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221 किसानों पर पराली जलाने का आरोप, दर्ज हुई FIR

खेतों में पराली जलाने से केवल धरती की शक्ति कमजोर होती है, बल्कि हवा में धुआं घुलने से पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। सरकार ने खेतों में फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाई है, लेकिन इसके बावजूद बहुत से किसान पराली को आग के हवाले कर रहे हैं। कृषि विभाग भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने में सक्रियता दिखा रहा है। विभाग ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई करते हुए 221 एफआईआर दर्ज कराई है। अगर जुर्माना वसूली की बात करें तो अब तक विभाग एक लाख 93 हजार रुपए का जुर्माना वसूल चुका है। 

कृषि विभाग ने सरकार के आदेश पर पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई शुरू की हुई है, जो धान के सीजन खत्म होने तक जारी रहेगी। कृषि विभाग के अनुसार पराली जलाने से सिवाए नुकसान के एक भी फायदा नहीं है। पराली जलाने से जहां धरती की उर्वरा शक्ति घटती है, वहीं पर्यावरण को बड़ा नुकसान होता है। हवा में धुंआ भर जाता है जो केवल बीमार लोगों के लिए बड़ी परेशानी होता है,  बल्कि स्वस्थ लोगों को भी बीमार करने का काम करता है। ऐसे में किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने चाहिए। इससे किसानों के खेतों में उर्वरकों की लागत बढ़ती है जो उनके कृषि लाभ को काम करती है। 

सरकारी निर्देशों के अनुसार कृषि विभाग की ओर से खेतों में पराली जलाने वाले किसानों से जुर्माना वसूली के लिए स्पेशल टीम का गठन किया गया है। इस टीम में ग्राम सचिव, पटवारी, पॉल्यूशन ऑफिसर और एडीओ को शामिल किया गया है। अब तक एक लाख 93 हजार रुपए जुर्माना वसूला जा चुका है। 

जो किसान जुरमाना अदा नहीं करेंगे, उसके खिलाफ मुकदमें की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वातावरण को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। कृषि विभाग की कार्रवाई से खेतों में पराली जलाने से निकलने वाले धुंए से कुछ हद तक राहत मिल रही है, लेकिन लोगों के अनुसार कृषि विभाग और अधिक कार्य करने की जरूरत है। 



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