पंतनगर विश्वविद्दालय को कृषि पुस्तकों के प्रकाशन हेतु दस लाख का अनुदान

पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रकाशन निदेशालय को कृषि एवं संबंधित विषयों की पुस्तकों का हिन्दी में प्रकाशन करने हेतु वर्ष 2018-19 के लिए दस लाख रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। यह अनुदान केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा प्रदान किया गया है। यह आयोग देश भर के विश्वविद्यालयों में स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षण का माध्यम हिन्दी व प्रादेशिक भाषाओं में करने हेतु प्रयासरत है तथा इसके लिए विभिन्न विषयों की हिन्दी व प्रादेशिक भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें व संदर्भ पुस्तकें उपलब्ध कराने हेतु देश के विभिन्न प्रदेशों में स्थित ग्रंथ अकादमियों व विश्वविद्यालय सेल को अनुदान प्रदान करता है। पंतनगर के प्रकाशन निदेशालय को यह अनुदान कृषि व संबंधित विषयों की स्नातक स्तर की पुस्तकें हिन्दी में प्रकाशित करने हेतु दिया जाता है।

            प्रकाशन निदेशालय के प्रभारी अधिकारी,  डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि निदेशालय द्वारा विगत वर्षों में प्राप्त अनुदान से अब तक कृषि, पशुचिकित्सा, पशुपालन, गृहविज्ञान एवं कृषि प्रौद्योगिकी विषयों की 226 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है, जिनमें 30 से अधिक पुस्तकों के एक से अधिक संस्करण सम्मिलित हैं। निदेशालय की कुछ पुस्तकें विद्यार्थियों, किसानों व कृषि व्यवसायों में इतनी प्रचलित हुयी हैं कि उनके चार से छह संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं यथा, भारत की प्रमुख फसलें, फलों की उन्नत बागवानी, व्यावहारिक फल-सब्जी परिरक्षण सब्जियों की खेती और व्यवसाय इत्यादि। डॉ. कुमार ने बताया कि प्रकाशन निदेशालय की 25 पुस्तकों को विभिन्न पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें 21 पुस्तकों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पुरस्कार, 3 पुस्तकों को केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का शिक्षा पुरस्कार तथा 1 पुस्तक को केन्द्रीय गृह मंत्रालय के कार्यालयी भाषा विभाग का इंदिरा गांधी पुरस्कार सम्मिलित हैं। प्रकाशन निदेशालय अपने सीमित मानव संसाधन से कृषि व संबंधित विषयों के साहित्य में नये आयाम जोड़ने हेतु निरंतर प्रयासरत है। निदेशालय की हाल ही में प्रकाशित पुस्तकों में नींबू वर्गीय फल व बकरी पालन पुस्तकों के नये संशोधित संस्करण सम्मिलित हैं तथा उत्तरी भारत में मछली पालन पुस्तक प्रेस में मुद्रण की प्रक्रिया में है, जो शीघ्र पाठकों को उपलब्ध होगी।

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