य देना शुरू किया. बहुत जल्दी ही उनके साथ दो गांवों के किसान जुड़ गए. कुछ ही समय में डेयरी सहाकारित संघ की स्थापना भी कर दी गई.

लालबहादुर शास्त्री का मिला साथ

अमूल की सफलता चारो तरफ तहलका मचा रही थी. गांव-गांव से किसान उनके साथ जुड़ने लगे. अचानक देश में दूध का उत्पादन तेज होने लगा. इस सफलता की गूंज तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री तक भी गई. शास्त्री जी अमूल मॉडल से बहुत प्रभावित हुए. बिना देर किए उन्होनें इसे दूसरी जगहों पर फैलाने का निर्णय भी ले लिया. इसके लिए बाकायदा राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया गया.

1970 में भारत ने रचा इतिहास

1970 में अमूल मॉडल की बदौलत भारत ने इतिहास रच दिया. अंग्रेजी शासन के दौरान जो भारत अकाल के मुंह में जा रहा था, वही भारत 1970 में दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया. यहां दूध की नदियां बहने लगी. अमूल डेयरी की स्थापना करने वाले वर्गीज कुरियन आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कंपनी आज भी बेस्ट प्रोडक्ट क्वलिटी के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है.  

English Summary: know more about white revolution and Dr Verghese Kurien on his death anniversary

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