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पर्यावरण के लिए खतरा : प्लास्टिक

सरकार के प्लास्टिक की पिन्नी  बैन करने के बाद भी लोगो के ऊपर कोई ख़ास असर नहीं हुआ।  आज भी शहर के कचरे में लगभग 20 प्रतिशत पिन्नियां निकलती है जबकि सर्कार का उद्देश्य यह था  की पन्नियां  बैन करने के बाद जो भी कचरा होगा उसका उपयोग जैविक खाद के लिए किया जायेगा।  लेकिन आदत से मज़बूर जनता को क्या ही कहा जाये। 

नगर पालिका के सीएमओ की माने तो उनकी तरफ से कूड़ा उठाने में कोई कमी नहीं की जा रही है। उनके हिसाब से शहर से लगभग प्रतिदन 40 टन  कचरा उठाया जा रहा है और साथ ही इसे ट्रेंचिंग ग्राउंड पर डंप कर पूरा किया जा रहा है।  इस कचरे से जैविक खाद बनाने के लिए इसका ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया था , लेकिन 900 टन  गीले कचरे से अभी तक बस 135 टन जैविक खाद ही बन सकी है। 

वह निजी कंपनी जिसके द्वारा जैविक खाद बनाई जा रही है, के हिसाब से वह सूखे कचरे को चार हिस्सों में बाँट रही है जिसमे कपडा, लोहा, पुष्ठा और पन्नी शामिल है।  और इसके साथ ही गीले कचरे को अलग किया गया है जिससे खाद बनाई जाती है।  वैज्ञानिको की माने तो सवा लाख की आबादी के शहर में   8  टन कचरा रोज का पर्यावरण के लिए खतरे की बात है।

पिन्नी के लिए जमावड़ा

नगर पालिका का कहना है की जब ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे की गाडी पहुँचती है तो वहां  पर पिन्नी उठाने वाले लोगो की भीड़ इकट्ठी हो जाती है और उन्हें रोकने पिन्नी बीनने वाले लोगो का वर्ग मार पिट करने लगता है। नगर पालिका का कहना है की शहर से उतने वाले चालीस टन कचरे में से लगभग आठ टन कचरा प्लास्टिक का होता हगाई जिसका मतलब साफ है की प्रशासन से छुप  कर ही सही प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्लास्टिक की ऐसी 60 प्रतिशत वस्तुएँ है जो रीसायकल नहीं की जा सकती जैसे कॉफ़ी और चाय के कप पानी की बोतल और प्लास्टिक की पॉलथिन आदि।  यही चीज़े है जिनसे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।

क्या कहना है धार के कलेक्टर का

धार के कलेक्टर दिलीप कासे का खान है की वह जबसे यहाँ आये है वह तबसे चिंतित है, उन्होंने कहा की दो दिए हुए है उन्हें ज्वाइन किये हुए और दो दिन से वह शहर में बिखरी पिन्नी और प्लास्टिक देखकर  परेशान  हो गए है। और अब जल्द ही सीएमओ को बुलाकर कार्यवाही की जाएगी। 

 

वर्षा.....



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