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किसानों का ई-बाजार बना जरूरतमंदों की संजीवनी

देश में 21 दिन का लॉकडाउन लगा हुआ है जिसके चलते लोंगो को घरों में ही रूकना पड़ रहा है. इस सक्रमण को रोकने के लिए सरकारें अपने स्तर पर काम कर रही है. जिस समय देश में विकास पहिया रूक गया है ठीक उसी समय ही वाराणसी की एक समाज सेवी डॉ. दीप्ति ने किसानों और आम जनमानस की सहायता करने करने का दृढ़ निश्चय कर लिया है. बता दें,  डॉ. दीप्ति गृहस्थ ज्योर्जिक लिमिटेड स्टार्टअप के नाम की संस्था में पहले से काम रही हैं. बता दें, इन्होंने वाराणसी शहर में जरूरत मंद लोगों और किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्थायी ई-बाजार स्थापित कर दिया है.

बता दें, वाराणसी और पड़ोसी जिले  के 225 किसान डॉ. दीप्ति के स्टार्टअप से जुड़कर विभिन्न प्रकार की खाने की वस्तुए तैयार करते हैं. स्टार्टअप से जुड़े हुए किसानों को वैज्ञानिक खेती की तरफ बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाती है. बता दें, जिस तरह फैमिली डॉक्टर काम करता है उसी तरह यह संस्था किसानो के लिए फैमिली फार्मर बना रखा है. जो आस पास के किसानों से जुड़े  हुए हैं.

क्या है  -बाज़ार

भारत सरकार द्वारा सचिवों के समूह की सिफारिशों के आधार पर, सरकारी ई-बाज़ार का गठन किया है जहाँ से विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा आवश्यक सामान्य उपयोग के सामानों और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद की जाती है. सरकारी ई-बाज़ार (GeM) के गठन का लक्ष्य सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता बढ़ाना है. यह सरकारी उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ई-बोली प्रक्रिया, रिवर्स ई-नीलामी और मांग एकत्रीकरण के उपकरण प्रदान करता है और सरकारी खर्च के लिए सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त करता है.

English Summary: Farmers' e-market becomes a living for the needy

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