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किसानों को सब्सिडी के लिए अब नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर !

देश में दिनोंदिन बढ़ती खाद्य समस्या को हल करने के लिए किसानों के द्वारा वैज्ञानिक विधि से खेती करना बहुत जरुरी है. इस विधि से खेती करने पर एक ही खेत में एक साल में कई फसलें उगाई जा सकती हैं. इसके लिए किसानों के पास उन्नत बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक दवा तथा पानी की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ समय पर कृषि कार्य जुताई,  बुवाई,  सिंचाई,  कटाई,  मड़ाई एवं भंडारण आदि करने हेतु आधुनिक कृषि यंत्र भी होना बहुत जरुरी हैं. लेकिन इन कृषि यंत्रों को सब्सिडी पर खरीदने के लिए किसानों को बैंकों, कृषि विभाग और सरकारी कार्यालयों के काफ़ी चक्कर काटने पड़ते है, पर अब ऐसा नहीं करना पड़ेगा.

दरअसल उत्तराखंड के रुद्रपुर में किसानों को अब सब्सिडी पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए 'कृषि विभाग' के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. किसान अब कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल 'एग्री मशीनरी डॉट एनआईसी डॉट इन' (agrimachinery.nic.in ) पर कृषि यंत्रों की बुकिंग करा सकते हैं. यंत्र खरीदने के बाद सब्सिडी किसानों के बैंक खातों में सीधा पहुंचेगी. बता दे कि किसानों को कृषि यंत्रों सस्ते दामों पर मुहैया करवाने के लिए सरकार सब्सिडी देती है. सब्सिडी पर यंत्र खरीदने के लिए किसानों को 'कृषि विभाग' समेत अन्य सरकारी दफ्तरों में चक्कर काटने पड़ते हैं. लेकिन सरकार ने अब किसानों के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है. इस पोर्टल के जरिए किसान रोटावेटर, हैरो, कल्टीवेटर, ट्रैक्टर आदि की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं.

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक,  इस संबंध में मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. अभय सक्सेना ने कहा है कि 'एक किसान एक साल में सिर्फ एक कृषि यंत्र खरीद सकता है. एक ही कृषि यंत्र की दूसरी खरीद 5 साल में एक बार की जा सकती है. उन्होंने बताया कि किसान को पहले पोर्टल में पंजीकरण करना होगा. इसके बाद अलग-अलग फर्मों में बिकने वाले कृषि यंत्रों के मूल्य पोर्टल में दर्ज करने होंगे. कृषि यंत्र खरीदने के बाद बिलों को जमा कराने के बाद सब्सिडी किसानों के खातों में पहुंच जाएगी. उन्होंने कहा कि सब्सिडी पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए किसानों को खतौनी आदि दस्तावेज जमा का विवरण देना होगा.



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