कृषि विभाग ने अमानक गेहूं बीज पर लगाया प्रतिबंध

सिवनी के अरी जिला के कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय किसानों को बांटे गए गेहूं के बीज खेतों में अंकुरित नहीं होने के मामले में कृषि विभाग ने इस गेहूं बीज की किस्म के विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया है। एक अखबार में छपी खबर के अनुसार अरी क्षेत्र के किसानों को वितरित किए गए छिंदवाड़ा के सलैया गांव की नीलकंट बीज उत्पादक समिति द्वारा तैयार एचआई 8713 किस्म के गेहूं बीज खेतों में अंकुरित नहीं होने का मामला प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद कृषि विभाग के उपसंचालक ने इस बीज की किस्म के विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया है।

 

ग्रामीणों को हुआ नुकसान

अरी क्षेत्र के किसानों ने सीएम हेल्पलाइन समेत अधिकारियों को दी शिकायत में बताया था कि अरी में तैनात ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उमाशंकर राहंगडाले ने किसानों को 40 किलोग्राम पैकिंग का गेहूं बीज 700-700 रुपए में बेचा था। सब्सिडी दर पर दिए गए इन बीजों को जब किसानों ने खेत में बोया तो 20 से 25 प्रतिशत बीज ही खेतों मे अंकुरित हुए थे। बीजों के अंकुरित नहीं होने के कारण किसानों की फसल चौपट हो गई। फसलों के चौपट होने किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। किसानों ने अमानक बीज से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति राशि देने की मांग अधिकारियों से की है।

 

ग्राम सेवक ने लौटाई बीज की राशि

बीज के विक्रय पर प्रतिबंध के आदेश जारी होने से पहले सोमवार को अरी के ग्राम सेवक उमाशंकर राहंगडाले ने अमानक बीज लेने वाले किसानों को बीज की लागत राशि लौटाई। शिकायत करने वाले 40 से 45 किसानों में से 30 से 35 किसानों ने बीज की लागत राशि 700 रुपए ग्राम सेवक से वापस ले लिए।

जबकि अन्य किसानों का कहना है कि अमानक बीज बोने से उनके खेत की पूरी फसल चौपट हो गई है। इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा है। बीज कंपनी और प्रशासन इस नुकसान की भरपाई करे। वे बीज की लागत राशि वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुए।

 

इन नियमों के तहत किया प्रतिबंधित

किसानों को बीज ग्राम योजनान्तर्गत गेहूं बीज किस्म एचआई -8713 वितरित किए गए थे। बीजों के अंकुरित नहीं होने की शिकायत पर कृषि विभाग के उपसंचालक एसके धुर्वे ने बीज अधिनियम 1966 एवं सीड कन्ट्रोल आर्डर 1983 का उल्लंघन पाए जाने पर बीज उत्पादक समिति द्वारा तैयार बीजों के विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।

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