उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने की दिशा में बरेली स्थित बी.एल. कामधेनु परिसर में स्वदेशी गौवंश आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स हेतु इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का विधिवत उद्घाटन किया गया. इस अवसर को प्रदेश के वैज्ञानिक एवं कृषि समुदाय ने ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा.
केंद्र का उद्घाटन अरुण कुमार सक्सेना, मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया. कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, पशुपालक, कृषि विशेषज्ञ तथा ब्राज़ील से आए उच्चस्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति रही.
करीब 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह एकीकृत परिसर स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक उन्नयन के उद्देश्य से स्थापित किया गया है. केंद्र में उन्नत इन विट्रो फर्टिलाइजेशन–एम्ब्रियो ट्रांसफर (आईवीएफ–ईटी) प्रयोगशाला, आधुनिक पैथोलॉजी परीक्षण प्रयोगशाला तथा जीनोमिक विश्लेषण सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं.
पैथोलॉजी प्रयोगशाला के माध्यम से पशुओं में रोगों की शीघ्र और सटीक पहचान सुनिश्चित की जाएगी, जिससे जैव-सुरक्षा मजबूत होगी और पशुधन की उत्पादकता में वृद्धि होगी. जीनोमिक प्रयोगशाला नस्ल सुधार, श्रेष्ठ पशुओं की पहचान तथा वैज्ञानिक, डेटा-आधारित प्रजनन प्रणाली को बढ़ावा देगी. वहीं आईवीएफ–ईटी तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के नियंत्रित एवं तीव्र संवर्धन को गति मिलेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी व्यवस्थाओं का एकीकृत स्वरूप पशुधन विकास के लिए समग्र एवं दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करता है.
कार्यक्रम में ब्राज़ीलियन एसोसिएशन ऑफ ज़ेबू ब्रीडस के अध्यक्ष सहित एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र का अवलोकन किया. प्रतिनिधिमंडल ने प्रयोगशालाओं, अनुसंधान अवसंरचना और पशुधन प्रबंधन प्रणाली का निरीक्षण करते हुए भारत–ब्राज़ील के बीच वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक चर्चा की.
इस पहल को दोनों देशों के बीच पशु आनुवंशिकी और डेयरी विकास के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है.
अपने संबोधन में मंत्री सक्सेना ने कहा कि यह केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘तीन सौ साठ डिग्री’ समग्र विकास दृष्टिकोण से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि इस मॉडल में पशुधन, जैव विविधता, जैविक कृषि, ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन को एकीकृत कर सतत ग्रामीण विकास की अवधारणा को साकार किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक राज्य है और वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों तथा उन्नत जीनोमिक अनुसंधान के माध्यम से राज्य उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, विशेषकर मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में भी योगदान दे सकता है.
मंत्री ने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत एवं ग्रामीण समृद्धि की दिशा में सशक्त पहल बताते हुए कहा कि आधुनिक आनुवंशिक तकनीकें किसानों की आय में वृद्धि, पशुधन की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार तथा दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी.
घनश्याम खंडेलवाल, अध्यक्ष, बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज़ ने कहा, “आज का दिन भारतीय पशुपालन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत और ब्राज़ील के बीच गहरे और सुदृढ़ संबंधों की आधारशिला पर निर्मित हुआ है. यह केंद्र 25 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें नई पीढ़ी के पशु विज्ञान के तीन प्रमुख स्तंभ—रोग निदान (पैथोलॉजी), जीनोमिक्स तथा उन्नत प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी—को एक ही छत के नीचे एकीकृत किया गया है.
यह समेकित व्यवस्था पशुधन क्षेत्र के समग्र रूपांतरण के लिए ‘360 डिग्री’ पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती है, जो वैज्ञानिक, टिकाऊ और दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.”
कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह एकीकृत अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्वदेशी गौवंश संरक्षण, नस्ल सुधार, स्वास्थ्य प्रबंधन और समग्र ग्रामीण विकास मॉडल के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा.
बरेली में स्थापित यह केंद्र आने वाले समय में उन्नत पशुधन अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा और देश के डेयरी क्षेत्र को वैज्ञानिक, सतत और आत्मनिर्भर दिशा प्रदान करेगा.
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